PNG vs LPG: भारत के कई शहरों में अब घरों की रसोई तक पाइपलाइन के जरिए गैस पहुंचाई जा रही है, जिसे PNG (Piped Natural Gas) कहा जाता है। यह गैस सीधे पाइपलाइन के जरिए घर की रसोई तक आती है, इसलिए अब कई लोग पारंपरिक एलपीजी सिलेंडर की जगह PNG का इस्तेमाल करने पर विचार कर रहे हैं। हालांकि, पीएनजी के कुछ फायदे हैं तो कुछ सीमाएं भी हैं। अगर आप भी एलपीजी सिलेंडर की मौजूदा स्थिति को देखते हुए पाइपलाइन गैस पर स्विच करने का प्लान बना रहे हैं तो आपको पीएनजी के लाभ के साथ इसकी सीमाएं भी पता होनी चाहिए-
पीएनजी के फायदे
सिलेंडर की जरूरत नहीं पड़ती
PNG का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसमें गैस पाइपलाइन से सीधे घर तक आती है। इससे सिलेंडर खत्म होने या उसे बदलवाने की परेशानी नहीं होती। खासकर मौजूदा समय में जो लोग अभी पीएनजी का इस्तेमाल कर रहे हैं उनके लिए एलपीजी सिलेंडर से जुड़ी चिंता एक बड़ी परेशानी नहीं है।
ज्यादा सुरक्षित मानी जाती है
PNG प्राकृतिक गैस होती है और यह हवा से हल्की होती है। अगर किसी कारण से गैस लीक हो जाए तो यह जल्दी हवा में मिलकर फैल जाती है, जिससे दुर्घटना का खतरा कम होता है
इस्तेमाल के अनुसार बिल
PNG में आपको उतनी ही गैस का भुगतान करना पड़ता है जितनी आप इस्तेमाल करते हैं। यानी सिलेंडर की तरह एक बार में पूरी रकम देने की जरूरत नहीं होती। इसका मंथली बिल आता है।
लगातार गैस सप्लाई
PNG कनेक्शन होने पर गैस खत्म होने की चिंता नहीं रहती, क्योंकि सप्लाई लगातार बनी रहती है। यह परेशानी एलपीजी सिलेंडर के साथ ही आती है कि सिलेंडर कब खत्म हो जाए कुछ पता नहीं लगता।
पीएनजी के कुछ फायदे हैं तो इसकी कुछ सीमाएं भी हैं-
PNG के नुकसान
हर शहर में उपलब्ध नहीं
PNG की सबसे बड़ी सीमा यह है कि अभी यह सुविधा सभी शहरों में उपलब्ध नहीं है। ज्यादातर बड़े शहरों और चुनिंदा इलाकों में ही पाइपलाइन गैस की सुविधा मिलती है।
शुरुआती इंस्टॉलेशन खर्च
PNG कनेक्शन लगवाने के लिए शुरुआत में कुछ इंस्टॉलेशन चार्ज देना पड़ सकता है, जो कई जगह हजारों रुपए तक हो सकता है।
पाइपलाइन पर निर्भरता
अगर किसी कारण से पाइपलाइन में समस्या आती है या मेंटेनेंस का काम होता है, तो कुछ समय के लिए गैस सप्लाई प्रभावित हो सकती है।
एलपीजी की जगह पीएनजी का इस्तेमाल
अगर आपके शहर या इलाके में PNG की सुविधा उपलब्ध है, तो यह किचन के लिए एक सुविधाजनक और सुरक्षित विकल्प माना जाता है। इससे सिलेंडर की झंझट खत्म हो जाती है और गैस का बिल भी इस्तेमाल के अनुसार आता है। हालांकि जिन जगहों पर अभी PNG उपलब्ध नहीं है, वहां एलपीजी सिलेंडर ही सबसे सामान्य और व्यावहारिक विकल्प बना हुआ है।
