Japan Flu News: जापान ने राष्ट्रव्यापी इन्फ्लूएंजा महामारी घोषित कर दी है। दरअसल, देश में फ्लू के मामलों में अचानक उछाल देखने को मिला है। ऐसे में शुरुआत में ही मामलों से निपटने के लिए उपाय घोषित किए गए हैं। देश में 4,000 से ज्यादा लोग अस्पतालों में भर्ती हैं और दर्जनों स्कूल बंद हो गए हैं। जापान में फ्लू के मामले नए नहीं है, बस जिस मौसम में ये बढ़ते थे, इस बार उससे बहुत पहले समस्या पैदा कर रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यह प्रकोप सामान्य से पांच हफ्ते पहले ही आ गया है, जो पूरे एशिया में वायरस के फैलने के तरीके में बदलाव का संकेत है।
भारत सहित अन्य देशों के लिए खतरे की घंटी?
देश के स्वास्थ्य मंत्रालय ने नागरिकों से एहतियात के तौर पर जल्द से जल्द वैक्सीनेशन का आग्रह किया है। डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि मामलों में यह शुरुआती वृद्धि अस्पताल व्यवस्था पर दबाव डाल सकती है। हालांकि इसे मौसमी फ्लू का प्रकोप बताया जा रहा है, न कि कोई नई महामारी, लेकिन इसके पैमाने और समय ने भारत सहित अन्य देशों के लिए खतरे की घंटी बजा दी है। ऐसा इसलिए क्योंकि ठंड का मौसम आ रहा है और इसमें सांस लेने की परेशानी बढ़ जाती है।
130 से अधिक स्कूल किए गए बंद
अधिकारियों के अनुसार, जापान के 47 प्रान्तों में से 28 में बढ़ते मामले सामने आए हैं। इनमें खासकर टोक्यो, ओकिनावा और कागोशिमा में अधिक मामले सामने आए, जहां 130 से अधिक स्कूल और चाइल्डकैअर केंद्र अस्थायी रूप से बंद कर दिए गए हैं।
फ्लू के मामलों में वृद्धि का क्या कारण है?
डॉक्टरों के अनुसार, इस साल शुरुआती प्रकोप कई कारणों से और भी बदतर हो गया है। इसमें फ्लू वायरस का एक अलग वर्जन शामिल है, जो पहले से ज्यादा शक्तिशाली बताया जा रहा है। वहीं, बढ़ते मामलों में एक कारण कोविड-19 महामारी के दौरान वर्षों तक कम संपर्क के कारण प्रतिरक्षा में उतार-चढ़ाव भी शामिल है। इसके अलावा, अनियमित मौसम के कारण भी वायरस का संक्रमण बढ़ रहा है।
डॉक्टर इसके लिए फ्लू को लेकर हुए कम टीकाकरण को भी जिम्मेदार ठहराते हैं। महामारी के बाद ज्यादातर लोग लापरवाह हो गए हैं और सालाना फ्लू के टीके लगवाने में समय नहीं दे रहे हैं, जिससे वायरस का प्रसार आसान हो जाता है।
क्या यह बड़ी महामारी बन सकती है?
विशेषज्ञों के अनुसार, फिलहाल ऐसा होने की संभावना नहीं है। चूंकि यह एक मौसमी इन्फ्लूएंजा महामारी है, इसलिए यह मुख्यतः H3N2 नामक स्ट्रेन के कारण होती है, जिसपर स्टडी की जा चुकी है। हालांकि, वैज्ञानिकों का कहना है कि यह निश्चित रूप से एक चेतावनी है। इसलिए निरंतर निगरानी और टीकाकरण बेहद जरूरी और निर्णायक है। डॉक्टर बार-बार बुजुर्ग, बच्चे और पहले से किसी बीमारी से ग्रस्त लोगों को वैक्सीन लगाए जाने की अपील कर रहे हैं।
