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वैशाली नाव हादसा : बच्चों की मौत पर सरकार पर भड़के तेजस्वी, बोले-किसने रुकवाया रिंग बांध निर्माण? बड़ी डिमांड संग दे दिया अल्टीमेटम

बिहार के वैशाली जिले के राघोपुर में नाव हादसे में जान गंवाने वाले बच्चों के परिजनों से मिलने पहुंचे तेजस्वी यादव भावुक हो गए। तेजस्वी यादव ने हादसे के बाद राहत और बचाव कार्य में कथित देरी तथा अस्पताल में चिकित्सा सुविधाओं की कमी पर सवाल उठाए।

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वैशाली नाव हादसे के पीड़ितों से मिले तेजस्वी यादव (फोटो-@yadavtejashwi)

बिहार के वैशाली जिले में मंगलवार देर शाम 20 से अधिक लोगों को ले जा रही एक नाव के पलट जाने से कम से कम 14 व्यक्तियों की डूबकर मौत हो गई। मृतकों में अधिकांश बच्चे शामिल थे। राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और राघोपुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक तेजस्वी यादव ने दावा किया कि नाव पर करीब 30 लोग सवार थे और हादसे में 14 लोगों की मौत की पुष्टि हुई है।

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता यादव ने दिल्ली से जारी एक वीडियो बयान कर हादसे पर शोक जताया था। बुधवार को दिल्ली से वापस पहुंचने पर तेजस्वी पीड़ित परिजनों से मिले। मुलाकात के बाद उन्होंने राज्य सरकार और जिला प्रशासन पर निशाना साधते हुए पूरे मामले की न्यायिक जांच कराने, जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और पीड़ित परिवारों को अतिरिक्त सहायता देने की मांग की।

तेजस्वी यादव ने कहा कि जिन परिवारों ने अपने बच्चों को खोया है, उनके दुख को शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। यह समय राजनीति करने का नहीं, बल्कि पीड़ित परिवारों के साथ खड़े होने और उन्हें हिम्मत देने का है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन की ओर से कार्रवाई के नाम पर केवल खानापूर्ति की जा रही है। उनके मुताबिक, हादसे की जिम्मेदारी तय करने के लिए निष्पक्ष जांच जरूरी है।

अस्पताल की सुविधाओं और बचाव कार्य पर उठाए सवाल

तेजस्वी यादव ने हादसे के बाद राहत और बचाव कार्य में कथित देरी तथा अस्पताल में चिकित्सा सुविधाओं की कमी पर सवाल उठाए। उन्होंने पीड़ित परिवारों और स्थानीय ग्रामीणों से बातचीत का हवाला देते हुए कहा कि अस्पताल में ऑक्सीजन, पर्याप्त डॉक्टरों और दवाओं की कमी थी। उन्होंने दावा किया कि स्थानीय लोगों के अनुसार, पर्याप्त चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध होतीं तो कुछ और बच्चों की जान बचाई जा सकती थी।

उन्होंने एंबुलेंस में ऑक्सीजन नहीं होने और राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) तथा राज्य आपदा मोचन बल (SDRF) की टीमों के देर से पहुंचने के आरोपों की भी जांच कराने की मांग की। तेजस्वी ने कहा कि यह स्पष्ट होना चाहिए कि हादसे के बाद राहत और बचाव कार्य में कहां चूक हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है।

पीड़ित परिवारों को तीन डिसमिल जमीन देने की मांग

तेजस्वी यादव ने कहा कि पीड़ित परिवारों को सरकार की ओर से मिलने वाली चार लाख रुपये की अनुग्रह राशि के अतिरिक्त आर्थिक सहायता भी दी जानी चाहिए। उन्होंने कम से कम तीन डिसमिल जमीन देने की मांग करते हुए कहा कि कुछ परिवारों ने एक साथ कई बच्चों को खोया है। उनके मुताबिक, एक परिवार के सात और दूसरे परिवार के छह बच्चों की मौत हुई है। उन्होंने कहा कि ऐसे परिवारों की मुश्किलें केवल आर्थिक मुआवजे से दूर नहीं होंगी। सरकार को उनके पुनर्वास और भविष्य की सुरक्षा के लिए भी ठोस कदम उठाने चाहिए।

रिंग बांध निर्माण का मुद्दा उठाया

तेजस्वी यादव ने राघोपुर में गंगा नदी के कटाव की समस्या का स्थायी समाधान करने के लिए रिंग बांध बनाने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके कार्यकाल में इस परियोजना की प्रक्रिया शुरू की गई थी और जमीन की नापी भी हुई थी, लेकिन सरकार बदलने के बाद काम रुक गया।

तेजस्वी ने आरोप लगाया कि उस समय विजय सिन्हा ने परियोजना का काम रुकवा दिया था। उन्होंने सरकार से रिंग बांध निर्माण की दिशा में गंभीरता से काम करने की मांग की। साथ ही कहा कि चुनाव के दौरान बड़े पैमाने पर खर्च किया जाता है, लेकिन जनता की बुनियादी समस्याओं के स्थायी समाधान पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

विधानसभा में उठाएंगे पीड़ित परिवारों का मुद्दा

तेजस्वी यादव ने कहा कि स्थानीय थानेदार और अंचल अधिकारी से स्पष्टीकरण मांगने जैसी कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। हादसे की न्यायिक जांच होनी चाहिए और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए। उन्होंने भरोसा दिलाया कि पीड़ित परिवारों की मांगों को विधानसभा में मजबूती से उठाया जाएगा।

Pushpendra kumar
पुष्पेंद्र कुमारauthor

पुष्पेंद्र कुमार टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में चीफ कॉपी एडिटर के रूप में सिटी डेस्क पर कार्यरत हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स डिग्री हासिल करने के बाद से वे पिछले 7 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता में जुड़े हैं। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक खबरें लिखी हैं। पुष्पेंद्र हाइपर-लोकल मुद्दों, रेलवे, रोड, इंफ्रास्ट्रक्चर, डेवलपमेंट, कृषि और मौसम से जुड़ी खबरों पर गहरी पकड़ रखते हैं। शहर से लेकर गांव-देहात तक की संवेदनशीलताओं को समझते हुए वे लोकल खबरों को ऐसा रूप देते हैं जो न केवल तथ्यपूर्ण होता है, बल्कि पाठकों से भावनात्मक रूप से भी जुड़ता है।

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