Offline Aadhaar Verification : भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने देश भर में पहचान सत्यापन प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित, आसान और सुगम बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। यूआईडीएआई ने आधार के ऑफलाइन सत्यापन की सुविधा को विस्तार देते हुए करीब 300 विभिन्न संस्थाओं को अपने नेटवर्क में शामिल किया है। प्राधिकरण के इस महत्वपूर्ण कदम से विभिन्न सेवाओं का लाभ लेते समय पहचान पत्र के रूप में आधार कार्ड की भौतिक फोटोकॉपी या प्रिंटेड प्रतियां जमा करने की मजबूरी और झंझट से आम लोगों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
जनवरी से शुरू हुई थी व्यवस्था, इन प्रमुख क्षेत्रों को मिलेगा लाभ
न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक यूआईडीएआई द्वारा जारी एक आधिकारिक बयान के अनुसार, चालू वर्ष के जनवरी महीने में इस विशेष ऑफलाइन सुविधा की शुरुआत की गई थी। तब से लेकर अब तक कुल 300 'ऑफलाइन सत्यापन चाहने वाली संस्थाओं' (Offline Verification Seeking Entities- OVSE) को इस नई प्रणाली से सफलतापूर्वक जोड़ा जा चुका है।
प्राधिकरण का यह कदम देश के कई प्रमुख सेवा क्षेत्रों में आधार आधारित डिजिटल और कागजरहित (Paperless) सत्यापन को बढ़ावा देने में अत्यंत कारगर साबित होगा। इस पहल से मुख्य रूप से होटल एवं आतिथ्य उद्योग, स्वास्थ्य सेवा , शिक्षा संस्थान, इवेंट मैनेजमेंट, तेजी से उभरती गिग अर्थव्यवस्था और दैनिक उपभोक्ता सेवाओं से जुड़े क्षेत्रों को सीधा लाभ पहुंचेगा।
आधार की फोटो कॉपी रखना कानूनी रूप से अनुचित
प्राधिकरण ने अपने बयान में एक महत्वपूर्ण कानूनी पहलू पर ध्यान आकर्षित करते हुए स्पष्ट किया है कि वर्तमान में देश में कई निजी और सरकारी संस्थाएं ग्राहक के सत्यापन के बाद आधार कार्ड की फोटोकॉपी को अपने भौतिक रिकॉर्ड में रख लेती हैं। यूआईडीएआई ने साफ तौर पर कहा कि आधार अधिनियम के मौजूदा नियमों के तहत किसी भी संस्था द्वारा आधार कार्ड की छायाप्रति को अपने रिकॉर्ड में संभाल कर रखना कानूनी रूप से अनुमत नहीं है। इस पुरानी और असुरक्षित परिपाटी को समाप्त करने के उद्देश्य से ही यूआईडीएआई ऑफलाइन सत्यापन के इस आधुनिक विकल्प को बढ़ावा दे रहा है।
निजता की सुरक्षा और डीपीडीपी (DPDP) अधिनियम के अनुरूप ढांचा
यूआईडीएआई के अनुसार, ऑफलाइन सत्यापन की यह नई व्यवस्था पूरी तरह से सुरक्षित, उपयोगकर्ता की स्पष्ट सहमति पर आधारित और पूरी तरह से कागजरहित पहचान सत्यापन को प्रोत्साहित करती है। इससे सेवा प्रदान करने वाली कंपनियों और आम आधार धारकों, दोनों को ही काम में पारदर्शिता और समय की बचत का अनुभव होगा। प्राधिकरण ने यह भी रेखांकित किया है कि इतनी बड़ी संख्या में संस्थाओं का इस प्रणाली से जुड़ना, निजता (Privacy) को प्राथमिकता देने वाले डिजिटल तंत्र में आम जनता और उद्योग जगत के बढ़ते भरोसे को दर्शाता है। यह पूरी प्रक्रिया यूजर्स को अपने निजी आंकड़ों पर पूर्ण नियंत्रण प्रदान करती है और 'न्यूनतम आंकड़े साझा करने' के सिद्धांत पर काम करती है। साथ ही, यह पूरी प्रणाली देश के डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण (Digital Personal Data Protection - DPDP) अधिनियम के सख्त प्रावधानों के बिल्कुल अनुकूल है।
