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EXCLUSIVE: Meta के बाद अब रडार पर चीनी मोबाइल कंपनियां, डेटा सिक्योरिटी को लेकर अलर्ट, डिवाइस में बग की आशंका

एजेंसियों के इनपुट में सबसे बड़ी चिंता भारतीय नागरिकों के व्यक्तिगत डेटा को लेकर है। सूत्रों का कहना है कि इन मोबाइल फोन में यूजर द्वारा डाला गया डेटा किस तरह स्टोर और प्रोसेस किया जा रहा है, इसे लेकर विस्तृत जांच की जरूरत महसूस की गई है।

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चीन की मोबाइल फोन कंपनियां रडार पर

Photo : PTI

Meta के बाद अब केंद्र सरकार भारत में कारोबार कर रही कुछ चीनी मोबाइल कंपनियों को लेकर भी सख्त रुख अपनाने की तैयारी में है। सूत्रों के मुताबिक, खुफिया एजेंसियों ने कुछ विशेष चीनी मोबाइल कंपनियों में इस्तेमाल किए जा रहे चिपसेट, सॉफ्टवेयर और डेटा ट्रांसफर को लेकर गंभीर सुरक्षा चिंताएं सरकार के सामने रखी हैं। सूत्रों के अनुसार, खुफिया एजेंसियों को कुछ मोबाइल कंपनियों के डिवाइस में ऐसे संभावित बग की जानकारी मिली है, जिससे फोन में मौजूद यूजर डेटा को भारत के बाहर स्थित सर्वरों पर ट्रांसफर किए जाने की आशंका है। एजेंसियों को संदेह है कि कुछ मामलों में यह डेटा कथित तौर पर चीन स्थित सर्वरों तक भी पहुंच सकता है।

डेटा की सुरक्षा को लेकर बड़ा सवाल

एजेंसियों के इनपुट में सबसे बड़ी चिंता भारतीय नागरिकों के व्यक्तिगत डेटा को लेकर है। सूत्रों का कहना है कि इन मोबाइल फोन में यूजर द्वारा डाला गया डेटा किस तरह स्टोर और प्रोसेस किया जा रहा है, इसे लेकर विस्तृत जांच की जरूरत महसूस की गई है। खुफिया एजेंसियों ने कुछ कंपनियों को लेकर पहले भी रेड फ्लैग किया था। अब इन नए इनपुट्स के बाद सरकार इस पूरे मामले की दोबारा समीक्षा कर रही है।

सरकार चीनी मोबाइल कंपनियों के प्रतिनिधियों को तलब कर सकती है। सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार जल्द ही भारत में काम कर रही इन चीनी मोबाइल टेक्नोलॉजी कंपनियों के प्रतिनिधियों को तलब कर सकती है। सरकार की ओर से कंपनियों से उनके डेटा स्टोरेज, सॉफ्टवेयर कंट्रोल, चिपसेट और दूसरे महत्वपूर्ण हार्डवेयर कंपोनेंट्स से जुड़े सवाल पूछे जाने की संभावना है।

खुफिया एजेंसियों ने इन बिंदुओं पर जताई आपत्ति

सूत्रों के मुताबिक, एजेंसियों ने कुछ कंपनियों के संचालन मॉडल में कई ऐसे पहलुओं को चिन्हित किया है, जो सुरक्षा के लिहाज से चिंता का विषय हैं।

  • IP का स्वामित्व/कंट्रोल विदेश में
  • सॉफ्टवेयर का नियंत्रण विदेश से
  • रॉयल्टी और लाइसेंस फीस का पैसा विदेश जाना
  • चिपसेट का आयात
  • डिस्प्ले और कैमरा मॉड्यूल का आयात

एजेंसियों का फोकस यह पता लगाने पर है कि मोबाइल डिवाइस के हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर की पूरी सप्लाई चेन और डेटा फ्लो पर वास्तविक नियंत्रण किसके पास है।

12 महीने में 10 हजार से ज्यादा मामले भी जांच के दायरे में

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, पिछले 12 महीनों के दौरान अलग-अलग केंद्रीय और राज्य एजेंसियों की ओर से इन चीनी कंपनियों से जुड़े 10 हजार से ज्यादा मामले/अनुरोध सामने आए हैं। इनमें से कई मामले अभी लंबित बताए जा रहे हैं। सूत्रों का दावा है कि कुछ मामलों में कंपनियों की ओर से अपेक्षित सहयोग नहीं मिला। कथित तौर पर कंपनियों ने यह दलील दी कि चीन के कानूनों और नियमों के कारण उन्हें संबंधित डेटा साझा करने की अनुमति नहीं है।

राष्ट्रीय सुरक्षा और डेटा प्राइवेसी पर सरकार की नजर

सरकार की चिंता केवल मोबाइल फोन के हार्डवेयर तक सीमित नहीं है। पूरा मामला भारतीय नागरिकों के डेटा, डेटा स्टोरेज, सॉफ्टवेयर कंट्रोल और संभावित विदेशी एक्सेस से जुड़ा हुआ है। सूत्रों के मुताबिक, सरकार यह भी जांचना चाहती है कि भारत में बिकने वाले मोबाइल फोन से निकलने वाला डेटा वास्तव में कहां जाता है, उसे कौन नियंत्रित करता है और जरूरत पड़ने पर भारतीय एजेंसियों को उस डेटा तक कानूनी पहुंच मिल सकती है या नहीं।

Meta को लेकर सरकार की हालिया सख्ती के बाद अब चीनी मोबाइल कंपनियों से जुड़े ये इनपुट भी केंद्र के लिए डेटा सिक्योरिटी और राष्ट्रीय सुरक्षा का एक अहम मुद्दा बनते जा रहे हैं। हालांकि, संबंधित कंपनियों की ओर से इन आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है। सरकार की ओर से भी इस संबंध में औपचारिक तौर पर कोई विस्तृत बयान जारी नहीं किया गया है।

Himanshu Tiwari
हिमांशु तिवारीauthor

हिमांशु तिवारी एक पत्रकार हैं जिन्हें प्रिंट से लेकर इलेक्ट्रॉनिक्स तक का 16 साल का अनुभव है। मैंने अपना करियर क्राइम रिपोर्टर के रूप में शुरू किया था लेकिन बाद में पॉलिटिकल रिपोर्टिंग में शिफ्ट हो गया। पिछले 12 से अधिक वर्षों से बीजेपी, आरएसएस को कवर कर रहे हैं, कुछ आम चुनावों और कई विधानसभा चुनावों की सटीक रिपोर्टिंग भी की है। "सारी दुनिया एक मंच है" और इसलिए रंगमंच और नाटक लिखने में गहरी रुचि है।

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