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स्मार्टफोन की DNS सेटिंग क्या है, जानें इसको 'ON' करने से क्या होता है?

जब आप अपने ब्राउजर में किसी वेबसाइट का नाम टाइप करते हैं तो मोबाइल या कंप्यूटर इसे सीधे नहीं समझ पाता। ऐसा इसलिए क्योंकि इंटरनेट केवल नंबर्स की भाषा समझता है, जिसे हम लोग सामान्य बोल चाल की भाषा में IP Address कहते हैं।

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स्मार्टफोन की एक सेटिंग को बदलकर आप अपनी प्राइवेसी को कई गुना मजबूत कर सकते हैं। (फोटो क्रेडिट-iStock)

Smartphone DNS Setting: अगर आपके पास स्मार्टफोन है तो आपके लिए काम की खबर है। आज हम आपको स्मार्टफोन की एक ऐसी शानदार सेटिंग बताने वाले हैं जिससे आपकी कई तरह की टेंशन खत्म हो जाएगी। इस आसान ट्रिक्स को से आप अपने स्मार्टफोन की इंटरनेट स्पीड को बढ़ा सकते हैं और साथ ही इंटरनेट ब्राउजिंग के दौरान बार बार आने वाले ऐड्स को भी बंद कर सकते हैं। जिस सेटिंग की बात हम कर रहे हैं उसे DNS सेटिंग कहते हैं। यह एक सेटिंग आपके स्मार्टफोन चलाने के एक्सपीरियंस को पूरी तरह से बदल सकता है।

आपको बता दें कि जब आप अपने ब्राउजर में किसी वेबसाइट का नाम टाइप करते हैं तो मोबाइल या कंप्यूटर इसे सीधे नहीं समझ पाता। ऐसा इसलिए क्योंकि इंटरनेट केवल नंबर्स की भाषा समझता है, जिसे हम लोग सामान्य बोल चाल की भाषा में IP Address कहते हैं।

फोन में मिलने वाली DNS सेटिंग का काम आपके द्वारा टाइप किए गए नाम को उस वेबसाइट के IP एड्रेस में बदलना है। जैसे ही आप नाम लिखते हैं, आपका फोन DNS सर्वर से संपर्क करता है, वहां से सही IP एड्रेस ढूंढता है और आपको वेबसाइट पर ले जाता है। आमतौर पर, आपका इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर आपको अपना डिफॉल्ट DNS देता है।

स्मार्टफोन में मिलता है Private DNS

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि एंड्रॉइड 9 वर्जन के बाद से सभी स्मार्टफोन्स में 'Private DNS' का एक खास फीचर दिया जाता है।। यह फीचर DNS-over-TLS (DoT) तकनीक पर काम करता है। प्राइवेट DNS नॉर्मल DNS की तुलना में कहीं ज्यादा सिक्योर होता है।

जब आप एक साधारण DNS में कोई टेक्स्ट लिखते हैं वह अनसेफ होता है। आपके द्वारा लिखी जाने वाली हर एक चीज को कोई भी बीच में पढ़ सकता है और साथ ही यह भी जान सकता है कि आप कौन सी वेबसाइट ओपन कर रहे हैं। लेकिन जैसे ही आप Private DNS को ऑन करते हैं तो यह पूरी तरह एन्क्रिप्टेड हो जाता है और आपकी प्राइवेसी डिजिटल वर्ल्ड में सेफ हो जाती है।

DNS को 'ON' या चेंज करने से क्या होता है?

अगर आप अपने फोन में डिफॉल्ट DNS को बदलकर किसी सुरक्षित और फास्ट थर्ड-पार्टी DNS (जैसे Google या Cloudflare) पर सेट करते हैं, तो इससे कई तरह के फायदे आपको मिलते हैं।

इंटरनेट स्पीड में सुधार

कई बार आपके टेलीकॉम ऑपरेटर का DNS सर्वर धीमा या डाउन होता है, जिससे वेबसाइट्स खुलने में समय लेती हैं। Cloudflare या Google जैसे ग्लोबल DNS सर्वर्स बहुत फास्ट होते हैं। इन्हें सेट करने से वेबसाइट्स पलक झपकते ही खुलने लगती हैं।

साइबर हमलों और हैकिंग से सुरक्षा

हैकर्स अक्सर 'DNS Spoofing' या 'Phishing' के जरिए आपको असली जैसी दिखने वाली नकली वेबसाइट पर भेजकर आपका पासवर्ड चुरा लेते हैं। एक सुरक्षित प्राइवेट DNS खतरनाक और मालवेयर वाली वेबसाइट्स को पहले ही ब्लॉक कर देता है, जिससे आपका फोन सुरक्षित रहता है।

विज्ञापनों से छुटकारा

अगर आप प्राइवेट DNS में AdGuard DNS (dns.adguard.com) सेट कर देते हैं, तो यह आपके फोन के ऐप्स और ब्राउजर में आने वाले अनचाहे और अश्लील विज्ञापनों (Pop-up Ads) को काफी हद तक ब्लॉक कर देता है।

स्मार्टफोन में Private DNS ऐसे ON करें?

  • सबसे पहले अपने स्मार्टफोन की Settings में जाएं।
  • इसके बाद आपको Network & Internet या Connection & Sharing के ऑप्शन पर जाना होगा।
  • अब आपको Private DNS का ऑप्शन दिखेगा यहां आपको तीन ऑप्शन दिखाई देंगे।
  • इसमें Off, Automatic और Private DNS Provider Hostname , आपको इसी तीसरे ऑप्शन को चुनना है।

आपको विज्ञापनों को ब्लॉक करने के लिए: dns.adguard.com लिखना होगा। इंटरनेट स्पीड अगर आप बढ़ाना चाहते हैं तो (Cloudflare): one.one.one.one लिखना होगा और गूगल की सुरक्षा के लिए आपको dns.google लिखकर सेव करना होगा।

Gaurav Tiwari
गौरव तिवारीauthor

गौरव तिवारी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में टेक और ऑटो बीट को कवर करते हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 9 वर्षों के अनुभव के साथ, गौरव तकनीकी दुनिया की तेजी से बदलती जानकारियो को सरल और समझने योग्य भाषा में पेश करने के लिए जाने जाते हैं। वह गैजेट रिव्यू, टेलिकॉम अपडेट्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर क्राइम, टिप्स एंड ट्रिक्स, ई-कॉमर्स और ऑटोमोबाइल सेक्टर की महत्वपूर्ण खबरों पर लगातार काम करते हैं। गौरव अब तक 10,000 से अधिक आर्टिकल्स लिख चुके हैं। उनकी स्टोरीज न सिर्फ टेक-सेवी पाठकों के लिए उपयोगी होती हैं, बल्कि आम यूजर्स को भी नई तकनीक समझने और अपनाने में मदद करती हैं।

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