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अमेरिका के कब्जे में हैं एलियन्स और उड़न तश्तरियां, पूर्व खुफिया अधिकारी के दावे से हडकंप

  • Authored by: प्रांजुल श्रीवास्तव
  • Updated Jul 27, 2023, 08:45 AM IST

Aliens and UFO in Us Laboratory: अमेरिका के एक पूर्व खुफिया अधिकारी डेविड ग्रुश ने चौंकाना वाला दावा किया है। उन्होंने कहा है कि अमेरिकी सरकार दूसरी दुनिया से आने वाले अंतरिक्ष यान (Alien Spacecraft) को पनाह दे रही है। उनके कब्जे में गैर-इंसानी शरीर हैं।

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Aliens and UFO in Us Laboratory

Photo : BCCL

Aliens and UFO in Us Laboratory: इस धरती के बाहर जीवन है या नहीं? यह सवाल धरती के निर्माण से लेकर अब तक बना हुआ है। तमाम रिसर्च हुईं और अंतरिक्ष तक की यात्राएं भी, लेकिन सवाल जब का तस रहा। और एलियन और उड़न तश्तरियां एक रहस्य ही बनी रहीं। हालांकि, अब अमेरिका के एक पूर्व खुफिया अधिकारी डेविड ग्रुश ने चौंकाना वाला दावा किया है।

उन्होंने कहा है कि अमेरिका के पास यूएफओ और एलियंश के शरीर हैं। उनके इस दावे से हड़कंप मच गया है। ग्रुश ने यह दावा वाशिंगटन में हाउस ओवरसाइट कमेटी के सामने सुनवाई के दौरान किया है। उन्होंने कहा है कि अमेरिकी सरकार के कब्जे में कई UFO गैर इंसानी शरीर हैं।

जून में दावे के बाद शुरू हुई सुनवाई

दरअसल, पूर्व अमेरिकी खुफिया अधिकारी ग्रुश ने इस तरह का दावा जून में किया था, जिसके बाद हाउस ओवरसाइट कमेटी ने इस मामले की सुनवाई शुरू की। जून में ग्रुश के दावा किया था कि अमेरिकी सरकार दूसरी दुनिया से आने वाले अंतरिक्ष यान (Alien Spacecraft) को पनाह दे रही है। बीते बुधवार (26 जुलाई) को ग्रुश ने कमेटी के सामने अपने इस बयान को दोहराया। उन्होंने कहा, अमेरिकी सरकार के पास जो शरीर हैं, वे गैर-इंसानी हैं। इस बात की पुष्टि उन लोगों ने की है, जिनके पास इसके बारे में पूरी जानकारी और अनुभव है।

अमेरिकी सरकार छिपा रही है सबूत

बता दें, डेविड ग्रुश ने अमेरिकी रक्षा विभाग की एक एजेंसी में काम किया है। उन्होंने अंतरिक्ष और धरती के बीच कनेक्शन और घटनाओं के विश्लेषण का नेतृत्व किया था। ग्रुश ने बीते महीने आरोप लगाया था कि अमेरिकी सरकार दूसरी दुनिया से आए लोगों के सबूत छिपा रही है।

खुद नहीं देखे हैं एलियन्स के शरीर

ग्रुश के दावों में कितनी सच्चाई है, यह तो पता नहीं। हालांकि, उन्होंने कहा, हे कि सरकार द्वारा गैर इंसानी बायोलॉजिक्स बरामद किए गए थे, लेकिन ग्रुश ने यह भी कहा कि उन्होंने खुद कोई एलियन के शरीर और एयरक्राफ्ट को नहीं देखा है। उन्होंने कहा, उनके दावे कुछ उच्च स्तरीय खुफिया अधिकारियों के साथ बातचीत पर आधारित हैं।

अमेरिकी सरकार ने खारिज किया दावा

वहीं इस मामले में अमेरिकी सरकार ने ग्रुश के दावों का खंडन किया है। रक्षा विभाग के प्रवक्ता ने कहा है कि जांचकर्ताओं को दावों की पुष्टि करने के लिए कोई ठोस जानकारी नहीं मिली है।

प्रांजुल श्रीवास्तव
प्रांजुल श्रीवास्तवauthor

<p>मैं इस वक्त टाइम्स नाउ नवभारत से जुड़ा हुआ हूं। पत्रकारिता के 8 वर्षों के तजुर्बे में मुझे और मेरी भाषाई समझ को गढ़ने और तराशने में कई वरिष्ठ पत्रकारों और संपादकों का योगदान रहा। 2016 में उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ से शुरू हुआ यह सफर देश की राजधानी दिल्ली में 'टाइम्स नाउ नवभारत' तक आ पहुंचा है। अखबारों में रिपोर्टिंग करते हुए शहरों की धूल फांकना और डिजिटल पत्रकारिता की बारीकियों को समझते हुए देश-विदेश की खबरों को आप तक पहुंचाने का मेरा ये सफर काफी किस्से-कहानियों से भरा हुआ है। लखनऊ की बाबा भीम राव अंबेडकर सेंट्रल यूनिवर्सिटी के क्लासरूम में प्रोफेसरों से मिले किताबी ज्ञान और पत्रकारीय सिद्धांतों को जमीन पर उतारने का मौका मुझे 2016 में ही मिल गया। पहला ब्रेक टाइम्स ग्रुप के प्रतिष्ठित अखबार 'नवभारत टाइम्स' ने दिया। यहां बतौर इंटर्न मुझे कई सामाजिक संगठनों की रिपोर्टिंग करने का मौका मिला। दिनभर शहर में घूम-घूम कर खबरों को बटोरना और शाम होते ही उन्हें लिखकर डेस्क के हवाले करना मेरी दिनचर्या का हिस्सा हो गया। इस अनुभव ने मुझे समाज के तौर तरीकों से परिचित कराया तो न्यूजरूम में सीनियर्स से मिली डांट ने पत्रकारिता की बारीकियों और भाषाई मर्यादा को समझने में मदद की। करीब 3 से 4 महीनों की इंटर्नशिप के बाद मुझे 2017 आते-आते गांधी परिवार के गढ़ रायबरेली भेजा गया। यह समय उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव और सत्ता के बदलाव का था। यहां बतौर रिपोर्टर मैं पहली बार राजनीतिक खबरों से रूबरू हुआ। रायबरेली के मिजाज को करीब 8 महीनों तक समझने के बाद नवभारत टाइम्स ने मुझे वापस लखनऊ बुलाया और शहर की रिपोर्टिंग करने का मौका दिया। यहां विज्ञान, पर्यावरण, बाजार, लखनऊ विकास प्राधिकरण, आवास विकास और मेट्रो जैसी बीट पर जमकर काम किया। यह सफर अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के जिले मुरादाबाद तक पहुंच गया था, जहां मुझे दैनिक जागरण जैसे प्रतिष्ठित अखबार के लिए दो वर्षों तक रिपोर्टिंग करने का अवसर मिला। करीब दो वर्षों की पत्रकारिता के बाद अब मुझे देश की राजधानी की ओर रुख करना था और यह मौका अमर उजाला (डिजिटल) ने दिया। अखबारों की रिपोर्टिंग से निकलकर डिजिटल पत्रकारिता के अनुभव से मैं पहली बार रूबरू हो रहा था। यहां पर मुझे मेन डेस्क पर जिम्मेदारी मिली। जहां सबसे आगे रहते हुए सबसे सटीक खबरें आप तक पहुंचाना चुनौती भरा काम था, लेकिन पत्रकारिता की शुरुआत में मिले अनुभवों ने मेरा काम आसान बना दिया। यहां भी करीब दो वर्षों के बाद 2023 में मुझे टाइम्स ग्रुप से दोबारा जुड़ने का मौका मिला और टाइम्स नाउ नवभारत की मेन डेस्क पर मेरा सफर अब तक जारी है।</p>

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