Iran–Israel War: ईरान और इजराइल के बीच जारी वॉर में अमेरिका की एंट्री ने पूरी दुनिया के लिए खतरा पैदा कर दिया है। अमेरिका ने फोर्डो परमाणु ऊर्जा केन्द्र पर हमला करने के लिए B-2 बमवर्षकों का इस्तेमाल किया है। इस हमले में ईरान को काफी नुकसान उठाना पड़ा है। आइए समझते है पूरी कहानी...
1. इजरायल और ईरान के बीच शुरू हुआ सैन्य टकराव अब खतरनाक मोड़ पर पहुंच चुका है। ईरान के खिलाफ इजरायल की जंग में अमेरिका भी शामिल हो गया है। अमेरिका की ओर से तेहरान में परमाणु सुविधाओं और सैन्य ठिकानों पर किए गए हवाई हमलों ने ईरान को भारी नुकसान पहुंचाया है। जानकारी के अनुसार, अमेरिका ने बड़ी कार्रवाई करते हुए ईरान में Fordow समेत 3 न्यूक्लियर साइट्स पर एयर स्ट्राइक की है। अमेरिका ने फोर्डो पर हमला करने के लिए B-2 बमवर्षकों का इस्तेमाल किया है।
2. ईरान की परमाणु एजेंसी ने रविवार को पुष्टि की कि उसके फोर्डो, इस्फहान और नतांज परमाणु केन्द्रों पर अमेरिकी हमले हुए हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा परमाणु केन्द्रों पर अमेरिकी हमले की घोषणा के बाद ईरान के परमाणु ऊर्जा संगठन ने एक बयान जारी कर यह जानकारी दी। संगठन ने अपने बयान में कहा कि ईरान का परमाणु ऊर्जा संगठन राष्ट्र को आश्वासन देता है कि अपने दुश्मनों की बुरी साजिशों के बावजूद वह अपने हजारों क्रांतिकारी और प्रतिबद्ध वैज्ञानिकों एवं विशेषज्ञों के प्रयासों से उठ खड़ा होगा। ईरान ने कहा कि इस्फहान, फोर्दो, नतांज और अन्य परमाणु प्रतिष्ठानों पर अमेरिका के हमले के बाद ‘विकिरण के कोई संकेत नहीं मिले।
3. इससे पहले ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी इरना ने अपनी एक खबर में देश के फोर्डो परमाणु केन्द्र पर हमले की बात स्वीकार की थी। समाचार एजेंसी ने कहा कि हमलों में इस्फहान और नतांज परमाणु केन्द्र को निशाना बनाया गया। इरना ने इस्फहान में सुरक्षा मामलों के प्रभारी उप-गवर्नर अकबर सालेही के हवाले से कहा कि परमाणु केन्द्रों के आसपास हमले हुए हैं। हालांकि उन्होंने इस बारे में कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी।
4. इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान पर हमले करने के अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के फैसले के लिए उनकी सराहना की है। नेतन्याहू ने ट्रंप को एक वीडियो संदेश में कहा कि ईरान के परमाणु प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने का आपका साहसिक निर्णय इतिहास बदल देगा...। नेतन्याहू ने कहा कि अमेरिका ने जो किया है वो कोई अन्य देश नहीं कर सकता। इस बीच, इजराइल ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर अमेरिका के हमले के बाद अपना हवाई क्षेत्र बंद करने की भी घोषणा की है।
5. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अमेरिका के हमलों में ईरान के प्रमुख परमाणु ठिकाने पूरी तरह से नष्ट हो गए हैं। ट्रंप ने शनिवार रात व्हाइट हाउस में यह टिप्पणी की। इससे पहले उन्होंने कहा था कि अमेरिकी सेना ने ईरान में तीन प्रमुख परमाणु केंद्रों पर हमले किए हैं। साथ ही राष्ट्रपति ने ईरान को अमेरिका के विरुद्ध जवाबी हमले के खिलाफ चेतावनी दी और कहा कि ईरान को यह तय करना है कि उसे शांति चाहिए या त्रासदी।

Iran Trump
6. अमेरिका के राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने संबोधन में कहा कि हमले सफल थे और ईरान की प्रमुख संवर्धन सुविधाएं नष्ट कर दी गईं, ट्रंप बोले कि वो हमारे लोगों को मार रहे हैं ईरान को शांति स्थापित करने की आवश्यकता है अन्यथा आगे के हमले और भी विनाशकारी होंगे।
7. अमेरिका का ईरान पर बम हमला कई कारणों से महत्वपूर्ण है। पहले तो यह अमेरिका और ईरान के बीच तनाव को बढ़ाता है, जो पहले से ही संघर्ष से भरा हुआ है। दूसरे, हमले का लक्ष्य, फोर्डो परमाणु सुविधा, ईरान के परमाणु कार्यक्रम के लिए महत्वपूर्ण है। इससे क्षेत्र में परमाणु प्रसार के भविष्य को लेकर चिंताएं बढ़ती हैं। इसके अलावा, यह हमला क्षेत्रीय स्थिरता और ईरान की संभावित प्रतिशोधी कार्रवाइयों के बारे में चिंताओं को भी जन्म देता है, जो आगे के संघर्ष की ओर ले जा सकता है।
8. अमेरिका के ईरान पर बम हमले के पीछे कई कारण हैं। मुख्य रूप से अमेरिका ईरान की परमाणु क्षमताओं को कम करने का लक्ष्य रखता है, जिन्हें राष्ट्रीय और क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए सीधे खतरे के रूप में देखा जाता है। यह हमला ईरान की सैन्य गतिविधियों, जिसमें मिसाइल परीक्षण और फारस खाड़ी में आक्रामक स्थिति शामिल है, से उत्पन्न खतरों का जवाब भी है। अमेरिका के भीतर घरेलू राजनीतिक दबाव स्थिति को और बढ़ाते हैं, जिसमें कुछ अधिकारी ईरान के खिलाफ मजबूत रुख की वकालत कर रहे हैं।
9. बमबारी के प्रति अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएँ मिली-जुली रही हैं। कुछ देश अमेरिका के कार्यों का समर्थन करते हैं, उन्हें क्षेत्रीय सुरक्षा बनाए रखने के लिए आवश्यक मानते हैं। अन्य इस हमले की निंदा करते हैं।
10. संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठन स्थिति की बारीकी से निगरानी कर रहे हैं, वैश्विक परमाणु अप्रसार प्रयासों के लिए इसके प्रभावों का आकलन कर रहे हैं।
