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Google App Billing Policy: क्या है गूगल की ऐप बिलिंग पॉलिसी, जिस पर छिड़ गया नया विवाद

Google App Billing Policy Controversy: गूगल ऐप बिलिंग पॉलिसी के तहत जो ऐप सब्सक्रिप्शन आधारित हैं उन्हें गूगल को शुल्क देना होता है। लेकिन जो प्लेटफार्म यूजर्स से ऐप इस्तेमाल के लिए सब्सक्रिप्शन लेते हैं, इसका विरोध कर रहे हैं और शुल्क नहीं दे रहे हैं।

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Google App billing policy

Google App Billing Policy Controversy: गूगल ने पिछले हफ्ते कई भारतीय ऐप को गूगल प्ले स्टोर से बंद कर दिया था। लेकिन सरकार के हस्तक्षेप और स्टार्टअप के विरोध के बाद कई ऐप्स की ऐप स्टोर पर वापसी हो गई है। बता दें कि गूगल ने अपनी ऐप बिलिंग पॉलिसी को नहीं मानने पर भारतीय डेवलपर्स के इन ऐप्स को हटाया था। अब यह विवाद बढ़ता जा रहा है। चलिए जानते हैं आखिर गूगल की पॉलिसी है क्या, जो भारतीय स्टार्टअप्स को परेशान कर रही है।

क्या है गूगल ऐप बिलिंग पॉलिसी? (what is Google App Billing Policy)

गूगल प्ले की बिलिंग पॉलिसी एक ऐसी सर्विस है जो डेवलपर्स को अपने एंड्रॉयड ऐप्स में डिजिटल प्रोडक्ट और कंटेंट बेचने की सुविधा देती है। यानी जो मोबाइल ऐप आप गूगल प्ले स्टोर से डाउनलोड करके इस्तेमाल करते हैं उसके लिए गूगल डेवलपर्स से चार्ज करता है। लेकिन यह चार्ज हर एक ऐप के लिए अलग-अलग होता है। गूगल इन ऐप से 15-30 फीसदी तक शुल्क लेता है।

विवाद क्या है? (Google App Billing Policy Controversy)

अब समझते हैं कि आखिर गूगल और भारतीय स्टार्टअप्स का विवाद क्या है। दरअसल, गूगल ऐप बिलिंग पॉलिसी के तहत जो ऐप सब्सक्रिप्शन आधारित हैं उन्हें गूगल को शुल्क देना होता है। लेकिन जो प्लेटफार्म यूजर्स से ऐप इस्तेमाल के लिए सब्सक्रिप्शन लेते हैं, जैसे कि शादी डॉट कॉम, उन्हें अपने लाभ का 10 से 30 फीसदी तक गूगल को देना होता है। लेकिन भारतीय स्टार्टअप इसका विरोध कर रहे हैं और शुल्क नहीं दे रहे हैं।

PCI कानूनों में बदलाव चाहता है

PCI यानी पेमेंट्स काउंसिल ऑफ इंडिया, जो IAMAI (इंटरनेट एंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया) के तहत देश की सभी प्रमुख पेमेंट कंपनियों का प्रतिनिधित्व करती है, चाहती है कि सरकार न केवल दोनों पक्षों के बीच बातचीत के लिए कदम उठाए, बल्कि देश के कानूनों में भी संशोधन करे। उनका कहना है कि इससे बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियों की एकाधिकारवादी नीतियों को रोका जा सकेगा।

गूगल ने बदली पॉलिसी (Google Policy)

दरअसल भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) ने गूगल को 15-30 प्रतिशत शुल्क लेने की पुरानी प्रणाली को खत्म करने का आदेश दिया था। इसके बाद अमेरिकी कंपनी ने ऐप से भुगतान पर 11 प्रतिशत से 26 प्रतिशत तक शुल्क लगाया, जिस पर अब फिर विवाद बढ़ गया है।

स्टार्टअप को सता रहा नुकसान का डर

प्ले स्टोर शुल्क भुगतान मुद्दे का कोई समाधान निकलता नजर नहीं आ रहा है। सोमवार को स्टार्टअप फाउंडर्स ने केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात की। भारतीय कंपनियों ने गूगल पर अपनी प्रभावशाली स्थिति का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि गूगल की नीतियां 'मनमानी और भेदभावपूर्ण' हैं।

गूगल ने इन ऐप को हटाया था (Google Play Store)

गूगल ने शनिवार को अपनी बिलिंग पॉलिसी का पालन नहीं करने पर एक दर्जन से अधिक लोकप्रिय भारतीय ऐप्स को प्ले स्टोर से हटा दिया था। इन ऐप्स में हायरिंग प्लेटफॉर्म नौकरी डॉट कॉम, मैट्रिमोनी सर्विस शादी डॉट कॉम और भारत मैट्रिमोनी, ऑडियो स्टोरीटेलिंग प्लेटफॉर्म कुकू एफएम, ओटीटी प्लेटफार्म ऑल्ट बालाजी, डेटिंग प्लेटफॉर्म ट्रूली मैडली और रियल-एस्टेट मैनेजर 99acres जैसे ऐप्स शामिल थे। हालांकि, बाद में कई ऐप को बहाल कर दिया गया।

Vishal Maithil
Vishal Mathelauthor

विशाल मैथिल टाइम्स नाऊ नवभारत में बतौर सीनियर कॉपी एडिटर 2023 से जुड़े हुए हैं। पत्रकारिता में 6+ वर्षों के अनुभव के साथ वह टेक्नोलॉजी, सोशल मीडिया, गैजेट्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे विषयों पर गहरी समझ रखते हैं। वे ऑटोमोबाइल, बिजनेस, यूटिलिटी और हाइपरलोकल से लेकर एजुकेशन और इंटरनेशनल बीट्स पर भी काम कर चुके हैं। भोपाल से ताल्लुक रखने वाले विशाल ने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय से मीडिया रिसर्च में पोस्ट ग्रेजुएशन किया है। रिसर्च के क्षेत्र में उनके कई पेपर राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय जर्नल में प्रकाशित हो चुके हैं। उन्होंने दैनिक भास्कर, अमर उजाला, मासिक पत्रिका "संदेश" और सोशल मीडिया फर्म में भी काम किया है। टेक-यूटिलिटी और बिजनेस से जुड़ी खबरों को आसान और काम की भाषा में समझाना विशाल को खूब आता है। वो कोशिश करते हैं कि कम शब्दों में ज्यादा और साफ-सुथरी जानकारी मिल जाए। किताबें पढ़ना और संगीत सुनना उनका पसंदीदा काम है। आप इनसे Vishal.mathel@timesgroup.com पर संपर्क कर सकते हैं।

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