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'लेबनान में दाखिल हुई इजरायली सेना', कौन हैं रॉन अराद; जिसके लिए IDF के सैनिकों ने लगा दी जान की बाजी?

इजरायल की विशेष कमांडो यूनिट ने पूर्वी लेबनाना में 1986 से लापता इजरायली नेविगेटर रॉन अराद की तलाश में गुप्त अभियान चलाया। नबी चित इलाके में हुए इस ऑपरेशन के दौरान हिजबुल्लाह लड़ाकों और स्थानीय लोगों से झड़प हुई, जिसमें कम से कम 41 लोगों की मौत और कई लोग घायल हो गए। हालांकि इजरायली सेना को अरद के बारे में कोई सबूत नहीं मिला और कमांडो टीम सुरक्षित लौट गई।

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इजरायल की एक विशेष कमांडो यूनिट ने पूर्वी लेबनाना में रात के समय एक गुप्त अभियान चलाया। AP

Photo : AP

Israel-Iran War: इजरायल-ईरान युद्ध के बीच इजरायल रक्षा बल ने लेबनान में एक बड़ी सैन्य कार्रवाई की। आईडीएफ ने पूर्वी लेबनान में एक एक गुप्त अभियान चलाया। इस ऑपरेशन का मकसद करीब 40 साल से लापता इजरायल के एयरमैन रॉन अराद का पता लगाना था। हालांकि, इजरायली सेना ने शनिवार को कहा कि अभियान के दौरान अरद के अवशेष या उनसे जुड़ा कोई सबूत नहीं मिले।

लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक इस ऑपरेशन के दौरान कम से कम 41 लोग मारे गए और करीब 40 घायल हो गए। बताया गया कि यह कार्रवाई पूर्वी लेबनान के नबी चित इलाके में हुई, जहां इजरायली कमांडो और हिजबुल्लाह (Hezbollah) लड़ाकों के बीच झड़प हुई। लेबनानी सेना ने कहा कि मुठभेड़ में उसके तीन सैनिक भी मारे गए।

रिपोर्ट्स के अनुसार इजरायली कमांडो हेलीकॉप्टरों के जरिए सीमा पार कर पहाड़ी इलाके में उतरे और फिर नबी चित शहर की ओर बढ़े। स्थानीय लोगों का कहना है कि कमांडो यूनिट ने एक कब्रिस्तान में जाकर एक कब्र भी खोदी, लेकिन बाद में वहां से वापस लौट गई। इजरायली सेना के अरबी प्रवक्ता अविचाय अदरई ने कहा कि ऑपरेशन में इजरायली बलों को कोई नुकसान नहीं हुआ।

1986 से लापता हैं रॉन अरद

रॉन अराद में उस समय लापता हो गए थे जब उनका फाइटर जेट लेबनान में क्रैश हो गया था। वह पैराशूट के जरिए नीचे उतरे थे, लेकिन उन्हें लेबनान के शिया मुस्लिम आतंकी संगठन अमाल ने पकड़ लिया था। बाद में शिया समूह “Believers' Resistance” ने उनकी कुछ तस्वीरें जारी की थीं, लेकिन इसके बाद उनका कोई पता नहीं चल सका। बताया जाता है कि अरद को कुछ समय तक नबी चित इलाके में रखा गया था। 1988 में दक्षिण लेबनान के मेइदून गांव में हुई लड़ाई के बाद उनका पता पूरी तरह से गायब हो गया।

पहले भी हो चुके हैं ऐसे अभियान

इजरायल ने अरद का पता लगाने के लिए पहले भी कई अभियान चलाए हैं। 1994 में इजरायली कमांडो ने लेबनान में छापा मारकर “Believers' Resistance” के नेता मुस्तफा दिरानी को पकड़ लिया था और उन्हें इजरायल ले गए थे। बाद में 2004 में कैदियों की अदला-बदली के दौरान उन्हें रिहा कर दिया गया। वहीं, एक बार 200 लेबनानी और 450 फिलीस्तीन कैदियों के बदले रॉन को छोड़ने की पेशकश की गई थी, लेकिन, इजरायल ने ऐसा करने से साफ मना कर दिया था। साल 1988 में रॉन को लेकर आखिरी बार खबरें सामने आई थीं।

लेबनान में बढ़ा तनाव

युद्ध के बीच इजरायली सेना ने इसी दौरान लेबनान के कई इलाकों में हवाई हमले भी किए। दक्षिण लेबनान के जावतार अल-शरकिया, अरब सलीम और जिबशीत गांवों में हुए हमलों में कई लोगों की मौत हुई। माना जा रहा है कि ये हमले उस बढ़ते तनाव का हिस्सा हैं जो हाल ही में ईरान-इजरायल संघर्ष के बाद पूरे मध्य-पूर्व में फैल गया है। हिजबुल्लाह ने इजरायल पर रॉकेट और ड्रोन हमले किए थे, जिसके जवाब में इजरायल लगातार सैन्य कार्रवाई कर रहा है।
Piyush Kumar
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पीयूष कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल के न्यूज डेस्क पर Senior Copy Editor के रूप में कार्यरत हैं। देश-दुनिया की हलचल पर उनकी पैनी नजर रहती है और इन घट... और देखें

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