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युद्धविराम के बावजूद इजरायल ने लेबनान पर किए हवाई हमले, लड़ाकू विमानों ने की बमबारी

Israel Hamas War: क्या इजरायल का कहर फिर से फिलिस्तीनियों पर टूटने वाला है? ये सवाल इसलिए उठ रहे हैं, क्योंकि युद्धविराम के बावजूद इजराइल ने लेबनान पर हवाई हमले किए। जानकारी के अनुसार इजरायली लड़ाकू विमानों ने दक्षिणी लेबनान के सैदा जिले में भी बमबारी की। आपको जरूरी बातें बताते हैं।

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इजरायल ने युद्धविराम के बावजूद लेबनान पर हवाई हमले किए।

Israel launches Airstrikes on Lebanon: इजरायल ने रविवार को दक्षिणी लेबनान में हवाई हमले किए। सशस्त्र लेबनानी समूह हिजबुल्लाह के साथ महीनों के संघर्ष को समाप्त करने वाला युद्धविराम लागू होने पर भी यहूदी राष्ट्र ने यह कार्रवाई की है।

इजरायली लड़ाकू विमानों ने की एयर स्ट्राइक

लेबनान की सरकारी राष्ट्रीय समाचार एजेंसी एनएनए के अनुसार, स्थानीय समयानुसार सुबह करीब 9:00 बजे, इजरायली लड़ाकू विमानों ने नबातियेह प्रांत के एक गांव अंसार के बाहरी इलाके में हमला किया, कलेलेह और अल-समाइया कस्बों के बीच के क्षेत्र पर दो हवाई हमले किए गए, साथ ही तायर जिले के मारूब गांव के पास की घाटी पर भी एयर स्ट्राइक की गई।

एनएनए के अनुसार, इजरायली लड़ाकू विमानों ने दक्षिणी लेबनान के सैदा जिले में भी बमबारी की।

हिजबुल्लाह और इजरायल के बीच खत्म हुई लड़ाई

समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, इजरायल और लेबनान के बीच युद्ध विराम समझौता 27 नवंबर, 2024 से प्रभावी है। इसके चलते हिजबुल्लाह और इजरायल के बीच एक साल से अधिक समय से चली आ रही लड़ाई समाप्त हो गई है। यह लड़ाई गाजा में युद्ध छिड़ने के बाद और बढ़ गई थी।

लेबनानी ग्रुप ने सहयोगी हमास के समर्थन में हमले शुरू किए था। हमास के 7 अक्टूबर, 2023 के हमले के बाद इजरायल ने गाजा पट्टी पर हमला बोल दिया था।

60 दिनों के भीतर लेबनानी क्षेत्र से हट जाएगा इजरायल

समझौते में यह तय किया गया कि इजरायल 60 दिनों के भीतर लेबनानी क्षेत्र से हट जाएगा, जबकि लेबनान की सेना को लेबनानी-इजरायल सीमा और दक्षिणी क्षेत्र में तैनात किया जाएगा, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि लिटानी नदी के दक्षिण में कोई हथियार या आतंकवादी न रहें।

समझौते में लेबनानी क्षेत्र से इजरायली सेना की वापसी की बात कही गई थी। हालांकि इजरायल ने 18 फरवरी की समय-सीमा के बाद भी लेबनानी सीमा पर पांच प्रमुख स्थानों पर अपनी उपस्थिति बनाए रखी है। युद्धविराम के बावजूद, इजरायली सेना ने लेबनान में कभी-कभार हमले करना जारी रखा है। उसका दावा है कि हिजबुल्लाह द्वारा उत्पन्न 'खतरों' को खत्म करना, इन हमलों का मकसद है।

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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