लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और विपक्षी गठबंधन इंडी गठबंधन के नेताओं की ओर से चुनाव आयोग के खिलाफ दायर याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में आज, 15 अक्टूबर को सुनवाई होने की संभावना है। यह याचिका मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया और चुनाव आयोग के फैसलों को चुनौती देते हुए दायर की गई है।
सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट पर मामले की संभावित सुनवाई की तारीख 15 अक्टूबर दिखाई गई है। याचिका 12 अक्टूबर को दायर की गई थी और 13 अक्टूबर को पंजीकृत हुई। इसे रिट पिटीशन सिविल नंबर 1351/2026 के रूप में दर्ज किया गया है। याचिका में चुनाव आयोग की ओर से SIR की प्रक्रिया अपनाने, मतदाता सूची से नाम हटाने और आयोग के भीतर फैसले लेने के तरीके पर सवाल उठाए गए हैं।
राहुल गांधी समेत विपक्ष के कई नेता याचिका में शामिल
इस याचिका पर राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के अलावा समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, आरजेडी नेता तेजस्वी यादव, शिवसेना (यूबीटी) के संजय राउत, एनसीपी (शरदचंद्र पवार) की सुप्रिया सुले और अन्य विपक्षी नेताओं ने हस्ताक्षर किए हैं। इसमें तृणमूल कांग्रेस के सांसद सौगत रॉय, सीपीआई नेता डी राजा और सीपीआई (एम) के एमए बेबी समेत विपक्ष के दूसरे नेता भी शामिल हैं।
याचिका में भारत निर्वाचन आयोग (ECI), मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी को पक्षकार बनाया गया है। विपक्षी नेताओं ने अदालत से चुनाव आयोग के फैसलों की न्यायिक समीक्षा करने और मतदाता सूची में किए जा रहे बदलावों को लेकर पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की है।
एसआईआर प्रक्रिया पर अंतरिम रोक लगाने की मांग
याचिका में विपक्ष की प्रमुख मांग है कि देशभर में चल रही SIR प्रक्रिया पर अंतिम फैसला आने तक अंतरिम रोक लगाई जाए। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इस दौरान किसी भी पात्र मतदाता का नाम मतदाता सूची से हटने से बचाने के लिए जरूरी कदम उठाए जाने चाहिए।
विपक्षी नेताओं ने यह भी मांग की है कि SIR से संबंधित चुनाव आयोग के सभी दस्तावेज अदालत के सामने पेश किए जाएं। इनमें 24 जून 2025 से शुरू हुई प्रक्रिया से जुड़े रिकॉर्ड, बैठकों के मिनट्स, आंतरिक नोटिंग्स और ECINET तथा ERONET सिस्टम के लॉग्स शामिल हैं। याचिका के जरिए आयोग के फैसलों की प्रक्रिया और उनके आधार की जांच कराने की मांग की गई है।
स्वतंत्र समिति से ऑडिट कराने का अनुरोध
याचिका में सुप्रीम कोर्ट के एक सेवानिवृत्त न्यायाधीश की अध्यक्षता में स्वतंत्र समिति गठित करने का भी अनुरोध किया गया है। इस समिति में तकनीकी विशेषज्ञों को शामिल करने की मांग की गई है। प्रस्तावित समिति मतदाता सूची से हटाए गए नामों और उनसे जुड़े रिकॉर्ड का निष्पक्ष ऑडिट कर सकती है। याचिका में EVM से संबंधित तकनीक और प्रक्रियाओं की समीक्षा की मांग भी रखी गई है।
विपक्षी नेताओं ने यह भी कहा है कि SIR के दौरान हटाए गए नामों और नाम हटाने के कारणों की बूथवार सूची सार्वजनिक की जाए। उनकी मांग है कि किसी मतदाता का नाम हटाने से पहले उसे नोटिस देने और अपना पक्ष रखने का अवसर सुनिश्चित किया जाए।
फॉर्म-6 और अधिकारियों की जवाबदेही का मुद्दा भी उठाया
याचिका में ऑनलाइन फॉर्म-6 को निर्धारित नियमों के अनुरूप रखने की मांग की गई है। यह फॉर्म मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के आवेदन से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं ने अनुरोध किया है कि फॉर्म में ऐसे बदलाव न किए जाएं, जो निर्धारित नियमों के अनुरूप न हों। इसके अलावा, याचिका में चुनावी प्रक्रिया से जुड़े संवैधानिक और कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन पाए जाने पर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की गई है।
