अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को कहा कि नाटो के अधिकांश सहयोगी देशों ने ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान में शामिल होने से इनकार कर दिया है। इस पर उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा कि अमेरिका को किसी बाहरी समर्थन की जरूरत नहीं है। ट्रंप ने एक बयान में कहा कि हमें हमारे ज्यादातर नाटो सहयोगियों ने बताया है कि वे ईरान के ‘आतंकी शासन’के खिलाफ हमारे सैन्य अभियान में शामिल नहीं होना चाहते। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि लगभग सभी देश इस बात से सहमत हैं कि ईरान को किसी भी स्थिति में परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिया जाना चाहिए।
'नाटो एकतरफा व्यवस्था'
नाटो देशों के रुख पर ट्रंप ने कहा कि उन्हें इस प्रतिक्रिया से हैरानी नहीं हुई। उन्होंने कहा कि मैं हमेशा मानता रहा हूं कि नाटो एकतरफा व्यवस्था है,हम उनकी रक्षा करते हैं, लेकिन जरूरत के समय वे हमारे लिए कुछ नहीं करते। ट्रंप ने दावा किया कि अमेरिकी सेना ने ईरान की सैन्य क्षमता को काफी हद तक कमजोर कर दिया है। उन्होंने कहा कि हमने ईरान की नौसेना, वायुसेना, एयर डिफेंस और रडार सिस्टम को खत्म कर दिया है,और उनके शीर्ष नेतृत्व को भी लगभग समाप्त कर दिया है।
उन्होंने कहा कि इन सैन्य सफलताओं के बाद अब सहयोगियों की मदद की जरूरत नहीं रही। उन्होंने कहा कि हम अब नाटो देशों की सहायता न तो चाहते हैं और न ही जरूरत है और हमें कभी थी भी नहीं।
'हमें किसी की मदद की जरूरत नहीं'
ट्रंप ने जापान,ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया जैसे एशियाई साझेदारों को लेकर भी यही रुख दोहराया और कहा कि हमें किसी की मदद की जरूरत नहीं है। उन्होंने एक दिन पहले ओवल ऑफिस में भी सहयोगी देशों के रवैये पर नाराजगी जताई थी। ब्रिटेन का जिक्र करते हुए ट्रंप ने कहा कि उन्होंने कुछ युद्धपोत और माइनस्वीपर भेजने का अनुरोध किया था, लेकिन जवाब उनकी उम्मीद के मुताबिक नहीं मिला। ट्रंप ने कहा कि मैंने बाद में कहा कि अब उनकी जरूरत नहीं है। मुझे मदद शुरुआत में चाहिए थी,जीत के बाद नहीं। उन्होंने विदेशों में तैनात अमेरिकी सैनिकों का जिक्र करते हुए कहा कि अमेरिका जापान, दक्षिण कोरिया और जर्मनी जैसे देशों की सुरक्षा में बड़ी भूमिका निभा रहा है।
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक
गौरतलब है कि होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत गुजरता है। इस क्षेत्र में बढ़ते तनाव ने वैश्विक ऊर्जा संकट की आशंका को बढ़ा दिया है। पश्चिम एशिया में संघर्ष 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद शुरू हुआ था, जिसके बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई की। इसके चलते होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है।
ईरान का परमाणु कार्यक्रम लंबे समय से अमेरिका की मध्य-पूर्व नीति का अहम मुद्दा रहा है। अपने पहले कार्यकाल में ट्रंप ने 2015 के ईरान परमाणु समझौते से अमेरिका को बाहर कर लिया था, यह कहते हुए कि यह समझौता ईरान को स्थायी रूप से परमाणु हथियार बनाने से नहीं रोकता।
