दुनियाभर में बढ़ती हीटवेव और गर्मी की समस्या के बीच वैज्ञानिक ऐसे समाधान खोज रहे हैं जो बिना अतिरिक्त बिजली खर्च किए इमारतों को ठंडा रख सकें। इसी दिशा में ऑस्ट्रेलिया की सिडनी यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं और स्टार्टअप Dewpoint Innovations ने एक खास "स्मार्ट पेंट" विकसित किया है। शोधकर्ताओं का दावा है कि यह विशेष कोटिंग सूर्य की 97 प्रतिशत तक रोशनी को परावर्तित (रिफ्लेक्ट) कर सकती है, सामान्य सतहों की तुलना में काफी ठंडी रहती है और बिना बिजली के हवा से पानी भी इकट्ठा कर सकती है।
क्या है यह स्मार्ट पेंट?
यह नई कोटिंग PVDF-HFP नामक विशेष रूप से विकसित पॉलिमर पर आधारित है। सामान्य पेंट की तुलना में इसमें सूक्ष्म छिद्र (Microscopic Pores) मौजूद होते हैं, जो सूर्य की किरणों को बिखेरने और गर्मी के अवशोषण को कम करने में मदद करते हैं।
यह तकनीक "Passive Daytime Radiative Cooling" नामक प्रक्रिया पर काम करती है। आसान भाषा में कहें तो यह सूर्य की अधिकांश ऊर्जा को वापस परावर्तित कर देती है और सतह से गर्मी को बाहर निकालती रहती है। इससे इमारतों की दीवारें और छतें कम गर्म होती हैं।
97% धूप को लौटा सकता है
शोध के दौरान पाया गया कि यह कोटिंग आने वाली सूर्य की रोशनी का 97 प्रतिशत तक हिस्सा वापस परावर्तित कर सकती है। कुछ परीक्षणों में इस पेंट से ढकी सतहें समान मौसम में मौजूद गहरे रंग की छतों की तुलना में 25 डिग्री सेल्सियस से भी अधिक ठंडी पाई गईं। इतना ही नहीं, कई मामलों में कोटिंग लगी सतह का तापमान आसपास की हवा से भी लगभग 6 डिग्री सेल्सियस कम रहा।
AC का इस्तेमाल कम हो सकता है
इस तकनीक का प्रमुख उद्देश्य इमारतों के अंदर का तापमान प्राकृतिक रूप से कम रखना है। जब छत और दीवारें कम गर्म होंगी तो घरों और कार्यालयों के भीतर गर्मी कम प्रवेश करेगी। इससे एयर कंडीशनर और अन्य कूलिंग सिस्टम पर दबाव घट सकता है और बिजली की खपत कम हो सकती है। हालांकि शोधकर्ताओं का कहना है कि यह तकनीक पूरी तरह AC की जगह नहीं लेगी, लेकिन इसकी मदद से कूलिंग लागत और ऊर्जा खपत में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।
हवा से पानी भी बना सकता है यह पेंट
इस स्मार्ट पेंट की सबसे अनोखी विशेषता इसकी वायुमंडल से पानी एकत्र करने की क्षमता है, क्योंकि यह सतह आसपास की हवा से ठंडी रहती है, इसलिए हवा में मौजूद नमी इसकी सतह पर संघनित होकर पानी की बूंदों में बदल जाती है। यह प्रक्रिया बिल्कुल उसी तरह होती है जैसे सुबह के समय घास पर ओस की बूंदें दिखाई देती हैं। सबसे खास बात यह है कि इस पूरी प्रक्रिया के लिए किसी बाहरी बिजली की जरूरत नहीं है।
परीक्षण में मिले उत्साहजनक नतीजे
छह महीने तक चले रूफटॉप परीक्षण में शोधकर्ताओं ने पाया कि यह कोटिंग वर्ष के लगभग एक-तिहाई समय तक वातावरण से नमी एकत्र करने में सक्षम रही। अनुकूल परिस्थितियों में इसने प्रतिदिन प्रति वर्ग मीटर 390 मिलीलीटर तक पानी एकत्र किया। हालांकि यह मात्रा बहुत अधिक नहीं है, लेकिन जल संकट वाले क्षेत्रों में यह तकनीक उपयोगी साबित हो सकती है।
कहां हो सकता है इसका इस्तेमाल?
वैज्ञानिकों का मानना है कि इस स्मार्ट कोटिंग का उपयोग कई क्षेत्रों में किया जा सकता है। इनमें आवासीय भवन, व्यावसायिक कार्यालय, गोदाम, कृषि सुविधाएं, दूरदराज के समुदाय और शहरी हीट आइलैंड प्रभाव से प्रभावित क्षेत्र शामिल हैं। विशेष रूप से ऐसे देशों में यह तकनीक अधिक लाभकारी हो सकती है जहां भीषण गर्मी और पानी की कमी दोनों समस्याएं मौजूद हैं।
भारत को हो सकता है बड़ा फायदा
भारत जैसे देशों में हर साल हीटवेव की घटनाएं बढ़ रही हैं और कई क्षेत्रों में जल संकट भी गंभीर होता जा रहा है। ऐसे में यह स्मार्ट पेंट घरों और इमारतों को ठंडा रखने के साथ-साथ वातावरण से अतिरिक्त नमी एकत्र करने में मदद कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन और तेजी से बढ़ते शहरीकरण के दौर में इस तरह की तकनीकों की जरूरत और बढ़ेगी।
