मुलायम सिंह यादव

समाजवादी पार्टी के संस्थापक मुलायम सिंह यादव का 82 साल की उम्र में 10 अक्टूबर, 2022 को निधन हो गया। वह लंबे समय से बीमार चल रहे थे। भारतीय राजनीति में वह करीब पांच दशकों तक सक्रिय रहे। राम मनोहर लोहिया की विचारधारा से प्रभावित मुलायम सिंह ने राजनीति में समाजवादी विचारधारा को आगे बढ़ाया। 1990 के दशक में जब राम मंदिर आंदोलन गति पकड़ रहा था तो इन्होंने अपनी अलग पार्टी बनाई। वह 10 बार विधायक रहे और सात बार सांसद भी चुने गए। वह तीन बार (वर्ष 1989-91,1993-95 और 2003-2007) उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और 1996 से 98 तक देश के रक्षा मंत्री भी रहे। एक समय उन्हें प्रधानमंत्री पद के दावेदार के तौर पर भी देखा गया था। यादव दशकों तक राष्ट्रीय नेता रहे लेकिन उत्तर प्रदेश ही ज्यादातर उनका राजनीतिक अखाड़ा रहा। समाजवाद के प्रणेता राम मनोहर लोहिया से प्रभावित होकर सियासी सफर शुरू करने वाले यादव ने उत्तर प्रदेश में ही अपनी राजनीति निखारी और तीन बार प्रदेश के सत्ता शिखर तक पहुंचे।

शुरुआत में बसपा के साथ मिलकर इन्होंने अपनी सरकार बनाई लेकिन 1995 के गेस्ट हाउस कांड के बाद बसपा सुप्रीमो मायावती के साथ इनकी दूरी बन गई और राजनीति में सपा एवं बसपा एक दूसरे के कट्टर प्रतिद्वंद्वी बन गए। 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले दोनों दल एक दूसरे के साथ आए लेकिन चुनाव नतीजों के बाद अपना रास्ता अलग कर लिया। बीते कुछ वर्षों से मुलायम सिंह बीमार चल रहे थे। बावजूद इसके उन्होंने संसद भवन आना नहीं छोड़ा। मुलायम पहलवान थे। अखाड़े के दांव उन्हें खूब आते थे। राजनीतिक दांव चलने में भी वे माहिर थे। कई बार उन्होंने अपनी चाल से अपने विरोधियों को चित किया। वर्ष 2017 में समाजवादी पार्टी की बागडोर अखिलेश यादव के हाथ में आने के बाद भी मुलायम सिंह यादव पार्टी समर्थकों के लिए नेताजी बने रहे और मंच पर उनकी मौजूदगी समाजवादी कुनबे को जोड़े रखने की उम्मीद बंधाती थी।