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Iran Vs Israel: इजराइल और ईरान के समर्थन में कौन-कौन से देश? जंग हुई तो कितने भयानक होंगे परिणाम

Iran Vs Israel: इजराइल पर ईरान के मिसाइल हमलों को रोकने के लिए अमेरिका और ब्रिटेन जैसे देश साथ आए। दोनों देशों की एयरफोर्स ने इन हमलों को रोकने के लिए इजराइली एयर डिफेंस सिस्टम का साथ दिया। हालांकि, ईरान भी किसी मामले में पीछे नहीं है, उसके पास मिसाइलों का जखीरा होने के बाद कई देशों का समर्थन हासिल है।

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Iran Israel Conflict

Photo : iStock

Iran Vs Israel: इजराइल पर बीती रात हुए अब तक के सबसे भयानक मिसाइल हमले ने मिडिल ईस्ट में जंग की आहट सुनाई देने लगी है। ईरान ने इजराइल पर करीब 180 मिसाइलें दागीं। ईरान का दावा है कि उसकी 90 फीसदी मिसाइलें सटीक निशाने पर लगीं, लेकिन इजराइल ने इसे नकार दिया। इजराइली पीएम ने कहा है कि उसके एयर डिफेंस सिस्टम ने ज्यादातर मिसाइलों को हवा में ही खत्म कर दिया। इजराइल की मदद अमेरिका ने की।

अमेरिका की ओर से कहा गया कि उसके फाइटर जेट्स ने मिसाइलों को इजराइल में गिरने से रोका, अब ऐसा ही दावा ब्रिटेन की ओर से भी किया गया है। ब्रिटेन ने कहा है कि इजराइल पर ईरानी हमले को रोकन के लिए उसने भी मदद की। इन दावों से यह तो साफ है कि इजराइल के साथ अमेरिका और ब्रिटेन जैसे ताकतवर देश खड़े हैं। हालांकि, ईरान भी किसी मामले में पीछे नहीं है, उसके साथ भी शक्तिशाली देशों का समर्थन है।

इजराइल के साथ कौन से देश?

पश्चिम एशिया में इजराइल मुश्लिम देशों से घिरा हुआ है। इसलिए उसे इसके अंदर समर्थन मिलना काफी मुश्किल है। हालांकि, इजराइल के समर्थन में कई यूरोपीय देश हैं, जिसमें अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, ऑस्ट्रिया भी हैं। इन देशों की मिलिट्री पॉवर का कोई सानी नहीं है। ऐसे में अगर ये देश जंग के समय इजराइल की मदद करने के लिए आगे आते हैं तो ईरान का टिकना काफी मुश्किल होगा।

ईरान को मिलेगा किसका साथ?

इजराइल जैसे तकनीक में उन्नत देश पर हमला ईरान ने यूं ही नहीं कर दिया। उसे कई मुस्लिम देशों का समर्थन मिला हुआ है। इसमें फिलिस्तीन, तुर्की, लेबनान, सीरिया, कतर, ओमान जैसे देश शामिल हैं। ये देश सीधे तौर पर इजराइल को धमकी भी दे चुके हैं। वहीं सबसे बड़ी बात यह है कि रूस और चीन जैसे वर्ल्ड पॉवर का भी ईरान को मौन और रणनीतिक समर्थन प्राप्त है।

कितने भयानक होंगे परिणाम?

मिडिल ईस्ट बीते एक साथ से जंग का मैदान बना हुआ है। पहले इजराइल पर हमास ने हमला किया, जिसके बाद गाजा में एक जंग शुरू हो गई। यह जंग बढ़ते-बढ़ते लेबनान और ईरान तक पहुंच चुकी है। वहीं, अमेरिका भी अब इजराइल के समर्थन में खुलकर आ गया है। ऐसे में यहां व्यापक युद्ध छिड़ने की आशंकाओं ने जन्म ले लिया है। कुछ विशेषज्ञ इसे तृतीय विश्व युद्ध का नाम भी देते रहे हैं।

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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