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92% महंगाई दर, 40 फीसदी गरीब, ऐसा है मेसी के अर्जेंटीना का हाल, विश्व कप जीत बनेगी मरहम

  • Authored by: प्रशांत श्रीवास्तव
  • Updated Dec 19, 2022, 04:49 PM IST

Argentina World Cup Win and Financial Crisis: विश्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार साल 1950 के बाद से अर्जेंटीना सबसे ज्यादा लंबे समय से आर्थिंक मंदी में रहने वाला देश है। महंगाई का आलम यह है कि वह नवंबर के महीने में 92.4 फीसदी के स्तर पर पहुंच गई है।

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अर्जेंटीना में आर्थिक हालात बेहद खराब

Photo : Twitter
KEY HIGHLIGHTS
  • आर्थिक मंदी के कारण 40 फीसदी आबादी गरीब हो गई है।
  • जनवरी 2022 से महंगाई दर 50 फीसदी से ऊपर बनी हुई है।
  • फुटबाल विश्व कप की जीत अर्जेंटीना के लोगों के लिए बड़ा मरहम है।

Argentina World Cup Win and Financial Crisis:लियोन मेसी (Lionel Messi) की अगुआई में अर्जेंटीना ने 36 साल बाद विश्व कप जीत लिया है। इस जीत से पूरे अर्जेंटीना में खुशी की लहर दौर गई है। अर्जेंटीना की राजधानी ब्यूनर्स आयर्स में लाखों लोग जश्न मनाने के लिए सड़कों पर उतर आए हैं। ऐसे ही जश्न,अर्जेंटीना के दूसरे शहरों में भी हो रहे हैं। डिएगो मेराडोना के बाद (1986 ) मेसी ने विश्व कप जीतने का कारनामा दिखाया है। लंबे समय से विश्व कप का इंतजार और 3 साल से चल रहे आर्थिक संकट के बीच यह जीत अर्जेंटीना वासियों के जख्मों पर मरहम लगाने जैसी है। क्योंकि अर्जेंटीना बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, बढ़ती गरीबी के ऐसे कुचक्र में फंस गया है कि लोग इससे ऊबर नहीं पा रहे हैं।

सबसे लंबे समय तक मंदी में रहने वाला देश

विश्व बैंक की रिपोर्ट के अनुसार साल 1950 के बाद से अर्जेंटीना सबसे ज्यादा लंबे समय से आर्थिंक मंदी में रहने वाला देश है। मौजूदा समय में अर्जेंटीना 2018 से आर्थिक मंदी के चपेट में है। उसके बाद कोरोना और फिर रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण स्थिति और बिगड़ गई। हालात यह है कि 2019 के आम चुनाव के बाद वहां पर सरकार डिफॉल्ट कर गई थी।

92 फीसदी के दर पर महंगाई

अर्जेंटीना में महंगाई का आलम यह है कि वह नवंबर के महीने में 92.4 फीसदी के स्तर पर पहुंच गई है। और ऐसी संभावना है कि दिसंबर के महीने में यह 100 फीसदी का स्तर भी पार कर सकती है। G-20 देशों में अर्जेंटीना सबसे ज्यादा महंगाई वाले देशों में हैं। वहीं अगर भारत की महंगाई दर से तुलना की जाय तो यह करीब 15 गुना ज्यादा है। नवंबर में भारत में रिटेल महंगाई दर 5.88 फीसदी थी।

40 फीसदी आबादी गरीब

अर्जेंटीना पर आर्थिक मंदी का ऐसा असर हुआ है कि वहां पर गरीबों की संख्या बढ़ती जा रही है।वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार 2018 के पहले अर्जेंटीना की 25 फीसदी आबादी गरीब थी। जो कि इन 3 वर्षों में बढ़कर 40 फीसदी पहुंच गई है। हालत यह है कि सरकार ने बीते नवंबर में 1500 जरूरी वस्तुओं की कीमतों को फ्रीज कर दिया है। यानी कंपनियां अब उनकी कीमतें नहीं बढ़ा पाएंगी। क्योंकि वह पहले से ही लोगों की जेब से बाहर हो गई हैं।

कमोजर हो गई है अर्जेंटीना की मुद्रा

आर्थिक मंदी का ही असर है कि अर्जेंटीना की मुद्रा डॉलर के मुकाबले लगातार कमजोर होती जा रही है। इस समय एक डॉलर के मुकाबले अर्जेंटीना की मुद्रा पीसो वैल्यु 172 के स्तर को पार कर गई है। जिसकी वजह से उसका आयात लगातार महंगा होता जा रहा है।

प्रशांत श्रीवास्तव
प्रशांत श्रीवास्तवauthor

करीब 17 साल से पत्रकारिता जगत से जुड़ा हुआ हूं। और इस दौरान मीडिया की सभी विधाओं यानी टेलीविजन, प्रिंट, मैगजीन, डिजिटल और बिजनेस पत्रकारिता में काम करने का मौका मिला। इस समय Timesnowhindi.com में टीम लीड के रुप में बिजनेस, ऑटो, यूटीलिटी, टेक सेक्शन में अपना योगदान दे रहा हूं। करियर का पहला ब्रेक हैदराबाद स्थित मीडिया संस्थान ईटीवी से टेलीविजन के जरिए हुआ। यहां पर टेलीविजन पत्रकारिता की बारीकियों को समझने का मौका मिला। और उसके बाद अगला पड़ाव दिल्ली स्थित दैनिक भास्कर समूह का बिजनेस भास्कर रहा। यहां से बिजनेस पत्रकारिता में कदम रखा। और यह सफर वित्त मंत्रालय की रिपोर्टिंग से लेकर बैंकिंग, इंश्योरेंस, ऑटो, एफएमसीजी, एमएमएमई, टेलीकॉम सेक्टर की ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर कॉरपोरेट जगत की खबरें और इकोनॉमी से जुड़ी खबरों से गुजरते हुए अमर उजाला, मनी भास्कर वेबसाइट से होकर आउटलुक मैगजीन पहुंचा। यहां पर पॉलिटिकल खबरों को करने का मौका मिला। आउटलुक में रहते हुए भाजपा और कांग्रेस पार्टी को भी कवर किया। इस दौरान दिल्ली दंगों पर ग्राउंड रिपोर्ट से लेकर सीएए आंदोलन, किसान आंदोलन और कृषि जगत, वाइल्ड लाइफ से जुड़ी ग्राउंड रिपोर्ट भी करने का मौका मिला। करियर के इस सफर में 2014 लोक सभा चुनाव, 2019 लोक सभा चुनाव, इसके अलावा उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव, राजस्थान विधान सभा, मध्य प्रदेश विधान सभा चुनाव की ग्राउंड रिपोर्ट भी की। पिछले 16 साल से केंद्रीय बजट की बारीकियों को समझकर उसे आम भाषा में लोगों तक पहुंचाने का भी प्रयास किया है। 17 साल के करियर में करीब 10 साल डिजिटल मीडिया का अनुभव रहा है। पिछले 3 साल से टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहा हूं। पत्रकारिता का ककहरा माखन लाल चतुर्वेदी पत्रकारिता विश्वविद्यालय भोपाल से सीखा है।

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