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न कंगारू, न चूहा… फिर क्या है ये? 6000 साल पुराना अजीब जीव मिला, देखकर चौंके लोग

Extinct marsupial found alive: वैज्ञानिकों की एक टीम ने पापुआ इंडोनेशिया के दूरस्थ वर्षावनों में दो ऐसी मार्सुपियल प्रजातियों को खोजा है, जिन्हें करीब 6,000 साल से विलुप्त माना जा रहा था। शोधकर्ताओं को इन प्रजातियों के सबूत पुराने नमूनों, दुर्लभ तस्वीरों और जीवाश्मों के अध्ययन से मिले। इस खोज में स्थानीय लोगों की जानकारी भी काफी मददगार साबित हुई।

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न कंगारू, न चूहा… फिर क्या है ये? (फोटो: प्रतीकात्मक/iStock)

Wildlife discovery Papua Indonesia: हाल ही में वैज्ञानिकों ने एक ऐसी खोज की है, जिसने पूरी दुनिया के शोधकर्ताओं को हैरान कर दिया है। जिन जानवरों को करीब 6,000 साल पहले विलुप्त माना जा रहा था, वे अब फिर से जीवित पाए गए हैं। यह चौंकाने वाली खोज इंडोनेशिया के पापुआ क्षेत्र के घने और दूर-दराज के जंगलों में हुई है। इस बारे में जानकारी वैज्ञानिकों की एक टीम ने दी है, जिसकी रिपोर्ट Records of the Australian Museum में प्रकाशित हुई है। इस शोध का नेतृत्व मशहूर वैज्ञानिक Tim Flannery और Christopher Helgen ने किया। उनकी टीम ने बताया कि दो मार्सुपियल प्रजातियां, जिन्हें लंबे समय से खत्म माना जा रहा था, वास्तव में अभी भी जंगलों में मौजूद हैं।

साल 1992 में भी मिला था इन जानवरों का एक नमूना

इन प्रजातियों में Pygmy Long‑fingered Possum और Ring‑tailed Glider शामिल हैं। एक अंग्रेजी वेबसाइट के मुताबिक वैज्ञानिक इन प्रजातियों को “लाजर टैक्सा” कहते हैं। इसका मतलब उन जीवों से है जिन्हें लोग विलुप्त मान चुके होते हैं, लेकिन बाद में वे फिर से जीवित पाए जाते हैं। इस खोज तक पहुंचने के लिए वैज्ञानिकों ने कई तरह के सबूतों का सहारा लिया। इसमें पुराने नमूने, दुर्लभ तस्वीरें और जीवाश्म के छोटे-छोटे टुकड़े शामिल थे। दिलचस्प बात यह है कि इन जानवरों का एक नमूना साल 1992 में मिला था, जिसे उस समय सही तरीके से पहचाना नहीं जा सका।

प्राकृतिक क्षेत्रों को बचाना बेहद जरूरी-वैज्ञानिक

बाद में जब वैज्ञानिकों ने नए सबूतों के साथ उस नमूने का अध्ययन किया, तो पता चला कि वह उसी दुर्लभ प्रजाति का था जिसे विलुप्त समझ लिया गया था। इस खोज में स्थानीय लोगों का योगदान भी बहुत महत्वपूर्ण रहा। पापुआ क्षेत्र के कुछ आदिवासी समुदायों के बुजुर्गों ने वैज्ञानिकों को इन जंगलों और वहां रहने वाले जानवरों के बारे में अहम जानकारी दी। उनकी मदद से शोधकर्ताओं को सही इलाके तक पहुंचने और इन जीवों के बारे में बेहतर समझ हासिल करने में मदद मिली।

वैज्ञानिकों का कहना है कि यह खोज हमें यह भी याद दिलाती है कि दुनिया के कई दूर-दराज के जंगलों में अभी भी ऐसी जैव विविधता छिपी हो सकती है, जिसके बारे में हमें ज्यादा जानकारी नहीं है। इसलिए इन प्राकृतिक क्षेत्रों को बचाना बेहद जरूरी है। अगर जंगल सुरक्षित रहेंगे, तो ऐसे दुर्लभ जीव भी भविष्य में जीवित रह सकेंगे।

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मोनू झाauthor

मोनू कुमार टाइम्स नाउ नवभारत की डिजिटल टीम में वायरल और ट्रेंडिंग डेस्क पर काम कर रहे हैं। न्यूजरूम में 4 साल से अधिक का अनुभव रखने वाले मोनू वायरल कंटेंट, ऑफबीट खबरों और सोशल मीडिया ट्रेंड्स को पहचानने में बेहद दक्ष हैं। यूनीक एंगल तलाशने और कहानियों को आकर्षक अंदाज में प्रस्तुत करने की उनकी क्षमता उन्हें डिजिटल कंटेंट स्पेस में अलग पहचान देती है। मोनू कुमार 4,000 से अधिक स्टोरीज लिख चुके हैं, जिनमें कई वायरल रिपोर्ट्स, ट्रेंड-बेस्ड अपडेट्स और सोशल मीडिया-फोकस्ड कंटेंट शामिल हैं।

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