देश में आधार कार्ड की सुरक्षा और इसके दुरुपयोग को रोकने के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है। UIDAI (भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण) ने अब तक 1.17 करोड़ आधार नंबर बंद कर दिए हैं। ये सभी आधार नंबर उन लोगों के थे जिनकी मृत्यु हो चुकी है।
क्यों उठाया गया ये कदम?
UIDAI का कहना है कि मृत लोगों के आधार कार्ड के गलत इस्तेमाल की संभावना होती है। इनसे किसी भी तरह की फ्रॉड, स्कैम या पहचान की चोरी हो सकती है। इसी को रोकने के लिए मृत लोगों के आधार नंबर डीएक्टिवेट किए गए हैं।
परिवार के लिए क्या है प्रक्रिया?
UIDAI ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कहा है कि वे इस मामले में सक्रिय भूमिका निभाएं। अब सरकार चाहती है कि जैसे ही किसी व्यक्ति की मृत्यु होती है, वैसे ही उसका आधार नंबर कैंसिल किया जाए। इसके लिए डेथ सर्टिफिकेट जारी करते वक्त आधार से लिंक करना जरूरी किया जा रहा है।
किस तरह रोका जाएगा गलत इस्तेमाल?
UIDAI ने एक नई व्यवस्था पर काम शुरू कर दिया है, जिसके तहत मृत व्यक्ति का आधार कार्ड तुरंत रद्द किया जाएगा। किसी भी सरकारी योजना या सुविधा में उनका आधार नंबर फिर से इस्तेमाल नहीं हो सकेगा। इससे डुप्लीकेट पहचान और फर्जीवाड़ा रोका जा सकेगा।
क्या करना होगा परिवार को?
मृत्यु के बाद परिवार के किसी सदस्य को डेथ सर्टिफिकेट के लिए आवेदन करते वक्त आधार नंबर देना होगा। UIDAI को सूचना देनी होगी कि संबंधित व्यक्ति का निधन हो चुका है। इसके बाद, प्रक्रिया के अनुसार, उसका आधार नंबर डीएक्टिवेट कर दिया जाएगा।
