वृंदावन: इस मंदिर में हर रात सोने आते हैं भगवान श्रीकृष्ण! रचाते हैं राधा जी के साथ रासलीला

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आदित्य साहू
Updated Aug 19, 2022 | 17:13 IST

Happy Janmashtami 2022: भगवान श्रीकृष्‍ण का जन्म मथुरा में हुआ था, वहीं गोकुल में उन्होंने बाललीला की थी। हालांकि, जब श्रीकृष्‍ण थोड़े बड़े हुए तो उनका प्रमुख लीला स्थल वृंदावन बन गया था। उन्होंने यहीं पर रास रचाया और दुनिया को प्रेम सिखाया।

VRINDAVAN
भगवान कृष्ण का चमत्कार  |  तस्वीर साभार: Twitter
मुख्य बातें
  • वृंदावन में स्थित हैं भगवान श्रीकृष्ण के कई मंदिर
  • माना जाता है कि हर मंदिर में होते हैं अलग चमत्कार
  • मान्यता है कि आज भी रास रचाने आते हैं भगवान श्रीकृष्ण

Happy Janmashtami 2022: आज देशभर में भगवान श्रीकृष्ण की जन्माष्टमी की धूम है। श्रीकृष्ण के भक्त लड्डू-गोपाल की भक्ति में डूबे हुए हैं। सबसे ज्यादा हर्षोल्लास वृंदावन में होता है। वृंदावन में कई ऐसे मंदिर हैं, जहां बहुत ही धूमधाम से कान्हा की जन्माष्टमी मनाई जाती है। इन मंदिरों का अपना महत्व और इनके बारे में कई सारे चमत्कार प्रचलित है। मान्यता है कि वृंदावन के एक मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण हर रात सोने आते हैं। इसके अलावा यहां के एक वन में हमेशा राधा रानी के साथ रास रचाने आते हैं। आप भी जानिए इन मंदिरों की चमत्कारिक मान्यताओं के बारे में- 

मथुरा में भगवान श्रीकृष्‍ण का जन्म हुआ था, वहीं गोकुल में उन्होंने बाललीला की थी। हालांकि, जब श्रीकृष्‍ण थोड़े बड़े हुए तो उनका प्रमुख लीला स्थल वृंदावन बन गया था। उन्होंने यहीं पर रास रचाया और दुनिया को प्रेम सिखाया। वृंदावन धाम के इन चमत्कारों को जानकर आप भी आश्चर्य में पड़ जाएंगे।

हर रात लगता है राधा कृष्ण का पलंग

वृंदावन में स्थित रंग महल मंदिर में हर रात राधा-कृष्ण का पलंग लगाया जाता है। इस दौरान पूरा रंगमहल सजाया जाता है। इसके बाद राधा रानी का श्रृंगार सामान रखकर मंदिर का दरवाजा बन्द कर दिया जाता है। लोगों का कहना है कि सुबह जब दरवाजा खुलता है, तो सारा सामान अस्त-व्यस्त पड़ा मिलता है। माना जाता है कि रात में भगवान कृष्ण राधा के साथ आकर इस सामान का उपयोग करते हैं। यहां तक मान्यता है कि यदि कोई छिपकर रासलीला देखने की कोशिश करता है तो वह अगले ही दिन पागल हो जाता है।  

गोपियां बनकर नाचते हैं तुलसी के पेड़

वृन्दावन में ही श्रीकृष्ण का एक और मंदिर है, जिसके बारे में मान्यता है कि उस मंदिर का दरवाजा अपने आप ही खुलता और बंद होता है। बता दें कि वृंदा तुलसी को कहा जाता है। वृंदावन में तुलसी के बहुत अधिक पौधे हैं। इस कारण इसका नाम वृंदावन पड़ा है। बताया जाता है कि यहां तुलसी के दो पौधे एक साथ लगाए गए हैं। जब रात को कृष्ण-राधा रास रचाते हैं तो यही तुलसी के पौधे गोपियां बनकर उन दोनों के साथ नाचते हैं। कहा जाता है कि इन तुलसी के पौधों का एक भी पत्ता कोई यहां से नहीं ले जा सकता है। जो यह काम गुपचुप तरीके से करता है, उसे भयानक नुकसान झेलना पड़ता है। 

लोग रात में बंद कर लेते हैं घरों की खिड़कियां

मान्यता है कि यहां के एक मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण खुद शयन करने आते हैं। इसलिए लिए पुजारी हर रोज मंदिर में पलंग लगाते हैं। इस पर साफ-सुधरी चादर बिछाई जाती है। सुबह जब मंदिर खुलता है तो बिस्तर को देखकर हर कोई अचंभित रह जाता है। उसे देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि जैसे कोई यहां सोकर गया हो। यहां हर रोज माखन-मिश्री का प्रसाद चढ़ाया जाता है, जो सुबह तक अपने आप खत्म हो जाता है। यहां रात में हर किसी के रुकने की मनाही है। मान्यता है कि यहां आसपास के घरों में खिड़कियां नहीं हैं। जिनके घरों में हैं, शाम की आरती के बाद वे अपनी खिड़कियां बंद कर देते हैं। माना जाता है कि  राम में मंदिर की दिशा में देखने पर इंसान अंधा हो जाता है।

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