सूर्य ग्रहण एक किस्म का ग्रहण होता है। भौतिक विज्ञान की दृष्टि से जब सूरज और पृथ्वी के बीच में चंद्रमा आ जाता है तो चंद्रमा के पीछे सूर्य का बिम्ब कुछ समय के लिए ढंक जाता है और इसी घटना को सूर्य ग्रहण कहा जाता है। चूंकि, पृथ्वी सूरज की परिक्रमा करती है और चांद पृथ्वी की। कभी-कभी चांद, सूरज और धरती के बीच आ जाता है। फिर वह सूरज की कुछ या सारी रोशनी रोक लेता है। यही वजह रहती है कि धरती पर साया फैल जाता है।
चंद्रमा के चलते सूर्य के बिम्ब के पूरे या कम भाग के ढंके जाने की वजह से सूर्य ग्रहण तीन प्रकार के होते हैं। इन्हें पूर्ण सूर्य ग्रहण, आंशिक सूर्य ग्रहण और वलयाकार सूर्य ग्रहण के तौर पर जाना जाता है। खगोल शास्त्रियों नें गणित से निश्चित किया है कि 18 साल 18 दिन की समयावधि में 41 सूर्य ग्रहण और 29 चंद्रग्रहण होते हैं। एक बरस में पांच सूर्यग्रहण और दो चंद्रग्रहण तक हो सकते हैं।