प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने रेडियो कार्यक्रम मन की बात (Mann Ki Baat) में कहा कि भारत ने पवन ऊर्जा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। देश की पवन ऊर्जा उत्पादन क्षमता अब 56 गीगावाट से अधिक हो चुकी है। उन्होंने बताया कि पिछले एक साल में ही करीब 6 गीगावाट नई क्षमता जोड़ी गई है, जो इस सेक्टर में तेज़ प्रगति को दर्शाता है।
स्वच्छ ऊर्जा अपनाने पर जोर
PTI/भाषा के मुताबिक प्रधानमंत्री ने नागरिकों से बिजली की बचत करने और स्वच्छ ऊर्जा को अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि सौर और पवन ऊर्जा सिर्फ पर्यावरण संरक्षण का मुद्दा नहीं है, बल्कि यह देश के भविष्य को सुरक्षित करने का भी माध्यम है। इस दिशा में हर नागरिक की भूमिका महत्वपूर्ण है।
रिकॉर्ड वृद्धि और वैश्विक रैंकिंग
केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी के अनुसार, 2025-26 में भारत ने पवन ऊर्जा क्षमता वृद्धि में अपना अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया, जिसमें 6.1 गीगावाट की ऐतिहासिक बढ़ोतरी दर्ज की गई। वर्तमान में भारत पवन ऊर्जा के क्षेत्र में दुनिया में चौथे स्थान पर है और इसकी स्थापित क्षमता 56.1 गीगावाट से अधिक है। इसके अलावा, लगभग 28 गीगावाट की परियोजनाएं निर्माणाधीन हैं।
अपार संभावनाएं और भविष्य के लक्ष्य
सरकार का मानना है कि भारत में पवन ऊर्जा की अपार संभावनाएं अभी भी मौजूद हैं। 150 मीटर हब ऊंचाई पर देश की संभावित क्षमता लगभग 1,164 गीगावाट आंकी गई है। लक्ष्य रखा गया है कि 2030 तक 100 गीगावाट और 2036 तक 156 गीगावाट पवन ऊर्जा क्षमता हासिल की जाए।
‘नेट-जीरो’ लक्ष्य की दिशा में अहम कदम
पवन ऊर्जा को भारत के नेट जीरो लक्ष्य हासिल करने में अहम माना जा रहा है। ‘नेट-जीरो’ का मतलब है कि देश जितना कार्बन उत्सर्जन करता है, उतना ही उसे खत्म करने की व्यवस्था भी करे। पवन ऊर्जा खासतौर पर शाम और रात के समय बिजली उत्पादन में मदद करती है, जिससे ऊर्जा प्रणाली को स्थिरता मिलती है।
