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1 टन गन्ने से कितना इथेनॉल बनता है? समझिए पूरा गणित

पिछले दो साल से हम अक्सर इथेनॉल वाले पेट्रोल की बात सुन रहे हैं। यह भी सुन रहे हैं कि गन्ने से इथेनॉल बनाया जाता है लेकिन एक सवाल है कि 1 टन से कितना लीटर इथेनॉल बनता है।

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1 टन गन्ने से कितना इथेनॉल बनता है? समझिए पूरा गणित/Photo-Canva

देश में पेट्रोल के साथ इथेनॉल ब्लेंडिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है, जिससे कच्चे तेल पर निर्भरता कम हो और किसानों की आय बढ़े। सरकार का लक्ष्य 20% इथेनॉल ब्लेंडिंग हासिल करना है। ऐसे में यह सवाल महत्वपूर्ण हो जाता है कि आखिर 1 टन गन्ने से कितना इथेनॉल तैयार किया जा सकता है।

गन्ने से इथेनॉल बनाने की प्रक्रिया

गन्ने से सीधे इथेनॉल नहीं बनता, बल्कि पहले उससे रस निकाला जाता है या चीनी मिलों में उसे प्रोसेस कर के मोलासेस (शीरा) बनाया जाता है। यही मोलासेस आगे किण्वन (Fermentation) और आसवन (Distillation) प्रक्रिया से गुजरकर इथेनॉल में बदलता है। कुछ आधुनिक संयंत्रों में गन्ने के रस से भी सीधे इथेनॉल उत्पादन किया जा रहा है।

1 टन गन्ने से इथेनॉल की मात्रा

औसतन 1 टन (1000 किलोग्राम) गन्ने से लगभग 70 से 85 लीटर इथेनॉल बनाया जा सकता है, हालांकि यह मात्रा कई कारकों पर निर्भर करती है, जैसे गन्ने की गुणवत्ता, उसमें मौजूद शर्करा की मात्रा (रिकवरी रेट) और उत्पादन तकनीक। अगर मोलासेस के बजाय सीधे गन्ने के रस से इथेनॉल बनाया जाए, तो उत्पादन थोड़ा अधिक भी हो सकता है।

उत्पादन केवल कच्चे माल पर निर्भर नहीं

इथेनॉल की मात्रा केवल कच्चे माल पर निर्भर नहीं करती। मिल की दक्षता, तकनीक, और प्रोसेसिंग क्षमता भी अहम भूमिका निभाते हैं। उच्च गुणवत्ता वाले गन्ने में शर्करा की मात्रा ज्यादा होती है, जिससे इथेनॉल उत्पादन बेहतर होता है। वहीं खराब गुणवत्ता या कम रिकवरी वाले गन्ने से उत्पादन घट जाता है।

किसानों और अर्थव्यवस्था के लिए फायदे

इथेनॉल उत्पादन बढ़ने से गन्ना किसानों को बेहतर दाम मिलने की संभावना रहती है। साथ ही, चीनी मिलों को भी अतिरिक्त आय का स्रोत मिलता है। यह पहल पर्यावरण के लिहाज से भी फायदेमंद है क्योंकि इथेनॉल एक स्वच्छ ईंधन माना जाता है।

कुल मिलाकर, 1 टन गन्ने से 70–85 लीटर इथेनॉल का उत्पादन संभव है। तकनीक में सुधार और बेहतर फसल प्रबंधन के जरिए इस उत्पादन को और बढ़ाया जा सकता है, जो देश की ऊर्जा सुरक्षा और किसानों की आय दोनों के लिए सकारात्मक कदम साबित हो सकता है।

Pradeep Pandey
प्रदीप पाण्डेयauthor

प्रदीप पाण्डेय टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में टेक और ऑटो बीट पर कंटेंट तैयार करते हैं। डिजिटल मीडिया में 10 वर्षों के अनुभव के साथ प्रदीप तकनीक की दुनिया को समझने और उसे आम पाठकों तक सरल व उपयोगी रूप में पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। प्रदीप अब तक 11,000 से अधिक आर्टिकल्स लिख चुके हैं। वह गैजेट रिव्यू, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, टेक टिप्स और नवीनतम टेक इनोवेशन पर लगातार काम करते हैं। एआई टूल्स पर एक्सपेरिमेंट करना, नए ऐप्स टेस्ट करना और टेक से जुड़े प्रैक्टिकल सॉल्यूशंस खोजने में उनकी खास रुचि है।

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