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Ajab Gajab: इस देश में आलू-प्याज की तरह होती है मगरमच्छ की खेती, वजह जानकर सोच में पड़ जाएंगे आप

Crocodile Farming: क्या आपने कभी सुना है कि किसी देश में मगरमच्छ की खेती होती है या मगरमच्छ का पालन किया जाता है। आपको जानकर हैरानी होगी कि इस देश में मगरमच्छ पालन के लिए मुर्गी फॉर्म की तरह बड़े पैमाने पर फार्म हाउस बनाए गए हैं।

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मगरमच्छ की खेती (Istock)

Crocodile Farming: आपने सब्जियों, फलों और अनाज की खेती के बारे में खूब सुना होगा। भारत में गांवों में आलू-टमाटर-प्याज आदि सब्जियों की खेती होती है। वहीं गेहूं, चावल, बाजरा जैसे अनाजों की भी खेती होती है। सब्जियों, फलों और अनाजों की खेती के अलावा किसान जानवरों का पशुपालन भी जमकर करते हैं। भारत में ज्यादातर किसान गाय, भैंस, बकरी आदि जानवरों को ही पालते हैं। हालांकि, कुछ किसान पोल्ट्री फार्म में मुर्गियों को, तालाब में मछलियों आदि को भी पालते हैं।

थाईलैंड में पाले जाते हैं मगरमच्छ

दूसरी तरफ आज हम आपको दुनिया के एक ऐसे देश के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां मगरमच्छ की खेती की जाती है। इस देश का नाम जानकर आप सोच में पड़ जाएंगे। क्या आपने कभी सुना है कि किसी देश में मगरमच्छ की खेती होती है या मगरमच्छ का पालन किया जाता है। आपको जानकर हैरानी होगी कि इस देश में मगरमच्छ पालन के लिए मुर्गी फॉर्म की तरह बड़े पैमाने पर फार्म हाउस बनाए गए हैं। हम जिस देश की बात कर रहे हैं, उसका नाम थाईलैंड है।

बड़े पैमाने पर मगरमच्छों के स्लॉटर हाउस

आपको बता दें कि थाईलैंड में बड़ी संख्या में मगरमच्छों का पालन होता है। थाई फिशरीज डिपार्टमेंट की मानें तो थाईलैंड में मगरमच्छों के 1000 से ज्यादा फार्म हाउस हैं। इन फॉर्म हाउस में तकरीबन 12 लाख मगरमच्छों को रखा जाता है। अब आप सोच रहे होंगे कि इन मगरमच्छों का क्या किया जाता होगा। बता दें कि थाईलैंड में बड़ी संख्या में मगरमच्छों के स्लॉटर हाउस हैं। यहां मगरमच्छों को कीमती स्किन, मीट और खून के लिए काटा जाता है। जिन्हें काफी महंगे दामों पर बेचा जाता है।

Aditya Sahu
आदित्य साहूauthor

आदित्य साहू टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में स्पोर्ट्स और ट्रेडिंग कंटेंट लिखतें हैं। जर्नलिज्म में मास्टर्स की डिग्री हासिल करने के बाद वह पिछले 10 सालों से मीडिया में सक्रिय हैं। स्पोर्ट्स इवेंट की रियल टाइम कवरेज, डाटा टॉपिक्स और अनोखे कंटेंट आइडियाज को आकर्षक और एंगेजिंग तरीके से प्रस्तुत करना आदित्य की खासियत है। उनकी कॉपी राइटिंग और इंटरेस्टिंग हेडलाइन बनाने की क्षमता उन्हें डिजिटल दुनिया में अलग पहचान देती है। 15,000 से अधिक बायलाइन स्टोरी पब्लिश कर चुके आदित्य का लक्ष्य हर खबर को यूनिक एंगल और स्टोरीटेलिंग के रोचक अंदाज में पेश करना है।

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