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सॉफ्टवेयर इंजीनियर की नौकरी खत्म! Cursor ने लॉन्च किया नया AI कोडिंग एजेंट, अपने आप करता है Coding

यह नया फीचर Cursor के पहले से मौजूद टूल्स पर आधारित है। उदाहरण के तौर पर कंपनी का Bugbot नाम का टूल पहले से कोड में संभावित बग्स की पहचान करता है। जब भी डेवलपर्स नया कोड जोड़ते हैं, यह टूल अपने आप स्कैन करके समस्याओं की जानकारी दे देता है।

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No need for software engineer/Photo-AI

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते इस्तेमाल ने सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट की दुनिया को तेजी से बदलना शुरू कर दिया है। अब डेवलपर्स सिर्फ खुद कोड लिखने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि कई कंपनियों में इंजीनियर AI एजेंट्स के साथ मिलकर काम कर रहे हैं जो कोड लिखने, उसकी समीक्षा करने और विश्लेषण करने में मदद करते हैं। इसी दिशा में AI कोडिंग प्लेटफॉर्म बनाने वाली कंपनी Cursor ने एक नया फीचर पेश किया है, जो AI एजेंट्स को अपने आप काम करने की क्षमता देता है।

Automations फीचर क्या है

Cursor ने अपने प्लेटफॉर्म में Automations नाम का नया फीचर लॉन्च किया है। इसका उद्देश्य डेवलपमेंट वर्कफ्लो के भीतर AI एजेंट्स को ऑटोमैटिक तरीके से काम शुरू करने की सुविधा देना है। आमतौर पर AI आधारित कोडिंग में इंजीनियर पहले AI को निर्देश देते हैं, फिर उसके द्वारा तैयार आउटपुट की जांच करते हैं और उसके बाद अगला निर्देश देते हैं। इस प्रक्रिया को “प्रॉम्प्ट एंड मॉनिटर” साइकिल कहा जाता है। लेकिन जब किसी प्रोजेक्ट में कई AI एजेंट्स एक साथ काम कर रहे हों, तो उन्हें लगातार मैनेज करना डेवलपर्स के लिए चुनौती बन सकता है।

बिना निर्देश के भी शुरू हो सकता है काम

Automations फीचर के जरिए अब AI एजेंट्स को हर बार इंसानों के निर्देश का इंतजार नहीं करना पड़ेगा। यह सिस्टम कुछ खास स्थितियों में अपने आप सक्रिय हो सकता है। उदाहरण के तौर पर, अगर कोडबेस में नया कोड जोड़ा जाता है, किसी टीम चैट प्लेटफॉर्म जैसे Slack पर नया संदेश आता है या तय समय पर कोई टास्क निर्धारित होता है, तो AI एजेंट अपने आप काम शुरू कर सकता है। इसके बाद वह कोड की समीक्षा, बदलावों का विश्लेषण या संभावित समस्याओं की जांच जैसे कार्य कर सकता है। जरूरत पड़ने पर ही इंजीनियर को सूचना दी जाती है।

पहले से मौजूद टूल्स पर आधारित नई प्रणाली

यह नया फीचर Cursor के पहले से मौजूद टूल्स पर आधारित है। उदाहरण के तौर पर कंपनी का Bugbot नाम का टूल पहले से कोड में संभावित बग्स की पहचान करता है। जब भी डेवलपर्स नया कोड जोड़ते हैं, यह टूल अपने आप स्कैन करके समस्याओं की जानकारी दे देता है। अब Automations फीचर के जरिए इसी तरह की प्रक्रिया को और बड़े स्तर पर लागू किया जा सकता है, जैसे पूरे प्रोजेक्ट की सुरक्षा जांच करना या कोड के बड़े हिस्से का विश्लेषण करना।

कंपनी के अंदर भी हो रहा इस्तेमाल

Cursor के अनुसार यह ऑटोमेशन सिस्टम कंपनी के अंदर कई कामों में पहले से इस्तेमाल हो रहा है। उदाहरण के तौर पर जब किसी टेक्निकल समस्या की रिपोर्ट PagerDuty के जरिए दर्ज होती है, तो एक ऑटोमेशन तुरंत AI एजेंट को सक्रिय कर देता है, जो सर्वर लॉग्स की जांच शुरू कर देता है। इसी तरह एक अन्य ऑटोमेशन हर सप्ताह कोडबेस में हुए बदलावों का सार तैयार करके कंपनी के Slack चैनलों पर साझा करता है। कंपनी का दावा है कि इस तरह की सैकड़ों ऑटोमेशन प्रक्रियाएं हर घंटे चलती रहती हैं।

AI कोडिंग टूल्स का तेजी से बढ़ता बाजार

AI आधारित कोडिंग टूल्स का बाजार तेजी से विस्तार कर रहा है। कई बड़ी टेक कंपनियां इस क्षेत्र में नए समाधान पेश कर रही हैं। उदाहरण के लिए OpenAI और Anthropic भी ऐसे सिस्टम विकसित कर रही हैं जो सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट के बड़े हिस्से को AI के जरिए संभाल सकें।

रिपोर्ट्स के मुताबिक Cursor की लोकप्रियता भी तेजी से बढ़ रही है। डेटा के अनुसार जेनरेटिव AI का इस्तेमाल करने वाले करीब 25 प्रतिशत क्लाइंट किसी न किसी रूप में Cursor प्लेटफॉर्म का उपयोग कर रहे हैं। वहीं हाल ही में आई एक रिपोर्ट में बताया गया कि कंपनी की वार्षिक आय 2 अरब डॉलर से ज्यादा हो चुकी है और AI कोडिंग टूल्स की मांग बढ़ने के कारण इसमें तेजी से वृद्धि हो रही है।

Pradeep Pandey
प्रदीप पाण्डेयauthor

प्रदीप पाण्डेय टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में टेक और ऑटो बीट पर कंटेंट तैयार करते हैं। डिजिटल मीडिया में 10 वर्षों के अनुभव के साथ प्रदीप तकनीक की दुनिया को समझने और उसे आम पाठकों तक सरल व उपयोगी रूप में पहुंचाने के लिए जाने जाते हैं। प्रदीप अब तक 11,000 से अधिक आर्टिकल्स लिख चुके हैं। वह गैजेट रिव्यू, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, टेक टिप्स और नवीनतम टेक इनोवेशन पर लगातार काम करते हैं। एआई टूल्स पर एक्सपेरिमेंट करना, नए ऐप्स टेस्ट करना और टेक से जुड़े प्रैक्टिकल सॉल्यूशंस खोजने में उनकी खास रुचि है।

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