म्यूनिख में जयशंकर की कूटनीतिक मैराथन, जर्मनी, फ्रांस, कनाडा के नेताओं से की द्विपक्षीय वार्ता
- Edited by: शिव शुक्ला
- Updated Feb 15, 2026, 12:18 AM IST
म्यूनिख सम्मेलन की शुरुआत जयशंकर ने ‘दिल्ली डिसाइडेड: मैपिंग इंडिया की पॉलिसी कैलकुलस’ विषय पर आयोजित एक गोलमेज चर्चा से की, जिसका आयोजन अनंता एस्पेन सेंटर ने किया था।
एस जयशंकर (फोटो- पीटीआई)
विदेश मंत्री एस.जयशंकर ने म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन के दौरान जर्मनी, कनाडा, फ्रांस और चेक गणराज्य सहित कई देशों के नेताओं से द्विपक्षीय मुलाकात की। इस दौरान उनके बीच क्षेत्रीय तथा वैश्विक मुद्दों पर चर्चा हुई। जयशंकर 13 से 15 फरवरी तक आयोजित हो रहे म्युनिख सिक्योरिटी कांफ्रेंस में हिस्सा ले रहे हैं।
जर्मनी के साथ सार्थक वार्ता
विदेश मंत्री ने अपने जर्मन समकक्ष जोहान वेडफुल के साथ बैठक को “सार्थक” बताया। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों ने विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग की प्रगति का आकलन किया और क्षेत्रीय मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया।चेक गणराज्य और कनाडा से चर्चा
जयशंकर ने चेक गणराज्य के उप प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री पेट्र मैकिंका से मुलाकात कर आर्थिक और रक्षा सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा की। उन्होंने उम्मीद जताई कि निकट भविष्य में उनका भारत में स्वागत किया जाएगा। कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद से मुलाकात के बाद जयशंकर ने कहा कि भारत-कनाडा संबंध स्थिर प्रगति की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
फ्रांस और अन्य यूरोपीय नेताओं से संवाद
उन्होंने फ्रांस और क्रोएशिया के विदेश मंत्रियों क्रमश: ज्यां-नोएल बैरो और गोर्डन ग्रलिक-रैडमैन से भी मुलाकात की। इससे पहले जयशंकर ने G7 देशों के विदेश मंत्रियों से भी मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधार की आवश्यकता पर भारत के समर्थन को दोहराया। उन्होंने ‘यूएन एट 80’ एजेंडा का उल्लेख करते हुए बहुपक्षीय संस्थानों में सार्थक सुधार की जरूरत पर बल दिया।
बहुध्रुवीय विश्व में भारत की भूमिका
म्यूनिख सम्मेलन की शुरुआत जयशंकर ने ‘दिल्ली डिसाइडेड: मैपिंग इंडिया की पॉलिसी कैलकुलस’ विषय पर आयोजित एक गोलमेज चर्चा से की, जिसका आयोजन अनंता एस्पेन सेंटर ने किया था। उन्होंने बहुध्रुवीय वैश्विक व्यवस्था में भारत की “फुर्तीली और गतिशील विदेश नीति” की अहमियत को रेखांकित किया। यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब भारत ने जनवरी में 27 देशों वाले यूरोपीय संघ के साथ मुक्त व्यापार समझौता (FTA) किया है, जिसे वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती आर्थिक और कूटनीतिक सक्रियता के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
