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गाजा पर कैसे और किसका होगा शासन? नेतन्याहू से उनके मंत्री ही पूछ रहे सवाल, जंग के बीच सरकार पर भी संकट

Israel Hamas War: इजराइल के तीन सदस्यीय युद्ध कैबिनेट के सदस्य बेनी गैंट्ज ने गाजा में युद्ध के लिए नयी योजना नहीं अपनाने पर सरकार से इस्तीफा देने की धमकी दी है। उन्होंने कहा कि अगर युद्ध पर नयी योजना नहीं अपनायी गई तो वह आठ जून को पद से इस्तीफा दे देंगे।

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इजराइली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू

Photo : Twitter

Israel Hamas War: हमास के खिलाफ युद्ध लड़ रहे इजराइली प्रधानमंत्री दो मोर्चों पर घिर गए हैं। एक तरफ राफा में ऑपरेशन छेड़ने के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उनकी आलोचना हो रही है तो वहीं गाजा को लेकर उनकी ही सरकार के मंत्री नेतन्याहू से बिफर गए हैं। यहां तक की सरकार के कैबिनेट मंत्री ने अल्टीमेटम जारी कर समर्थन वापस लेने की धमकी तक दे डाली है। ऐसे में इजराइल में नेतन्याहू की सरकार पर संकट के बादल घिर आए हैं।

जानकारी के मुताबिक, इजराइल के तीन सदस्यीय युद्ध कैबिनेट के सदस्य बेनी गैंट्ज ने गाजा में युद्ध के लिए नयी योजना नहीं अपनाने पर सरकार से इस्तीफा देने की धमकी दी है। उन्होंने कहा कि अगर युद्ध पर नयी योजना नहीं अपनायी गई तो वह आठ जून को पद से इस्तीफा दे देंगे। शनिवार को की गई उनकी घोषणा से सात महीने से अधिक समय से गाजा में युद्ध लड़ रहे इजराइल के नेतृत्व में विभाजन के संकेत मिलते हैं, जिसे हमास को खत्म करने और सात अक्टूबर के हमले में अपहृत कई बंधकों को रिहा कराने के अपने घोषित लक्ष्यों को पूरा करना बाकी है।

क्या है नाराजगी की वजह

बेनी गैंट्ज का कहना है कि नेतन्याहू ने गाजा के बाद राफा में जंग तो शुरू कर दी है, लेकिन युद्ध खत्म होने के बाद हमास केा बढ़ने से रोकने के लिए उनके पास कोई प्लान नहीं है। गैंट्स का कहना है कि गाजा पर जीत के बाद वहां शासन किस तरह का होगा ओर कौन राज करेगा, इसपर स्थिति साफ नहीं है। अगर नेतन्याहू इस पर कोई प्यान तैयार नहीं करते हैं तो वह इस गठबंधन वाली सरकार से अपने कदम वापस ले लेंगे। उन्होंने कहा, एक तरफ इजराइली सैनिक हमास के खिलाफ बहादुरी दिखा रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ जिन लोगों ने उन्हें युद्ध में भेजा, वे कायरता दिखा रहे हैं और अपनी जिम्मेदारी से भाग रहे हैं।

गाजा में एक और इजराइली बंधक का मिला शव

उधर, इजरायली सेना ने कहा है कि गाजा पट्टी से एक और इजरायली बंधक का शव बरामद किया गया है। 24 घंटे के भीतर ये चौथा शव है। सेना के प्रवक्ता अविचाई एड्राई ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया, "सेना और शिन बेट सुरक्षा एजेंसी के संयुक्त विशेष अभियान में रॉन बेंजामिन का शव बरामद किया गया। एक बयान में, एड्राई ने कहा कि सेना की जानकारी से संकेत मिलता है कि रॉन बेंजामिन पिछले साल 7 अक्टूबर को हमास के हमले के दौरान मारे गए थे और उनके शव को हमास के आतंकवादी गाजा ले गए थे। उन्होंने कहा कि बेंजामिन का शव तीन अन्य लोगों के शवों के साथ शुक्रवार को बरामद किया गया, जिनकी पहचान शनि लौक, अमित बुस्किला और इत्ज़िक गेलेंटर के रूप में की गई।जरायल का अनुमान है कि गाजा में अभी भी कम से कम 129 इजरायली बंधक हैं, जिनमें से कुछ हमास के अनुसार मर चुके हैं।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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