30% सस्ते हो सकते हैं इन बसों के टिकट- बोले केंद्रीय मंत्री, जानें- परिवहन ढांचे में किस ओर दिया जोर

e-Buses in India: उन्होंने इसके साथ ही देश के सार्वजनिक परिवहन ढांचे में डीजल ईंधन का इस्तेमाल घटाने पर जोर दिया है। 

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तस्वीर का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है।  |  तस्वीर साभार: IANS
मुख्य बातें
  • कार्यक्रम में गडकरी ने MP में 2,300 करोड़ रुपए की लागत वाली 5 सड़क परियोजनाओं की नींव रखी
  • इन प्रोजेक्ट्स से महाराष्ट्र-दक्षिण के सूबों से MP के सड़क संपर्क में सुधार होगा, रोजगार-निवेश के मौके भी बढ़ेंगे
  • 2014 के बाद से अब तक मंत्रालय MP के लिए 2.5 लाख करोड़ की परियोजनाएं स्वीकृत कर चुका

केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने संभावना जताई है कि बिजली से चलने वाली बसों के यात्री टिकट डीजल चालित बसों के मुकाबले 30 प्रतिशत सस्ते हो सकते हैं। 

ये बातें उन्होंने सोमवार (एक अगस्त, 2022) को मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में एक कार्यक्रम के दौरान कहीं। वह बोले- देशभर के राज्यों के सड़क परिवहन निगम कभी फायदे में नहीं आ सकते क्योंकि इनकी बसें महंगे डीजल से चलती हैं। उनके मुताबिक,‘‘मैं पूरी जिम्मेदारी के साथ बोल रहा हूं कि बिजली से चलने वाली वातानुकूलित बस के यात्री टिकट डीजल से चलने वाली बस के मुकाबले 30 प्रतिशत तक आसानी से सस्ते हो सकते हैं।’’

किस योजना पर आगे बढ़ रहा केंद्र?
गडकरी ने आगे बताया कि केंद्र सरकार पूरे देश में 50,000 बिजली चालित बसें चलाने की योजना पर आगे बढ़ रही है। उन्होंने इसके साथ ही देश के सार्वजनिक परिवहन ढांचे में डीजल ईंधन का इस्तेमाल घटाने पर जोर दिया है। 

बोले- इन ईंधनों के यूज को मिले बढ़ावा
बकौल मंत्री, ‘‘हमें देश के परिवहन तंत्र को दूरदर्शी सोच के साथ बदलने की जरूरत है। गाड़ियों में पेट्रोल-डीजल के बजाय बिजली, ग्रीन हाइड्रोजन, एथनॉल, बायो-सीएनजी और बायो-एलएनजी सरीखे सस्ते ईंधनों के इस्तेमाल को ज्यादा से ज्यादा बढ़ावा दिया जाना चाहिए।’’

'50 साल आगे का सोचें नेता'
गडकरी ने यह भी कहा कि बुनियादी ढांचा क्षेत्र के निर्माण कार्यों की लागत अत्याधुनिक तकनीक की मदद से कम करनी बहुत जरूरी है, ‘‘लेकिन पूरे सरकारी तंत्र को इसकी आदत ही नहीं है।’’ उन्होंने कहा,‘‘राजनेताओं को 50 साल आगे का सोचना चाहिए क्योंकि कई सरकारी अधिकारी महज पैच वर्क (किसी समस्या को तात्कालिक तौर पर सुलझाना) करते हैं। वे केवल आज के काम के बारे में सोचते हैं क्योंकि उन्हें लगता है कि आने वाले दिनों में उनका तबादला हो जाएगा।’’ (भाषा इनपुट्स के साथ) 

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