आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब घातक कहना गलत नहीं होगा। AI जहां एक ओर क्रांतिकारी तकनीक के नए रास्ते खोल रही है, वहीं दूसरी ओर यह गोपनीयता के लिए नए खतरे भी पैदा कर रही है। अमेरिका की पेन स्टेट यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने हाल ही में ऐसा ही एक जोखिम उजागर किया है। उन्होंने एक AI-संचालित सिस्टम का टेस्ट किया जो कुछ फीट दूर से ही फोन कॉल्स को सुन सकता है। इस अध्ययन ने प्राइवेसी को लेकर गंभीर चिंताएं बढ़ा दी हैं।
यह शोध 18th ACM Conference on Security and Privacy in Wireless and Mobile Networks (WiSec 2025) में प्रस्तुत किया गया। इसमें बताया गया कि कैसे वैज्ञानिकों ने AI और राडार तकनीक का इस्तेमाल करके फोन पर हो रही निजी बातचीत को इंटरसेप्ट किया, बिना डिवाइस को छुए।
क्या है वायरलेस-टैपिंग तकनीक?
शोधकर्ताओं ने इस सिस्टम को “Wireless-tapping” नाम दिया है। यह दिखाता है कि स्मार्टफोन के ईयरपीस से उत्पन्न सूक्ष्म कंपन को पकड़कर लगभग 10 फीट की दूरी से आंशिक बातचीत को ट्रांसक्राइब किया जा सकता है। प्रयोग में पाया गया कि 10,000 शब्दों की शब्दावली के आधार पर लगभग 60% सटीकता से कॉल ट्रांसक्रिप्ट तैयार हो सकता है।
कैसे करता है काम?
जब हम फोन पर बात करते हैं, तो सामने वाले की आवाज ईयरपीस से निकलती है और फोन की सतह पर हल्के कंपन पैदा करती है। सामान्यतः ये कंपन महसूस नहीं होते, लेकिन शोधकर्ताओं ने मिलीमीटर-वेव राडार सेंसर (जो सेल्फ-ड्राइविंग कार, मोशन डिटेक्टर और 5G नेटवर्क में भी इस्तेमाल होता है) से इन्हें पकड़ लिया।
इसके बाद इन कंपन संकेतों को Whisper नामक ओपन-सोर्स AI मॉडल (OpenAI द्वारा विकसित) से प्रोसेस किया गया। पूरे मॉडल को री-ट्रेन करने की बजाय वैज्ञानिकों ने लो रैंक एडॉप्शन तकनीक अपनाई, जिसमें केवल 1% पैरामीटर बदले गए। इससे AI सिस्टम “शोर-भरे” राडार डेटा को समझने में सक्षम हुआ।
चिंताजनक नतीजे
इस प्रक्रिया से तैयार हुए ट्रांसक्रिप्ट पूरी तरह परफेक्ट तो नहीं थे, लेकिन उनमें इतने शब्द और वाक्यांश साफ थे कि बातचीत का सार समझा जा सके। यही कारण है कि यह तकनीक जासूसी के नए डर को जन्म देती है।
संभावित खतरे
शोधकर्ताओं का कहना है कि यह सिस्टम फिलहाल केवल शैक्षणिक उद्देश्य से बनाया गया है और यह कोई तैयार-टू-यूज़ स्पाई टूल नहीं है, लेकिन उन्होंने चेतावनी दी कि राडार सेंसर का छोटा होना और AI स्पीच रिकग्निशन में तेजी से हो रही प्रगति भविष्य में ऐसे उपकरणों को छोटे, छिपे हुए गैजेट्स में बदल सकती है। इसका मतलब है कि आने वाले समय में गुप्त वायरलेस ईव्सड्रॉपिंग यानी बिना बताए बातचीत सुनना एक सच्ची और गंभीर संभावना बन सकता है।
