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इस मुस्लिम देश में लड़कियों की शादी की उम्र 9 वर्ष करने की तैयारी में जुटी सरकार, विरोध में आई महिलाएं

Lower Marriage Age Of Women In Iraq: इराक की संसद ने लड़कियों की शादी की उम्र घटाकर 9 साल करने का विधेयक पेश किया गया है। इराक के न्याय मंत्रालय द्वारा पेश किए गए इस विवादास्पद विधेयक का उद्देश्य देश के व्यक्तिगत स्थिति कानून में संशोधन करना है।

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इराक की संसद ने लड़कियों की शादी की उम्र घटाकर 9 वर्ष करने का विधेयक किया पेश

Photo : iStock
KEY HIGHLIGHTS
  • इराक की संसद ने लड़कियों की शादी की उम्र घटाकर 9 साल करने का विधेयक किया पेश
  • अभी इराक में महिलाओं के विवाह के लिए न्यूनतम आयु 18 वर्ष निर्धारित है
  • इराक में 28 प्रतिशत लड़कियों की शादी 18 वर्ष की आयु से पहले ही हो जाती है

Iraq Women Rights: इराक की संसद में प्रस्तावित विधेयक ने व्यापक आक्रोश और चिंता पैदा कर दी है। प्रस्तावित विधेयक में लड़कियों के लिए विवाह की कानूनी उम्र घटाकर सिर्फ़ 9 वर्ष करने का प्रस्ताव है। इराक के न्याय मंत्रालय द्वारा पेश किए गए इस विवादास्पद विधेयक का उद्देश्य देश के व्यक्तिगत स्थिति कानून में संशोधन करना है। बता दें, वर्तमान में इराक में महिलाओं के विवाह के लिए न्यूनतम आयु 18 वर्ष निर्धारित है। यह विधेयक नागरिकों को पारिवारिक मामलों में निर्णय लेने के लिए धार्मिक अधिकारियों या नागरिक न्यायपालिका के बीच चयन करने की अनुमति देगा। आलोचकों को डर है कि इससे उत्तराधिकार, तलाक और बच्चों की कस्टडी के मामलों में अधिकारों में कटौती होगी।

इराक में बाल विवाह और शोषण बढ़ने की आशंका

अगर यह विधेयक पारित हो जाता है, तो 9 साल की उम्र की लड़कियों और 15 साल की उम्र के लड़कों को विवाह की अनुमति मिल जाएगी, जिससे बाल विवाह और शोषण बढ़ने की आशंका है। आलोचकों का तर्क है कि यह कदम महिलाओं के अधिकारों और लैंगिक समानता को बढ़ावा देने में दशकों की प्रगति को कमजोर करेगा। मानवाधिकार संगठनों, महिला समूहों और नागरिक समाज कार्यकर्ताओं ने इस विधेयक का पुरजोर विरोध किया है और युवा लड़कियों की शिक्षा, स्वास्थ्य और कल्याण के लिए गंभीर परिणामों की चेतावनी दी है। उनका तर्क है कि बाल विवाह के कारण स्कूल छोड़ने की दर बढ़ जाती है, समय से पहले गर्भधारण हो जाता है और घरेलू हिंसा का जोखिम बढ़ जाता है।

संयुक्त राष्ट्र की बाल एजेंसी यूनिसेफ के अनुसार, इराक में 28 प्रतिशत लड़कियों की शादी 18 वर्ष की आयु से पहले ही हो जाती है। ह्यूमन राइट्स वॉच (एचआरडब्ल्यू) की शोधकर्ता सारा सनबार ने कहा कि इस कानून के पारित होने से यह पता चलेगा कि देश आगे नहीं बल्कि पीछे की ओर जा रहा है। इराक महिला नेटवर्क की अमल कबाशी ने भी इसका कड़ा विरोध करते हुए कहा कि यह संशोधन पहले से ही रूढ़िवादी समाज में पारिवारिक मुद्दों पर पुरुष वर्चस्व को बड़ी छूट प्रदान करता है। जुलाई के अंत में, जब कई सांसदों ने आपत्ति जताई तो संसद ने प्रस्तावित बदलावों को वापस ले लिया। सदन में प्रभुत्व रखने वाले शक्तिशाली शिया गुटों का समर्थन मिलने के बाद 4 अगस्त के सत्र में ये फिर से सामने आया।

ये विधेयक इस्लाम से धार्मिक नियमों को लागू करने का विकल्प करेगा पेश

प्रस्तावित परिवर्तन 1959 के कानून से एक बदलाव को चिह्नित करता है। इराकी राजशाही के पतन के बाद अधिनियमित इस कानून ने धार्मिक हस्तियों से पारिवारिक कानून के अधिकार को राज्य न्यायपालिका में स्थानांतरित कर दिया। नया विधेयक मुख्य रूप से शिया और सुन्नी इस्लाम से धार्मिक नियमों को लागू करने का विकल्प फिर से पेश करेगा, लेकिन इराक की विविध आबादी के भीतर अन्य धार्मिक या सांप्रदायिक समुदायों का उल्लेख नहीं करता है। विधेयक के समर्थकों का दावा है कि इसका उद्देश्य इस्लामी कानून को मानकीकृत करना और युवा लड़कियों को अनैतिक संबंधों से बचाना है। हालांकि, विरोधियों का कहना है कि यह तर्क त्रुटिपूर्ण है और बाल विवाह की कठोर वास्तविकताओं को नजरअंदाज करता है।

एचआरडब्ल्यू के सनबर ने कहा कि धार्मिक अधिकारियों को विवाह का अधिकार देने से यह संशोधन इराकी कानून के तहत समानता के सिद्धांत को कमजोर करेगा। इससे नौ वर्ष की आयु तक की लड़कियों की शादी को वैध बनाया जा सकता है, जिससे असंख्य लड़कियों का भविष्य और कल्याण छीना जा सकता है। उन्होंने कहा कि लड़कियों को खेल के मैदान और स्कूल में होना चाहिए, शादी के जोड़े में नहीं। यह अभी भी स्पष्ट नहीं है कि कानून में परिवर्तन का यह प्रयास सफल होगा या नहीं, क्योंकि इसके पहले कई प्रयास विफल हो चुके हैं।

Shashank Shekhar Mishra
Shashank Shekhar Mishraauthor

शशांक शेखर मिश्रा टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल (www.timesnowhindi.com) में बतौर कॉपी एडिटर काम कर रहे हैं। इन्हें पत्रकारिता में करीब 5 वर्षों का अनुभव है। इन पांच सालों में देश की राजनीति से लेकर देश-दुनिया में बनते-बिगड़ते सत्ता समीकरणों एवं घटनाओं को कवर करने का अनुभव है। राजनीति, रक्षा और आटोमोबाइल्स की खबरों में विशेष रूचि के साथ खोजी पत्रकारिता और स्टिंग ऑपरेशन का भी अनुभव है। टाइम्स नाउ नवभारत में देश-दुनिया की खबरों के साथ रियल टाइम डेस्क पर कार्य करने का अनुभव है। शशांक ने इन 5 वर्षों के पत्रकारिता के कैरियर के दौरान टेलीविजन और डिजिटल मीडिया में कार्य करने का अनुभव हासिल किया है। टाइम्स नाउ नवभारत में बतौर कॉपी एडिटर जुड़ने से पहले जागरण न्यू मीडिया, इनशार्ट्स, जी हिंदुस्तान और न्यूज हेल्पलाइन में सब एडिटर, रिपोर्टर और असिस्टेंट प्रोड्यूसर के तौर पर काम कर चुके हैं। पढ़ाई-लिखाई की बात करें तो लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है। इसके बाद एशियन एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलीविजन से पोस्ट ग्रेजुएशन डिप्लोमा इन मास कम्युनिकेशन एंड टीवी जर्नलिज्म किया हैं। शशांक को जिम जाना, एडवेंचर एक्टिविटी करना और नई तकनीक को जानना और समझना बेहद पसंद है। इसके अलावा शशांक को ड्राइव करना और अध्यात्म में भी काफी रुचि हैं। शशांक शेखर मिश्रा उत्तर प्रदेश की राजधानी और नवाबों के शहर के रूप में फेमस लखनऊ से ताल्लुक रखते हैं।

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