Iran Vs Israel: इजराइल पर बीती रात हुए अब तक के सबसे भयानक मिसाइल हमले ने मिडिल ईस्ट में जंग की आहट सुनाई देने लगी है। ईरान ने इजराइल पर करीब 180 मिसाइलें दागीं। ईरान का दावा है कि उसकी 90 फीसदी मिसाइलें सटीक निशाने पर लगीं, लेकिन इजराइल ने इसे नकार दिया। इजराइली पीएम ने कहा है कि उसके एयर डिफेंस सिस्टम ने ज्यादातर मिसाइलों को हवा में ही खत्म कर दिया। इजराइल की मदद अमेरिका ने की।
अमेरिका की ओर से कहा गया कि उसके फाइटर जेट्स ने मिसाइलों को इजराइल में गिरने से रोका, अब ऐसा ही दावा ब्रिटेन की ओर से भी किया गया है। ब्रिटेन ने कहा है कि इजराइल पर ईरानी हमले को रोकन के लिए उसने भी मदद की। इन दावों से यह तो साफ है कि इजराइल के साथ अमेरिका और ब्रिटेन जैसे ताकतवर देश खड़े हैं। हालांकि, ईरान भी किसी मामले में पीछे नहीं है, उसके साथ भी शक्तिशाली देशों का समर्थन है।
इजराइल के साथ कौन से देश?
पश्चिम एशिया में इजराइल मुश्लिम देशों से घिरा हुआ है। इसलिए उसे इसके अंदर समर्थन मिलना काफी मुश्किल है। हालांकि, इजराइल के समर्थन में कई यूरोपीय देश हैं, जिसमें अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, ऑस्ट्रिया भी हैं। इन देशों की मिलिट्री पॉवर का कोई सानी नहीं है। ऐसे में अगर ये देश जंग के समय इजराइल की मदद करने के लिए आगे आते हैं तो ईरान का टिकना काफी मुश्किल होगा।
ईरान को मिलेगा किसका साथ?
इजराइल जैसे तकनीक में उन्नत देश पर हमला ईरान ने यूं ही नहीं कर दिया। उसे कई मुस्लिम देशों का समर्थन मिला हुआ है। इसमें फिलिस्तीन, तुर्की, लेबनान, सीरिया, कतर, ओमान जैसे देश शामिल हैं। ये देश सीधे तौर पर इजराइल को धमकी भी दे चुके हैं। वहीं सबसे बड़ी बात यह है कि रूस और चीन जैसे वर्ल्ड पॉवर का भी ईरान को मौन और रणनीतिक समर्थन प्राप्त है।
कितने भयानक होंगे परिणाम?
मिडिल ईस्ट बीते एक साथ से जंग का मैदान बना हुआ है। पहले इजराइल पर हमास ने हमला किया, जिसके बाद गाजा में एक जंग शुरू हो गई। यह जंग बढ़ते-बढ़ते लेबनान और ईरान तक पहुंच चुकी है। वहीं, अमेरिका भी अब इजराइल के समर्थन में खुलकर आ गया है। ऐसे में यहां व्यापक युद्ध छिड़ने की आशंकाओं ने जन्म ले लिया है। कुछ विशेषज्ञ इसे तृतीय विश्व युद्ध का नाम भी देते रहे हैं।
