WhatsApp ने एक नया फीचर पेश किया है, जिसके जरिए अब 13 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए पैरेंट-मैनेज्ड अकाउंट बनाए जा सकेंगे। कंपनी के मुताबिक इस फीचर से माता-पिता या अभिभावकों को बच्चों के मैसेजिंग और कम्युनिकेशन पर ज्यादा नियंत्रण मिलेगा।
यह फीचर आने वाले महीनों में धीरे-धीरे रोल आउट किया जाएगा। कंपनी का कहना है कि इसे परिवारों और ऑनलाइन सुरक्षा विशेषज्ञों की सलाह के आधार पर तैयार किया गया है, ताकि छोटे बच्चों के लिए एक सुरक्षित डिजिटल माहौल बनाया जा सके।
ज्यादा सख्त प्राइवेसी सेटिंग्स मिलेंगी
कंपनी के अनुसार पैरेंट-मैनेज्ड अकाउंट सामान्य अकाउंट की तुलना में ज्यादा सख्त प्राइवेसी सेटिंग्स के साथ आएंगे। इन अकाउंट्स को माता-पिता या अभिभावक द्वारा बनाया और नियंत्रित किया जाएगा, और यह सीधे उनके व्हाट्सएप अकाउंट से लिंक रहेगा।
इन अकाउंट्स के जरिए बच्चे सिर्फ प्राइवेट मैसेजिंग और वॉयस कॉल का इस्तेमाल कर सकेंगे। इससे वे केवल परिवार के सदस्यों और भरोसेमंद संपर्कों से ही जुड़े रहेंगे। इसके अलावा माता-पिता यह भी देख सकेंगे कि बच्चा किन ग्रुप्स में शामिल हो सकता है।
कई फीचर्स नहीं होंगे उपलब्ध
पैरेंट-मैनेज्ड अकाउंट में कई फीचर्स को सीमित या पूरी तरह बंद रखा गया है। इनमें स्टेटस अपडेट, चैनल्स और Meta AI जैसे फीचर्स शामिल नहीं होंगे। इसके अलावा वन-टू-वन चैट में डिसअपियरिंग मैसेज का विकल्प भी उपलब्ध नहीं रहेगा।
अगर कोई अनजान व्यक्ति बच्चे को मैसेज भेजता है, तो वह मैसेज रिक्वेस्ट फोल्डर में चला जाएगा। इस फोल्डर को खोलने के लिए माता-पिता का PIN जरूरी होगा। साथ ही जब बच्चा किसी कॉन्टैक्ट को जोड़ता, ब्लॉक करता या रिपोर्ट करता है तो उसकी जानकारी भी माता-पिता को मिल जाएगी।
सुरक्षा के लिए एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन रहेगा
इन सीमाओं के बावजूद कंपनी का कहना है कि पैरेंट-मैनेज्ड अकाउंट में वही एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन तकनीक इस्तेमाल होगी, जो प्लेटफॉर्म के अन्य अकाउंट्स में होती है। इससे चैट और कॉल पूरी तरह सुरक्षित और निजी रहेंगे।
ऐसे बना सकेंगे बच्चों का अकाउंट
कंपनी के मुताबिक माता-पिता जब बच्चे के लिए व्हाट्सएप अकाउंट बनाएंगे, तो रजिस्ट्रेशन के दौरान पैरेंट-मैनेज्ड अकाउंट का विकल्प दिखाई देगा। इसमें बच्चे की जन्मतिथि दर्ज करनी होगी। अकाउंट सेटअप के लिए माता-पिता का फोन और बच्चे का फोन दोनों जरूरी होंगे, ताकि दोनों अकाउंट्स को आपस में जोड़ा जा सके।
इसके अलावा माता-पिता को यह भी पुष्टि करनी होगी कि वे वयस्क हैं, जिसके लिए सेल्फी के जरिए पहचान सत्यापन किया जा सकता है। फिलहाल यह फीचर दुनिया भर में चरणबद्ध तरीके से जारी किया जाएगा और शुरुआत में कुछ क्षेत्रों में ही उपलब्ध हो सकता है।
