स्पेन के उत्तरी अफ्रीकी एन्क्लेव सेउटा (Ceuta) में हजारों प्रवासियों की घुसपैठ के बाद यूरोप में राजनीतिक उथल-पुथल मच चुकी है। इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने चेतावनी दी है कि यदि स्पेन अवैध प्रवास को रोकने के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाता, तो इटली स्पेन के साथ शेंगेन व्यवस्था (Schengen Agreement) को निलंबित करने पर विचार कर सकता है।
मेलोनी ने कहा कि इटली अपनी सीमाओं की सुरक्षा और नागरिकों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं करेगा। उनके अनुसार, यूरोप की खुली सीमा व्यवस्था तभी प्रभावी रह सकती है, जब सभी सदस्य देश अपनी बाहरी सीमाओं की समान रूप से रक्षा करें।
मेलोनी के प्रतिक्रिया पर स्पेन ने दिया जवाब
वहीं, स्पेन के विदेश मंत्री ने इटली की टिप्पणी पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि संकट से निपटने के लिए यूरोपीय एकजुटता की जरूरत है, न कि राजनीतिक बयानबाजी की। स्पेन का कहना है कि वह मोरक्को के साथ मिलकर सीमा पर स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहा है।
स्पेन में हजारों की तादाद में दाखिल हुए प्रवासी
बता दें कि मोरक्को से हजारों प्रवासी समुद्र और जमीन के रास्ते सेउटा में प्रवेश कर गए। इस घटनाक्रम में कम से कम 9 लोगों की मौत हुई और स्थानीय प्रशासन ने इसे हाल के वर्षों का सबसे बड़ा सीमा संकट बताया। हालात को नियंत्रित करने के लिए स्पेन ने अतिरिक्त पुलिस बल और सेना तैनात की है।
सेउटा प्रशासन ने स्थिति को हाल के वर्षों का सबसे बड़ा सीमा संकट बताया और मैड्रिड से तत्काल अतिरिक्त सुरक्षा बल भेजने की मांग की। इसके बाद स्पेन सरकार ने सेना को सिविल गार्ड की सहायता के लिए तैनात करने का निर्णय लिया। प्रधानमंत्री पेद्रो सांचेज़ और गृह मंत्री के भी हालात का जायजा लेने सीयुटा पहुंचने की जानकारी सामने आई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सेउटा संकट ने एक बार फिर यूरोपीय संघ की खुली सीमा नीति, अवैध प्रवासन और सीमा सुरक्षा को लेकर बहस तेज कर दी है। यदि इटली और स्पेन के बीच मतभेद बढ़ते हैं, तो इसका असर पूरे शेंगेन क्षेत्र और यूरोपीय संघ की प्रवासन नीति पर पड़ सकता है।
