Flight Ticket India: भारत में 2 साल से कम उम्र के बच्चों को शिशु माना जाता है। ऐसे बच्चे आमतौर पर फ्लाइट में अलग सीट के बिना यात्रा कर सकते हैं। यानी उन्हें पूरे सफर के दौरान माता-पिता या साथ आए किसी बड़े व्यक्ति की गोद में बैठना होता है। इसी वजह से इन्हें लैप इन्फेंट भी कहा जाता है।
अच्छी बात यह है कि इन बच्चों के लिए टिकट पर काफी छूट मिलती है। उदाहरण के लिए, एयर इंडिया के नियमों के मुताबिक शिशुओं को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में बेस किराए पर छूट मिलती है। इकोनॉमी क्लास में करीब 10% किराया देना होता है, जबकि बिजनेस और फर्स्ट क्लास में लगभग 25% किराया लिया जाता है।
कुछ लो-कॉस्ट एयरलाइंस जैसे इंडिगो शिशुओं के लिए एक फिक्स चार्ज लेती हैं। उदाहरण के तौर पर, भारत के अंदर यात्रा करने पर करीब 1750 रुपये का शुल्क लिया जाता है। वहीं अंतरराष्ट्रीय यात्रा में यह फीस दूरी और रूट के हिसाब से अलग-अलग हो सकती है। ध्यान रखने वाली बात यह है कि शिशु हमेशा किसी वयस्क के साथ ही यात्रा कर सकता है, और आमतौर पर उसके लिए अलग सीट बुक नहीं की जाती।
2 साल या उससे ज्यादा उम्र के बच्चे: जैसे ही बच्चा 2 साल का हो जाता है, एयरलाइंस के नियम बदल जाते हैं। इस उम्र के बाद बच्चे को अलग सीट की जरूरत होती है और उसे एक सामान्य यात्री की तरह टिकट लेकर यात्रा करनी होती है। मतलब यह कि अगर बच्चा 24 महीने से ज्यादा का है, तो एयरलाइन उसे गोद में बैठाकर सफर करने की अनुमति नहीं देती। ऐसे में आपको उसके लिए पूरी टिकट खरीदनी पड़ती है।
फ्लाइट में स्टोलर या बेबी प्रैम ले जाने का नियम: अगर आप छोटे बच्चे के साथ सफर कर रहे हैं तो अक्सर स्टोलर या बेबी प्रैम भी साथ ले जाना पड़ता है। भारत में अलग-अलग एयरलाइंस के इसके लिए अलग नियम होते हैं। कुछ एयरलाइंस स्टोलर को चेक-इन बैगेज के रूप में लेने देती हैं, जबकि कुछ एयरलाइंस इसे केबिन में ले जाने की अनुमति भी देती हैं, अगर उसका आकार और वजन नियमों के अनुसार हो।
इंडिगो और एयर इंडिया जैसी एयरलाइंस आमतौर पर हर शिशु के लिए एक स्टोलर, बेबी प्रैम या कार सीट बिना अतिरिक्त शुल्क के ले जाने की अनुमति देती हैं। कुल मिलाकर, अगर आपका बच्चा 2 साल से कम उम्र का है, तो वह फ्लाइट में आपकी गोद में बैठकर कम किराए में यात्रा कर सकता है। लेकिन 2 साल से ज्यादा उम्र होने पर उसके लिए अलग सीट और पूरा टिकट लेना जरूरी हो जाता है।
