Iran vs America-Israel: US और इजराइल ने शनिवार को मिलकर ईरान पर हमला कर दिया। पिछले कुछ हफ्तों में मिडिल ईस्ट में अमेरिकी मिलिट्री फोर्स की भारी बढ़ोतरी के बीच तेहरान और इस्फहान में आज कई धमाके सुने गए। ईरान में 30 से ज्यादा ठिकानों पर एक साथ हमला किया गया, जिसमें ईरानी प्रेसिडेंट का घर, सुप्रीम लीडर का ऑफिस और जरूरी सरकारी ऑफिस शामिल रहे।
ईरान ने तेहरान के पूर्व और उत्तर में धमाकों की खबर दी है, जहां सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई रहते हैं। हालांकि, रॉयटर्स ने बताया कि खामेनेई को एक सुरक्षित जगह पर भेज दिया गया है। वहीं, ईरान ने करारा जवाब देने का वादा किया है।
ईरान के दोस्त कौन?
ईरान ने मिडिल ईस्ट में मिलिटेंट ग्रुप्स और पॉलिटिकल सरकारों को सपोर्ट करने में दशकों बिताए हैं और अपना तथाकथित 'Axis of Resistance' बनाया है, साथ ही दूसरी ग्लोबल ताकतों के साथ करीबी रिश्ते बनाए हैं। लेकिन पिछले कुछ समय पहले जब इजरायल ने ईरान में कई जगहों पर हमला किया था तो वे साथी देश ज्यादातर चुप रहे थे, तो क्या इस बार कोई आएगा साथ या नहीं? और कौन हैं ईरान के दोस्त?
ईरान के क्षेत्रीय सहयोगी
ये वे देश या इलाके हैं जहां ईरान के सपोर्ट वाले बड़े मिलिशिया एक्टिव हैं। इस नेटवर्क में लेबनान में हिज्बुल्लाह, यमन में हूथी विद्रोही, इराक में कुछ हथियारबंद ग्रुप और गाजा और वेस्ट बैंक में फिलिस्तीनी मिलिटेंट ग्रुप हमास शामिल हैं। लेकिन पिछले दो सालों में, 'एक्सिस' को कुछ गंभीर झटके लगे हैं, इस इलाके में ईरान के कई साथी या तो कमजोर हो गए हैं या सत्ता से बाहर हो गए हैं।
क्या ईरान के ग्लोबल साथी बीच में आ सकते हैं?
ईरान 'CRINK' देशों के एक इनफॉर्मल नेटवर्क का भी हिस्सा है, जो चीन, रूस, ईरान और नॉर्थ कोरिया का शॉर्ट फॉर्म है। अब तक, चीन ने ईरान पर इजराइल के हमलों को केवल गलत बताया है, लेकिन उसने अपनी प्रतिक्रिया सिर्फ डिप्लोमैटिक सॉल्यूशन को सपोर्ट करने तक ही सीमित रखी है।
नॉर्थ कोरिया ने भी हमलों की बुराई करते हुए इसे 'इंसानियत के खिलाफ जुर्म' बताया है, लेकिन ईरान को और सपोर्ट नहीं दिया है। हालांकि, रूस ने इस लड़ाई में बीच-बचाव करने का ऑफर देकर बीच में दखल दिया है। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने ईरान पर हमलों की निंदा की थी और चेतावनी दी थी कि अमेरिका का कोई भी दखल 'बढ़ती हुई स्थिति' होगी। यह हम कुछ समय पिछले साल की बात कर रहे हैं जब इजरायल ने ईरान पर हमला किया था, तो तब ईरान के दोस्तों की क्या स्थिति थी।
ईरान को उसके दोस्त ज्यादा मदद नहीं कर रहे?
ताजा स्थिति तो ये है कि ईरान कई सालों से चीन और रूस के साथ करीबी मिलिट्री रिश्ते बनाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन उसके ताकतवर दोस्त आगे आने में हिचकिचा रहे हैं और इस समय ईरान को दशकों में अपने वजूद के लिए अमेरिका से सबसे बड़ा खतरा पैदा हो गया है।
रूस और ईरान ने पिछले हफ्ते ओमान की खाड़ी में छोटे लेवल पर जॉइंट नेवल ट्रेनिंग की। यह ताकत दिखाने का एक तरीका था, जो कि देखा जाए तो समुद्र और जमीन पर इस इलाके में जमा अमेरिकी फायरपावर के सामने बहुत छोटा था। ईरान की सरकारी मीडिया ने बताया था कि जल्द ही होर्मुज स्ट्रेट में चीन के साथ-साथ रूस और ईरान के जहाजों की एक एक्सरसाइज होने वाली है। हालांकि, उससे पहले अब ईरान में हमला हो गया है। द वॉल स्ट्रीट जर्नल की एक रिपोर्ट में एनालिस्ट ने बताया था कि अगर ट्रंप ईरान पर हमले का ऑर्डर देते हैं तो बीजिंग और मॉस्को सीधी मिलिट्री मदद देने में बहुत कम दिलचस्पी दिखाएंगे। जो कि ऐसा दिख भी रहा है अब तक।
इजरायल के एक पूर्व मिलिट्री इंटेलिजेंस अधिकारी डैनी सिट्रिनोविज के हवाले से कहा गया, 'वे (रूस-चीन) ईरानी शासन के लिए अपने हितों की कुर्बानी नहीं देंगे।' 'वे उम्मीद कर रहे हैं कि शासन नहीं गिरेगा, लेकिन वे निश्चित रूप से मिलिट्री तौर पर US का मुकाबला नहीं करेंगे।'
साथ ही, द न्यूयॉर्क टाइम्स ने रिपोर्ट किया कि ट्रंप ने सलाहकारों से कहा है कि अगर डिप्लोमेसी या किसी भी शुरुआती टारगेटेड U.S. हमले से ईरान अपना न्यूक्लियर प्रोग्राम नहीं छोड़ता है, तो वह देश के नेताओं को सत्ता से हटाने के लिए एक बहुत बड़े हमले पर विचार करेंगे।
