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चीनी हैकर्स ने कैसे अमेरिकी ट्रेजरी विभाग में की सेंधमारी? जान लीजिए पूरी कहानी

China vs US: चीनी हैकरों ने तीसरे पक्ष के सॉफ्टवेयर सेवा प्रदाता की प्रणाली में सेंध लगाने के बाद अमेरिकी कोषागार विभाग के कंप्यूटर और गोपनीय दस्तावेजों तक पहुंच बना ली। कोषागार विभाग ने सोमवार को यह जानकारी दी। विभाग ने कहा कि हैकिंग की जांच ‘‘साइबर सुरक्षा में सेंध की बड़ी घटना’’ के रूप में की जा रही है। विभाग के प्रवक्ता ने एक अलग बयान में कहा, ‘‘कोषागार विभाग हमारे सिस्टम और उसके पास मौजूद डेटा के खिलाफ सभी खतरों को बहुत गंभीरता से लेता है।’’

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चीनी हैकरों ने साइबर सेंध की घटना में कंप्यूटरों, दस्तावेजों तक ही पहुंच बनाई।

World News: अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने साइबर सुरक्षा उल्लंघन की पुष्टि की है जिसकी वजह से चीनी हैकर्स कर्मचारियों के वर्कस्टेशन और अवर्गीकृत दस्तावेजों तक पहुंच बनाने में सफल रहे। हालांकि विभाग ने यह नहीं बताया कि कितने वर्कस्टेशन तक पहुंच बनाई गई या हैकर्स ने किस तरह के दस्तावेज हासिल किए। विभाग ने यह विवरण नहीं दिया कि कितने कंप्यूटर तक पहुंच बनाई गई थी या हैकरों ने किस प्रकार के दस्तावेज प्राप्त किए हैं, लेकिन सांसदों को लिखे पत्र में इस सेंध का खुलासा करते हुए कहा कि ‘‘इस समय ऐसा कोई सबूत नहीं है जो यह दर्शाता हो कि सेंध लगाने वाले तत्वों ने कोषागार की सभी जानकारी तक पहुंच जारी रखी है।’’

साइबर सुरक्षा घटना' के रूप में की जा रही है मामले की जांच

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सांसदों को लिखे पत्र में, अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने कहा कि 'इस समय ऐसा कोई सबूत नहीं है जो यह बताता हो कि खतरा पैदा करने वाले व्यक्ति की पहुंच अब भी ट्रेजरी की जानकारी तक बनी हुई है।' पत्र में कहा गया, 'इस पूरे मामले की बड़ी साइबर सुरक्षा घटना' के रूप में जांच की जा रही है। ट्रेजरी हमारे सिस्टम और उसके पास मौजूद डाटा के खिलाफ सभी खतरों को बहुत गंभीरता से लेता है।'

भागीदारों के साथ मिलकर काम करना जारी रखने की कही बात

विभाग के प्रवक्ता ने एक बयान में कहा, "पिछले चार वर्षों में, ट्रेजरी ने अपनी साइबर सुरक्षा को काफी मजबूत किया है और हम अपने वित्तीय सिस्टम की सुरक्षा के लिए निजी और सार्वजनिक क्षेत्र के भागीदारों के साथ मिलकर काम करना जारी रखेंगे।" रिपोर्ट में कहा गया कि यह घुसपैठ तब हुई जब हैकर्स थर्ड-पार्टी सॉफ्टेवयर सर्विस प्रोवाइडर बियॉन्डट्रस्ट से छेड़छाड़ कर रिमोट टेक्निकल सपोर्ट सर्विस को सुरक्षित करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली कुंजी (की) तक पहुंच बनाने में कामयाब रहे।

बियॉन्डट्रस्ट ने बताया- हैकरों ने चुरा ली है एक कुंजी (की)

ट्रेजरी विभाग के अनुसार, उसे नवीनतम समस्या के बारे में 8 दिसंबर को पता चला जब बियॉन्डट्रस्ट ने बताया कि हैकरों ने एक कुंजी (की) चुरा ली है। प्रभावित सेवा को ऑफलाइन कर दिया गया है। एफबीआई, साइबर सुरक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर सुरक्षा एजेंसी (सीआईएसए) और अन्य संबंधित प्राधिकरणों की भागीदारी में जांच चल रही है। हालांकि चीन ने सभी आरोपों से इनकार कर दिया है। बीजिंग में, विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने हैकिंग के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अमेरिका के पास सबूत नहीं हैं। माओ निंग ने कहा, "हमने बार-बार ऐसे निराधार आरोपों पर अपनी स्थिति बताई है, जिनमें सबूत नहीं हैं। चीन लगातार सभी तरह की हैकिंग का विरोध करता है, और हम राजनीतिक उद्देश्यों के लिए चीन के खिलाफ झूठी जानकारी के प्रसार का और भी अधिक विरोध करते हैं।"

Ayush Sinha
आयुष सिन्हाauthor

मैं टाइम्स नाउ नवभारत (Timesnowhindi.com) से जुड़ा हुआ हूं। कलम और कागज से लगाव तो बचपन से ही था, जो धीरे-धीरे आदत और जरूरत बन गई। मुख्य धारा की पत्रकारिता से जुड़े हुए 10 साल पूरे हो चुके हैं। लोकसभा चुनाव 2014 से पहले ही मैंने पत्रकारिता की पढ़ाई के बीच में ही देश की राजधानी दिल्ली आने की ठान ली थी। उससे पहले मैंने कभी ये सोचा तक नहीं था कि मैं बनारस बोले तो वाराणसी शहर से बाहर भी जा सकता हूं। जी हां, मेरा नाता काशी से है। जन्म के साथ-साथ शिक्षा दीक्षा भी बनारस में ही हुई। राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी (बापू) द्वारा स्थापित किए गए विश्वविद्यालय- 'महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ' से मैंने पत्रकारिता में स्नातक किया है। ग्रेजुएशन के दौरान ही विश्वविद्यालय के पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग के अध्यापकों ने बड़ी ही सख्ती से मेरी नक्काशी करने की कोशिश की। ग्रेजुएशन के आखिरी वर्ष आते-आते मैंने दिल्ली की ट्रेन पकड़ी और यहां पहुंच गया। आव देखा न ताव, दिल्ली NCR में बड़े-बड़े मीडिया समूहों के दफ्तरों के बाहर अपना बायोडेटा डाल कर प्रयास में जुट गया। काफी धैर्य के बाद ZEE मीडिया समूह से जुड़ने का मौका मिला। मेरे पत्रकारिता के सफर की शुरुआत टेलीविजन के इनपुट डिपार्टमेंट से हुई। यहां मैं असाइनमेंट डेस्क पर था। कुछ महीनों तक खुद को इस समूह के साथ जोड़े रखने के बाद वर्ष 2015 में मैंने प्रिंट मीडिया का रुख कर लिया और ALL RIGHTS नाम की मैगज़ीन के साथ जुड़ गया। बतौर विशेष संवाददाता (Special Correspondent) मेरे कंधों पर बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई थी। मैं उन दिनों देशभर के अलग-अलग लोकसभा क्षेत्र के सांसदों, केंद्रीय मंत्रियों और दिल्ली सरकार के विधायकों और मंत्रियों का साक्षात्कार करता था। मैगज़ीन के संपादकीय पृष्ठ के लिए मैं लेख भी लिखता था। राजनीतिक खबरों से लगाव होने के चलते मैंने इस बीट को ही अपना हमसाया बना लिया। मैगजीन के बाद फिर टेलीविजन का रुख किया और इसी साल दोबारा ज़ी मीडिया से जुड़ गया। यहां साढ़े 3 सालों तक काम करने के बाद मैंने डिजिटल मीडिया में कदम रखने की ठान ली। रिपब्लिक भारत की लॉन्चिंग से पहले मुझे इसकी वेबसाइट से जुड़ने का मौका मिला। रिपब्लिक से जुड़ने के साथ ही मैंने दिल्ली छोड़कर मुंबई का रुख कर लिया। समंदर किनारे बसे इस शहर में मैंने डिजिटल पत्रकारिता के गुर को सीखा। इस संस्थान में मुझे रिपोर्टर के तौर पर मौका दिया था। कुछ ही महीने बाद मैं वापस दिल्ली आ गया और मैंने न्यूज़ वर्ल्ड इंडिया में एसोसिएट प्रोड्यूसर और रिपोर्टर की भूमिका में काम किया। चंद महीने बाद ही ज़ी मीडिया समूह के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर काम करने का अवसर मिला। ज़ी हिन्दुस्तान के लिए मैंने स्पेशल खबरों पर काम किया और इस समूह का पहला डिजिटल रिपोर्टर बन गया। इसके बाद मुझे वीडियो सेक्शन का हेड बना दिया गया। मैंने चुनावी कवरेज की, ग्राउंड रिपोर्टिंग की और साथ ही साथ वीडियो सेक्शन को नए शिखर पर पहुंचाने की कोशिश की। मैं कविताएं और किस्से-कहानियां भी लिखता रहता हूं। पढ़ाई के दौरान ही मैंने दो किताबें भी लिखी, एक नॉवेल और दूसरी पोएट्री बुक। पत्रकारिता में रहते हुए मैंने कई "स्टिंग ऑपरेशन" भी किए। मेरे सफर को और भी खूबसूरत बनाने के लिए टाइम्स समूह ने मुझे मौका दिया। मैं जुलाई, 2023 में इस संस्थान से जुड़ा और मुझे मेन डेस्क पर खबरों से दो-चार होते रहने की जिम्मेदारी सौंपी गई। राजनीतिक विश्लेषण के साथ विस्तार से खबरों को परोसता हूं और अपने पाठकों को कुछ नया देने का प्रयास करता हूं।

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