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इनवर्टर की बैटरी और वायरिंग को बारिश की सीलन से कैसे बचाएं? जानें बेस्ट तरीके

बारिश के मौसम में अक्सर नवर्टर की बैटरी और वायरिंग में सीलन की समस्या आती है लेकिन कुछ सावधानी बरतकर आप इससे बच सकते हैं। आइए जानते हैं...

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इनवर्टर की बैटरी और वायरिंग को बारिश की सीलन से कैसे बचाएं?

मानसून का मौसम जहां गर्मी से राहत देता है, वहीं घरों में लगे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के लिए कई चुनौतियां भी लेकर आता है। लगातार बारिश और बढ़ी हुई नमी (सीलन) का असर इनवर्टर की बैटरी, वायरिंग और इलेक्ट्रिकल कनेक्शन पर भी पड़ता है। अगर समय रहते सावधानी न बरती जाए तो बैटरी की क्षमता कम हो सकती है, वायरिंग में जंग लग सकती है और शॉर्ट सर्किट जैसी समस्याएं भी पैदा हो सकती हैं। ऐसे में कुछ आसान उपाय अपनाकर इनवर्टर को सुरक्षित रखा जा सकता है।

सूखी और हवादार जगह पर रखें इनवर्टर

जानकारों के अनुसार, इनवर्टर और बैटरी को हमेशा ऐसी जगह पर रखना चाहिए जहां सीधी बारिश का पानी या अत्यधिक नमी न पहुंचे। कमरे में पर्याप्त वेंटिलेशन होना भी जरूरी है, ताकि बैटरी के आसपास नमी जमा न हो और गैस आसानी से बाहर निकल सके।

बैटरी टर्मिनल पर न बनने दें जंग

बारिश के मौसम में बैटरी के टर्मिनल पर नमी के कारण जंग लगने की संभावना बढ़ जाती है। समय-समय पर टर्मिनल की जांच करें और यदि सफेद या हरे रंग की परत दिखाई दे तो उसे साफ करें। सफाई के बाद टर्मिनल पर पेट्रोलियम जेली या उपयुक्त एंटी-कोरोजन ग्रीस लगाने से जंग बनने की संभावना कम हो जाती है।

वायरिंग और कनेक्शन की नियमित जांच करें

इनवर्टर की सभी वायरिंग और कनेक्शन अच्छी तरह से टाइट होने चाहिए। यदि किसी तार की इंसुलेशन खराब हो गई है या उसमें कट लगा है, तो उसे तुरंत बदल दें। ढीले कनेक्शन न केवल बिजली की बर्बादी करते हैं बल्कि स्पार्किंग और शॉर्ट सर्किट का खतरा भी बढ़ा सकते हैं।

बैटरी के ऊपर पानी या नमी न जमने दें

इनवर्टर की बैटरी के ऊपर धूल और नमी जमा होने से उसकी कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है। बैटरी को समय-समय पर सूखे और साफ कपड़े से पोंछते रहें। ध्यान रखें कि बैटरी की सफाई के दौरान किसी भी प्रकार का पानी या गीला कपड़ा सीधे इलेक्ट्रिकल हिस्सों पर न लगाएं।

ओवरलोडिंग से बचें

बारिश के दौरान अक्सर लंबे समय तक बिजली कटौती होती है, जिससे इनवर्टर पर अधिक लोड पड़ता है। जरूरत से ज्यादा उपकरण एक साथ चलाने से बैटरी जल्दी डिस्चार्ज होती है और उसकी लाइफ भी कम हो सकती है। इसलिए इनवर्टर पर केवल आवश्यक उपकरणों का ही इस्तेमाल करें।

बैटरी का पानी समय पर जांचें

यदि आपके पास पारंपरिक लेड-एसिड बैटरी है, तो उसका इलेक्ट्रोलाइट (डिस्टिल्ड वाटर) स्तर नियमित रूप से जांचें। जरूरत पड़ने पर केवल डिस्टिल्ड वाटर ही डालें। सामान्य नल का पानी इस्तेमाल करने से बैटरी की परफॉर्मेंस प्रभावित हो सकती है।

इनवर्टर को दीवार से थोड़ा दूर रखें

इनवर्टर और बैटरी को दीवार से कुछ दूरी पर रखने से हवा का बेहतर प्रवाह बना रहता है। इससे नमी कम जमा होती है और बैटरी के गर्म होने की संभावना भी घट जाती है।

समय-समय पर सर्विस कराना भी जरूरी

यदि इनवर्टर पुराना हो चुका है या लंबे समय से उसकी सर्विस नहीं हुई है, तो मानसून शुरू होने से पहले किसी अधिकृत तकनीशियन से उसकी जांच करवा लेना बेहतर रहेगा। इससे छोटी-छोटी खराबियां समय रहते ठीक हो जाती हैं और बड़े नुकसान से बचा जा सकता है।

Pradeep Pandey
प्रदीप पाण्डेयauthor

प्रदीप पाण्डेय टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में टेक और ऑटो बीट पर कंटेंट तैयार करते हैं। डिजिटल मीडिया में 10 वर्षों के अनुभव के साथ प्रदीप तकनीक की दुनिया को समझने और उसे आम पाठकों तक सरल व उपयोगी रूप में पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। प्रदीप अब तक 11,000 से अधिक आर्टिकल्स लिख चुके हैं। वह गैजेट रिव्यू, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, टेक टिप्स और नवीनतम टेक इनोवेशन पर लगातार काम करते हैं। एआई टूल्स पर एक्सपेरिमेंट करना, नए ऐप्स टेस्ट करना और टेक से जुड़े प्रैक्टिकल सॉल्यूशंस खोजने में उनकी खास रुचि है।

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