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Dalai Lama से अमेरिकी सांसदों की मुलाकात पर भड़का चीन, कहा- अलगाववादी गतिविधियों से रहें दूर

अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन तिब्बत विवाद का समाधान तलाशने के लिए जल्द ही रिजाल्व तिब्बत एक्ट पर हस्ताक्षर कर सकते हैं। हालांकि, अमेरिका तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र को चीन का हिस्सा मानता है। इस बीच आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा से अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात पर चीन एक बार फिर भड़क गया है।

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आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा से अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात पर चीन एक बार फिर भड़क गया है।

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Dalai Lama: तिब्बत के आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा से अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात पर चीन एक बार फिर भड़क गया है। दलाई लामा से अमेरिकी सांसदों की मुलाकात से चीन परेशान है। यह यात्रा ऐसे समय हुई है, जब चीन और अमेरिका अपने संबंधों सुधारने का प्रयास कर रहे हैं। चीन, अमेरिका और भारत के संबंधों के लिहाज से अहम क्यों है? अमेरिका का प्रतिनिधिमंडल भारत में क्यों है अमेरिका के सांसदों का सात सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल दलाई लामा से मुलाकात के लिए भारत में है। अमेरिका लंबे समय से इस बात पर जोर देता रहा है कि तिब्बत के लोगों को अपने धार्मिक और सांस्कृतिक रीति रिवाजों का पालन करने का अधिकार है। वह लंबे समय से इन अधिकारों का समर्थन करता रहा है। अमेरिका चीन पर तिब्बत में मानवाधिकारों के उल्लंघन का आरोप भी लगाता रहा है। अमेरिका की प्रतिनिधि सभा ने इस माह एक विधेयक पारित किया है। विधेयक में कहा गया है कि चीन पर तिब्बत के नेताओं के साथ बातचीत करने के लिए दबाव डाला जाना चाहिए। विधेयक में चीन को एक समझौते के लिए तैयार करने और तिब्बती लोगों की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक,धार्मिक और भाषायी पहचान को संरक्षण देने बात कही गई है। अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल ने भारत से संचालित निर्वासित तिब्बत सरकार के अधिकारियों से भी मुलाकात की है।

चीन ने 1950 में तिब्बत पर आक्रमण कर दिया था और चीन के शासन के खिलाफ असफल क्रांति के बाद 1959 में दलाई लामा तिब्बत से भागकर भारत आ गए। तब से भारत के धर्मशाला में निर्वासन में रह रहे हैं। 1989 में दलाई लामा को नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया था। 2020 में लद्दाख के गलवन में चीन और भारत की सेनाओं के बीच हिंसक झड़प के बाद से भारत और चीन के संबंधों में भी तनाव है और सीमा पर गतिरोध अब भी बना हुआ है।

चीन ने दलाई लामा से अमेरिकी सांसदों की मुलाकात पर जताई आपत्ति

अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन तिब्बत विवाद का समाधान तलाशने के लिए जल्द ही रिजाल्व तिब्बत एक्ट पर हस्ताक्षर कर सकते हैं। हालांकि, अमेरिका तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र को चीन का हिस्सा मानता है। चीन दलाई लामा पर अलगाववादी गतिविधियों का आरोप लगाता है। दूसरी तरफ दलाई लामा का कहना है कि वह तिब्बत के लिए वास्तविक स्वायत्ता चाहते हैं। चीन ने दलाई लामा की विदेशी नेताओं के साथ मुलाकात पर हमेशा आपत्ति जताई है। हालांकि, दलाई लामा अमेरिका के राष्ट्रपतियों सहित दूसरे विदेशी नेताओं से मिलते रहे हैं। तिब्बत को लेकर सबसे विवादास्पद मुद्दा दलाई लामा का उत्तराधिकारी नियुक्त करना है। चीन का कहना है कि उसे उत्तराधिकारी तय करने का अधिकार है, लेकिन दलाई लामा का कहना है कि उनके उत्तराधिकारी का फैसला सिर्फ तिब्बत के लोग ही कर सकते हैं और उनका उत्तराधिकारी भारत से भी हो सकता है।

Shashank Shekhar Mishra
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शशांक शेखर मिश्रा टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल (www.timesnowhindi.com) में बतौर कॉपी एडिटर काम कर रहे हैं। इन्हें पत्रकारिता में करीब 5 वर्षों का अनुभव है। इन पांच सालों में देश की राजनीति से लेकर देश-दुनिया में बनते-बिगड़ते सत्ता समीकरणों एवं घटनाओं को कवर करने का अनुभव है। राजनीति, रक्षा और आटोमोबाइल्स की खबरों में विशेष रूचि के साथ खोजी पत्रकारिता और स्टिंग ऑपरेशन का भी अनुभव है। टाइम्स नाउ नवभारत में देश-दुनिया की खबरों के साथ रियल टाइम डेस्क पर कार्य करने का अनुभव है। शशांक ने इन 5 वर्षों के पत्रकारिता के कैरियर के दौरान टेलीविजन और डिजिटल मीडिया में कार्य करने का अनुभव हासिल किया है। टाइम्स नाउ नवभारत में बतौर कॉपी एडिटर जुड़ने से पहले जागरण न्यू मीडिया, इनशार्ट्स, जी हिंदुस्तान और न्यूज हेल्पलाइन में सब एडिटर, रिपोर्टर और असिस्टेंट प्रोड्यूसर के तौर पर काम कर चुके हैं। पढ़ाई-लिखाई की बात करें तो लखनऊ विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है। इसके बाद एशियन एकेडमी ऑफ फिल्म एंड टेलीविजन से पोस्ट ग्रेजुएशन डिप्लोमा इन मास कम्युनिकेशन एंड टीवी जर्नलिज्म किया हैं। शशांक को जिम जाना, एडवेंचर एक्टिविटी करना और नई तकनीक को जानना और समझना बेहद पसंद है। इसके अलावा शशांक को ड्राइव करना और अध्यात्म में भी काफी रुचि हैं। शशांक शेखर मिश्रा उत्तर प्रदेश की राजधानी और नवाबों के शहर के रूप में फेमस लखनऊ से ताल्लुक रखते हैं।

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