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आधार फेस ऑथेंटिकेशन से मिला नया मुकाब, महज 6 महीनों में दोगुना हुए लेनदेन

छह महीने से भी कम समय में 100 करोड़ से 200 करोड़ लेनदेन तक का सफर इसकी मापनीयता और देश की डिजिटल रेडीनेस का प्रमाण है।" मंत्रालय ने कहा, "यह उपलब्धि केवल संख्याओं को लेकर नहीं है, यह इस बात का प्रमाण है कि कैसे समावेशी तकनीक, जब कुशलतापूर्वक उपयोग की जाती है, तो विभाजन को पाट सकती है, नागरिकों को सशक्त बना सकती है और वास्तव में आत्मविश्वास से भरे डिजिटल भविष्य की ओर भारत की यात्रा को गति दे सकती है।"

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ऑनलाइन लेनदेन (फोटो-istock)

केंद्र सरकार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, आधार-आधारित फेस ऑथेंटिकेशन ने एक नया मानक स्थापित करते हुए मात्र 6 महीनों में दोगुना, 100 करोड़ से 200 करोड़ लेनदेन दर्ज किए हैं। आधार फेस ऑथेंटिकेशन से आधार धारक अपनी पहचान तुरंत, सुरक्षित और संपर्क रहित तरीके से, कभी भी, कहीं भी, बिना किसी दस्तावेज के सत्यापित कर सकते हैं।

इलेक्ट्रानिक्स एवं आईटी मंत्रालय के अनुसार, 10 अगस्त, 2025 को यूआईडीएआई ने फेस ऑथेंटिकेशन के 200 करोड़ ट्रांजैक्शन का ऐतिहासिक जश्न मनाया, जो भारत के निर्बाध, सुरक्षित और कागज रहित प्रमाणीकरण की ओर तेजी से बढ़ते कदम को दर्शाता है। आधार से पहचान साबित करने की प्रक्रिया अपनाने की गति तेजी से बढ़ रही है। जहां 2024 की छमाही तक 50 करोड़ लेनदेन दर्ज किए गए थे वहीं, लगभग पांच महीनों में जनवरी 2025 में यह संख्या दोगुनी होकर 100 करोड़ लेनदेन हो गई।

मंत्रालय ने बताया कि छह महीने से भी कम समय में, यह आंकड़ा फिर से दोगुना होकर 200 करोड़ के मील के पत्थर तक पहुंच गया है। यूआईडीएआई के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) भुवनेश कुमार ने कहा, "इतने कम समय में 200 करोड़ आधार फेस ऑथेंटिकेशन लेनदेन तक पहुंचना, निवासियों और सेवा प्रदाताओं, दोनों के आधार के सुरक्षित, समावेशी और इनोवेटिव ऑथेंटिकेशन इकोसिस्टम में विश्वास और भरोसे को दर्शाता है।"

छह महीने से भी कम समय में 100 करोड़ से 200 करोड़ लेनदेन तक का सफर इसकी मापनीयता और देश की डिजिटल रेडीनेस का प्रमाण है।" उन्होंने आगे कहा, "गांवों से लेकर महानगरों तक, यूआईडीएआई सरकारों, बैंकों और सेवा प्रदाताओं के साथ मिलकर आधार फेस ऑथेंटिकेशन को एक बड़ी सफलता बनाने और प्रत्येक भारतीय को अपनी पहचान तुरंत, सुरक्षित और कहीं भी साबित करने की शक्ति प्रदान करने के लिए काम कर रहा है।"

मंत्रालय ने कहा, "यह उपलब्धि केवल संख्याओं को लेकर नहीं है, यह इस बात का प्रमाण है कि कैसे समावेशी तकनीक, जब कुशलतापूर्वक उपयोग की जाती है, तो विभाजन को पाट सकती है, नागरिकों को सशक्त बना सकती है और वास्तव में आत्मविश्वास से भरे डिजिटल भविष्य की ओर भारत की यात्रा को गति दे सकती है।"

इनपुट-आईएएनएस

Vishal Maithil
Vishal Mathelauthor

विशाल मैथिल टाइम्स नाऊ नवभारत में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर 2023 से जुड़े हुए हैं। पत्रकारिता में 6+ वर्षों के अनुभव के साथ वह टेक्नोलॉजी, सोशल मीडिया, गैजेट्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे विषयों पर गहरी समझ रखते हैं। वे ऑटोमोबाइल, बिजनेस, यूटिलिटी और हाइपरलोकल से लेकर एजुकेशन और इंटरनेशनल बीट्स पर भी काम कर चुके हैं। भोपाल से ताल्लुक रखने वाले विशाल ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय से मीडिया रिसर्च में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है। रिसर्च के क्षेत्र में उनके कई पेपर राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित हो चुके हैं। उन्होंने दैनिक भास्कर, अमर उजाला, मासिक पत्रिका "संदेश" और सोशल मीडिया फर्म में भी काम किया है। टेक-यूटिलिटी और बिजनेस से जुड़ी खबरों को आसान और काम की भाषा में समझाना विशाल को खूब आता है। वो कोशिश करते हैं कि कम शब्दों में ज्यादा और साफ-सुथरी जानकारी मिल जाए। किताबें पढ़ना और संगीत सुनना उनका पसंदीदा काम है। आप इनसे Vishal.mathel@timesgroup.com पर संपर्क कर सकते हैं।

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