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Iran President Helicopter Crash: अब तक नहीं मिला ईरान के राष्ट्रपति का कोई सुराग, खराब मौसम के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन चलाने में आ रहीं दिक्कतें

Iran President Helicopter Crash: ​ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी को लेकर जा रहा हेलिकॉप्टर रविवार को अजरबैजान में हादसे का शिकार हो गया। रईसी के साथ ईरान के विदेश मंत्री हुसैन अमीराब्दुल्लाहियन, ईरान के पूर्वी अजरबैजान प्रांत के गवर्नर और अन्य अधिकारी तथा अंगरक्षक भी यात्रा कर रहे थे। यह घटना ऐसे समय में हुई है जब रईसी और सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के नेतृत्व में ईरान ने पिछले महीने इजराइल पर एक जबरदस्त ड्रोन और मिसाइल हमला किया था।

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ईरान के राष्ट्रपति का हेलिकॉप्टर क्रैश

Photo : Twitter

Iran President Helicopter Crash: ईरान के राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी को लेकर जा रहा हेलिकॉप्टर रविवार को अजरबैजान में हादसे का शिकार हो गया। इस हेलिकॉटर में ईरान के विदेश मंत्री और अन्य अधिकारी भी सवार थे। बताया जा रहा है कि राष्ट्रपति रईसी के काफिले में तीन हेलिकॉपटर शामिल थे, जिसमें तो दो सुरक्षित वापस लौट आए हैं, लेकिन 17 घंटे बाद भी राष्ट्रपति के हेलिकॉप्टर को कुछ पता नहीं चल पाया है। इसके बाद बड़े पैमाने पर रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया है और लोगों से प्रार्थना करने की अपील की गई है। हेलिकॉप्टर का पता लगाने के लिए 40 रेस्क्यू टीमें तैनात की गई हैं, जो घटनास्थल पर पहुंच चुकी हैं।

यह घटना ऐसे समय में हुई है जब रईसी और सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के नेतृत्व में ईरान ने पिछले महीने इजराइल पर एक जबरदस्त ड्रोन और मिसाइल हमला किया था। इसके अलावा ईरान का यूरेनियम संवर्धन भी हथियार बनाने के लिए आवश्यक स्तर के करीब पहुंच गया है। सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए की खबर के अनुसार, रईसी के साथ ईरान के विदेश मंत्री हुसैन अमीराब्दुल्लाहियन, ईरान के पूर्वी अजरबैजान प्रांत के गवर्नर और अन्य अधिकारी तथा अंगरक्षक भी यात्रा कर रहे थे।

खराब मौसम के कारण ऑपरेशन में आ रही दिक्कतें

बताया जा रहा है कि ईरान के सशस्त्र बलों के चीफ ऑफ स्टाफ ने सर्च ऑपरेशन में पूरी ताकत झोंकने के निर्देश दिए हैं। इसके बावजूद खराब मौसम के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन चलाने में बहुत दिक्कत आ रही है। बताया जा रहा है कि हादसा ऐसी जगह पर हुआ है, जहां पर हेलिकॉप्टर नहीं पहुंच पा रहे हैं। सिर्फ जमीनी टीमे ही वहां तक पहुंच पाई हैं। इस बीच तुर्की ने भी नाइट विजन हेलिकॉप्टर को ईरान भेजा है। ईरान के गृहमंत्री अहमद वाहिदी ने सरकारी टीवी पर कहा, राष्ट्रपति और उनके सह यात्री कुछ हेलीकॉप्टर से वापस जा रहे थे और उनमें से एक को खराब मौसम एवं कोहरे के कारण ‘हार्ड लैडिंग’ करनी पड़ी। उन्होंने कहा, विभिन्न बचाव दल क्षेत्र में जा रहे हैं, लेकिन खराब मौसम और कोहरे के कारण उन्हें हेलीकॉप्टर तक पहुंचने में समय लग सकता है। उन्होंने कहा, यह क्षेत्र थोड़ा ऊबड़-खाबड़ है और वहां पहुंचना कठिन है। हम बचाव दलों के लैंडिंग स्थल पर पहुंचने और उनसे अधिक जानकारी प्राप्त होने का इंतजार कर रहे हैं। सरकारी टीवी ने बताया कि बचाव दल मौके पर पहुंचने का प्रयास कर रहे हैं लेकिन खराब मौसम के कारण बचाव अभियान बाधित हो रहा है। तेज हवाओं के साथ भारी बारिश और कोहरे की सूचना मिली है। आपातकालीन सेवाओं के प्रवक्ता बाबाक येक्तापरास्त ने ‘आईआरएनए’ को बताया कि बचाव अभियान में लगे एक हेलीकॉप्टर ने उस क्षेत्र तक पहुंचने की कोशिश की जहां अधिकारियों का मानना है कि रईसी का हेलीकॉप्टर हो, लेकिन जबरदस्त कोहरे के कारण यह बचाव हेलीकॉप्टर उतर नहीं सका।

इसलिए की थी अजरबैजान की यात्रा

रईसी रविवार तड़के अजरबैजान के राष्ट्रपति इल्हाम अलीयेव के साथ एक बांध का उद्घाटन करने के लिए अजरबैजान में थे। यह तीसरा बांध है, जिसे दोनों देशों ने अरास नदी पर बनाया है। रईसी ईरान के पूर्वी अजरबैजान प्रांत में जा रहे थे। रईसी (63) एक कट्टरपंथी हैं, जिन्होंने पूर्व में देश की न्यायपालिका का नेतृत्व किया था। उन्हें ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के करीबी के रूप में देखा जाता है और कुछ विश्लेषकों का कहना है कि वह 85 वर्षीय नेता (खामेनेई) की मृत्यु या पद से इस्तीफा देने के बाद उनकी जगह ले सकते हैं।

पीएम मोदी ने भी जताई चिंता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को ईरानी राष्ट्रपति इब्राहिम रायसी के हेलीकॉप्‍टर के हार्ड लैंडिंग के बाद लापता होने पर गहरी चिंता जताई और उनकी सलामती के लिए प्रार्थना की। उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, आज राष्ट्रपति रईसी की हेलीकॉप्‍टर उड़ान के संबंध में आईं खबरों से बेहद चिंतित हूं। हम संकट की इस घड़ी में ईरानी लोगों के साथ एकजुटता से खड़े हैं। हम राष्ट्रपति और उनके दल की भलाई के लिए प्रार्थना करते हैं।

(एजेंसी इनपुट)

Pranjul Srivastava
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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