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कनाडा में फिर से हिंदू मंदिर में तोड़फोड़, दीवारों पर लिखे गए खालिस्तान के समर्थन में नारे

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Sep 8, 2023, 10:59 AM IST

Canada Hindu Temple vandalised: ब्रिटिश कोलंबिया के सरे शहर में एक हिंदू मंदिर को निशाना बनाया गया है और मंदिर की दीवारों पर खालिस्तान के समर्थन में नारे भी लिखे गए हैं। यह घटना जनमत संग्रह को रद्द करने और वाणिज्य दूतावास को बंद करने की धमकी के बाद सामने आई है।

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कनाडा में हिंदू मंदिर में तोड़फोड़

Photo : ANI

Canada Hindu Temple vandalised: कनाडा से एक बार फिर हिंदू मंदिर में तोड़फोड़ की खबर सामने आई है। जानकारी के मुताबिक, ब्रिटिश कोलंबिया के सरे शहर में एक हिंदू मंदिर को निशाना बनाया गया है और मंदिर की दीवारों पर खालिस्तान के समर्थन में नारे भी लिखे गए हैं।

यह घटना अलगाववादी संगठन सिख फॉर जस्टिस (SFJ) के वैंकूवर में भारत के वाणिज्य दूतावास की तालेबंदी की धमकी से एक दिन पहले हुई है। रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस ने बताया गुरुवार सुबह सरे के श्री माता भामेश्वरी मंदिर में तोड़फोड़ की सूचना मिली। मंदिर प्रबंधन के सदस्य रोहित के मुताबिक, मंदिर की दीवारों पर से खालिस्तानी नारे हटा दिए गए हैं।

उच्चायोग को पहले से ही थी आशंका

ओटावा में भारतीय उच्चायोग को इस तरह की घटना की पहले से ही आशंका थी। उच्चयोग ने SFJ की कथित धमकी के बाद कनाडा के विदेश मंत्रालय वैंकूवर में अपने राजनयिक परिसर के लिए कथित खतरे के बारे में सूचित किया था। बता दें, एसएफजे शुक्रवार को वैंकूवर वाणिज्य दूतावास को बंद करने का आह्वान किया था। यह आह्वान खालिस्तान जनमत संग्रह को रद्द करने के विरोध में किया गया था, जो 10 सितंबर को सरे के एक स्कूल में होने वाला था।

जनमत संग्रह का आदेश लिया गया था वापस

बता दें, कनाडाई अधिकारियों ने एक स्कूल में जनमत संग्रह कराने के आदेश को वापस ले लिया था। यह निर्णय तब लिया गया जब कार्यक्रम में हथियारों के फोटो के साथ स्कूल की तस्वीरें भी थीं। कुछ पोस्टर में AK-47 के साथ अन्य हथियारों के भी फोटो थे, जिसके बाद अधिकारियों ने अनुमति रद्द कर दी थी। 10 सितंबर को कोलंबिया शहर के स्कूल में जनमत संग्रह का आयोजन किया गया था।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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