दुनिया

तोशाखाना मामले में इमरान खान को बड़ी राहत: इस्लामाबाद कोर्ट ने खारिज किया केस, निचली अदालत ने ठहराया था दोषी

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Jul 4, 2023, 12:31 PM IST

Toshakhana case: तोशाखाना मामले में भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना कर रहे इमरान खान के खिलाफ मामले को मंगलवार को इस्लामाबाद कोर्ट ने अस्वीकार्य करार दिया है।

Image

Imran-Khan

Toshakhana case: पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को तोशाखाना केस में बड़ी राहत मिली है। भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना कर रहे इमरान खान के खिलाफ मामले को मंगलवार को इस्लामाबाद कोर्ट ने अस्वीकार्य करार दिया है। बता दें, इससे पहले कोर्ट ने इस मामले में फैसला सुरक्षित रखा था। हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस आमिर फारुक ने यह फैसला सुनाया है।

खास बात यह है कि मामले की सुनवाई से पहले खुद इमरान खान ने ही चीफ जस्टिस को केस से हटाने की मांग की थी। बता दें, इस मामले में निचली अदालत ने इमरान खान को दोषी करार दिया था। चुनाव आयोग ने तोशाखाना के से जुड़ी आपराधिक कार्रवाही को जिला न्यायालय भेजा था। इसके बाद इमरान खान की याचिका दायर कर हाईकोर्ट में सुनवाई की मांग की थी।

क्या है मामला?

इमरान खान पर आरोप है कि उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान विभिन्न देशों से मिले तोहफों को कम कीमत पर बेच दिया था। इसके खिलाफ इमरान खान ने कहा था कि उन्होंने तोशाखाने के सभी तोहफों को 2.15 करोड़ रुपये में खरीदा था और उन्होंने इसे 5.8 करोड़ रुपये में बेच दिया। हालांकि, बाद में सामने आया कि इन तोहफों के लिए इमरान खान को 20 करोड़ रुपये से ज्यादा मिले थे। बता दें, पाकिस्तान में तोशाखाना 1974 में स्थापित किया गया था। इसमें सरकार के प्रमुखों को मिले तोहफों को संग्रहित किया जाता है। कोई भी राष्ट्रपति या प्रधानमंत्री अपने कार्यकाल में मिली चीजों को अपने साथ नहीं ले जा सकता है।

नैब ने भी किया था तलब

बता दें नैब ने भी तोशाखाना मामले की जांच के सिलसिले में इमरान खान को तलब किया था। एआरवाई न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के अध्यक्ष को सभी उपहारों का रिकॉर्ड लाने के लिए कहा गया था। नैब के नोटिस के मुताबिक, इमरान खान को तोशाखाना से 108 तोहफे मिले हैं। वहीं नैब ने एक मामले में बुशरा बीबी को भी तलब किया है।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

और पढ़ें
End of Article