'रूस को भारत से तेल खरीद रोकने को लेकर नहीं मिला कोई मैसेज'; ट्रंप के दावे के बाद क्रैमलिन ने जारी किया बयान
- Edited by: शिव शुक्ला
- Updated Feb 3, 2026, 05:10 PM IST
पेस्कोव ने यह भी दोहराया कि रूस भारत के साथ अपने द्विपक्षीय संबंधों को सभी संभावित क्षेत्रों में आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। रूस के ऊर्जा मंत्रालय ने भी कहा है कि उन्हें भारतीय रिफाइनरों से अनुबंध रद्द करने के संबंध में कोई सूचना नहीं मिली है।
पीएम मोदी और पुतिन।
क्रेमलिन ने दावा किया है कि उसे भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद रोकने को लेकर नई दिल्ली से कोई आधिकारिक सूचना या संदेश प्राप्त नहीं हुआ है। यह बयान ऐसे समय आया है,जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रूसी तेल की खरीद बंद करने और अमेरिका और संभवतः वेनेजुएला से अधिक तेल खरीदने पर सहमत हो गए हैं। क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने कहा कि हमें इस विषय पर भारत की ओर से अब तक कोई बयान या आधिकारिक सूचना नहीं मिली है।
रूसी मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, पेस्कोव ने यह भी दोहराया कि रूस भारत के साथ अपने द्विपक्षीय संबंधों को सभी संभावित क्षेत्रों में आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है। रूस के ऊर्जा मंत्रालय ने भी कहा है कि उन्हें भारतीय रिफाइनरों से अनुबंध रद्द करने के संबंध में कोई सूचना नहीं मिली है।
ट्रंप ने कल किया था ये दावा
बता दें कि इससे एक दिन पहले ही ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक पोस्ट में बड़ा दावा किया था। उन्होंने बताया था कि प्रधानमंत्री मोदी से हुई बातचीत के बाद भारत और अमेरिका एक व्यापार समझौते पर सहमत हुए हैं,जिसके तहत अमेरिका भारत पर लगाए जाने वाले पारस्परिक शुल्क को 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करेगा। साथ ही उन्होंने यह भी कहा था कि भारत रूस से तेल खरीद को भी रोकने पर सहमत हो गया है।
गौरतलब है कि पिछले वर्ष ट्रंप ने भारत पर कुल 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया था, इसमें 25 प्रतिशत रूस से तेल खरीदने के लिए दंड के तौर पर था, जिसे दुनिया के सबसे ऊंचे टैरिफ में गिना गया।
भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का करीब 88 प्रतिशत आयात करता है,जिसे घरेलू रिफाइनरियों में पेट्रोल और डीजल जैसे ईंधनों में बदला जाता है। साल 2021 तक भारत के कुल कच्चे तेल आयात में रूसी तेल की हिस्सेदारी महज 0.2 प्रतिशत थी। लेकिन फिर जब फरवरी 2022 में यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद जब पश्चिमी देशों ने मॉस्को से दूरी बनानी शुरू की,तब रियायती दरों पर बड़ी मात्रा में भारत ने रूसी कच्चा तेल खरीदा।
घटी है रूस से तेल खरीद
रियल-टाइम एनालिटिक्स कंपनी केप्लर के आंकड़ों के अनुसार,जनवरी के पहले तीन हफ्तों में भारत का रूसी कच्चे तेल का आयात घटकर लगभग 11 लाख बैरल प्रतिदिन रह गया,जबकि इससे पिछले महीने यह औसतन 12.1 लाख बैरल प्रतिदिन था। 2025 के मध्य तक यह आयात 20 लाख बैरल प्रतिदिन से अधिक रहने का अनुमान जताया गया था।
ईराक और रूस की तेल आपूर्ति लगभग बराबर
केप्लर के मुताबिक,इराक अब रूस के लगभग बराबर मात्रा में भारत को कच्चे तेल की आपूर्ति कर रहा है। दिसंबर 2025 में इराक से औसतन 9.04 लाख बैरल प्रतिदिन तेल आया था। वहीं, सऊदी अरब से तेल आयात जनवरी में बढ़कर 9.24 लाख बैरल प्रतिदिन हो गया, जो दिसंबर में 7.10 लाख बैरल और अप्रैल 2025 में 5.39 लाख बैरल प्रतिदिन के निचले स्तर पर था।