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साइबर फ्रॉड में फंसा पैसा कैसे वापस पाएं? जानिए Money Restoration Module का आसान तरीका

Money Restoration Module यानी MRM एक ऑनलाइन सुविधा है, जिसे साइबर फ्रॉड के पीड़ितों की मदद के लिए शुरू किया गया है। इसके जरिए पीड़ित उस रकम को वापस पाने की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं।

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डिजिटल वर्ल्ड में आपकी एक छोटी सी लापरवाही बड़ा नुकसान करा सकती है। (फोटो क्रेडिट-iStock)

भारत में ऑनलाइन फ्रॉड के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। हर दिन कई लोग साइबर ठगी का शिकार होते हैं और उनके लाखों रुपये तक ठगों के खातों में चले जाते हैं। ऐसे मामलों में अगर समय रहते शिकायत की जाए, तो ठगी की रकम को आगे ट्रांसफर होने से रोकने की कोशिश की जा सकती है। साइबर अपराध की शिकायत करने के लिए सरकार ने National Cyber Crime Reporting Portal (NCRP) और 1930 साइबर क्राइम हेल्पलाइन की सुविधा दी है। अब साइबर फ्रॉड की रकम वापस पाने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए Money Restoration Module (MRM) भी उपलब्ध है।

यह सुविधा उन लोगों के लिए उपयोगी हो सकती है, जिनकी ठगी की रकम आरोपी या बेनिफिशियरी के बैंक अकाउंट में पहुंच चुकी है और उसे फ्रीज या होल्ड कर दिया गया है।

क्या है Money Restoration Module?

Money Restoration Module यानी MRM एक ऑनलाइन सुविधा है, जिसे साइबर फ्रॉड के पीड़ितों की मदद के लिए शुरू किया गया है। इसके जरिए पीड़ित उस रकम को वापस पाने की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं, जिसे साइबर फ्रॉड के बाद आरोपी या किसी दूसरे संबंधित बैंक खाते में फ्रीज किया गया है।

इस सुविधा का इस्तेमाल ऑनलाइन किया जा सकता है। यानी रिफंड रिक्वेस्ट शुरू करने के लिए आपको हर बार बैंक या सरकारी कार्यालय जाने की जरूरत नहीं पड़ती।

हालांकि, यह बात ध्यान रखना जरूरी है कि MRM के जरिए पैसा वापस मिलने की कोई गारंटी नहीं है। सबसे पहले ठगी की रकम का पता लगना जरूरी है। इसके बाद संबंधित रकम को आरोपी या बेनिफिशियरी के बैंक खाते में फ्रीज या होल्ड किया जाना चाहिए। इसके बाद ही कानूनी प्रक्रिया के तहत पैसा वापस लेने की कार्रवाई आगे बढ़ती है।

MRM पर रिफंड के लिए कैसे करें आवेदन?

अगर साइबर फ्रॉड में आपका पैसा चला गया है और रकम फ्रीज हो चुकी है, तो रिफंड रिक्वेस्ट के लिए नीचे दिए गए तरीके को अपनाया जा सकता है।

1. सबसे पहले साइबर फ्रॉड की शिकायत करें

साइबर ठगी का पता चलते ही तुरंत शिकायत करना सबसे जरूरी कदम है। इसके लिए आप 1930 साइबर क्राइम हेल्पलाइन पर कॉल कर सकते हैं या National Cyber Crime Reporting Portal (NCRP) पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर सकते हैं।

जितनी जल्दी शिकायत की जाएगी, उतनी ही जल्दी संबंधित अधिकारी और बैंक ठगी की रकम को ट्रेस करने और उसे रोकने की कोशिश कर सकते हैं। अगर ठग रकम को किसी दूसरे खाते में भेज देता है, तो उसे वापस पाना मुश्किल हो सकता है।

2. पता करें कि आपका पैसा फ्रीज हुआ है या नहीं

शिकायत दर्ज करने के बाद यह देखना जरूरी है कि आपकी शिकायत के आधार पर ठगी की रकम को ट्रेस किया गया है या नहीं। रिफंड के लिए तभी आगे बढ़ा जा सकता है, जब संबंधित रकम का पता लग जाए और उसे आरोपी या बेनिफिशियरी के बैंक खाते में फ्रीज या होल्ड कर दिया गया हो।

3. MRM पर Refund Request दर्ज करें

अगर आपकी रकम फ्रीज हो चुकी है, तो Money Restoration Module पर जाकर “Raise Refund Request” विकल्प पर क्लिक करें। इसके बाद साइबर क्राइम की शिकायत दर्ज करते समय मिले 14 अंकों के NCRP acknowledgment number को दर्ज करना होगा। इसके बाद OTP के जरिए शिकायत को वेरिफाई किया जा सकता है।

4. अपना बैंक अकाउंट विवरण भरें

लॉगिन करने के बाद पोर्टल पर आपकी शिकायत और रिफंड से जुड़ी जानकारी दिखाई देगी। अब आपको उस बैंक खाते की जानकारी दर्ज करनी होगी, जिसमें आप अपनी रकम वापस लेना चाहते हैं। अकाउंट नंबर और दूसरी बैंक डिटेल भरते समय अच्छी तरह जांच कर लें, ताकि गलत जानकारी के कारण रिफंड में देरी न हो।

5. जरूरी दस्तावेज अपलोड करें

रिफंड रिक्वेस्ट के दौरान कुछ जरूरी दस्तावेज जमा करने पड़ सकते हैं। इनमें PAN कार्ड की कॉपी शामिल है। अगर आपके मामले से जुड़ा कोई कोर्ट ऑर्डर है, तो उसे भी पोर्टल पर अपलोड किया जा सकता है।

6. रिफंड रिक्वेस्ट सबमिट करें

सभी जानकारी भरने और जरूरी दस्तावेज अपलोड करने के बाद अपनी रिक्वेस्ट सबमिट कर दें। रिक्वेस्ट जमा होने के बाद आपको 14 अंकों की Request ID या Unique Request Number (URN) मिल सकता है। इस नंबर को संभालकर रखें, क्योंकि भविष्य में अपनी रिक्वेस्ट का स्टेटस चेक करने के लिए इसकी जरूरत पड़ सकती है।

इसके बाद क्या होगा?

रिफंड रिक्वेस्ट जमा करने के बाद आगे की प्रक्रिया संबंधित पुलिस अधिकारियों, बैंकों और दूसरी संबंधित एजेंसियों के जरिए पूरी की जाएगी। मामले के अनुसार आपसे Indemnity Bond भी जमा करने के लिए कहा जा सकता है। इसके बाद संबंधित अधिकारियों और संस्थाओं की ओर से लागू कानूनी प्रक्रिया के अनुसार आपकी रकम वापस करने की रिक्वेस्ट पर कार्रवाई की जाएगी।

साइबर फ्रॉड के बाद इन बातों का रखें ध्यान

  • ठगी का पता चलते ही तुरंत 1930 पर शिकायत करें।
  • NCRP पर भी साइबर फ्रॉड की शिकायत दर्ज करें।
  • अपना 14 अंकों का NCRP acknowledgment number सुरक्षित रखें।
  • पहले यह सुनिश्चित करें कि ठगी की रकम ट्रेस होकर फ्रीज या होल्ड हुई है।
  • MRM पर बैंक अकाउंट की जानकारी ध्यान से भरें।
  • PAN कार्ड और जरूरत पड़ने पर अन्य दस्तावेज तैयार रखें।
  • रिफंड रिक्वेस्ट मिलने के बाद Request ID/URN को सुरक्षित रखें।
  • जरूरत पड़ने पर संबंधित पुलिस अधिकारी की ओर से मांगे गए Indemnity Bond या अन्य दस्तावेज जमा करें।
  • याद रखें कि रकम फ्रीज होने के बाद भी पैसा वापस मिलना कानूनी प्रक्रिया और संबंधित अधिकारियों के निर्णय पर निर्भर करता है।

साइबर फ्रॉड होने पर घबराने के बजाय तुरंत शिकायत करना सबसे जरूरी है। समय पर शिकायत मिलने से ठगी की रकम को ट्रेस और फ्रीज करने की संभावना बढ़ सकती है। अगर आपकी रकम आरोपी या बेनिफिशियरी के खाते में फ्रीज हो गई है, तो Money Restoration Module के जरिए उसे वापस पाने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। हालांकि, MRM केवल रिफंड की प्रक्रिया शुरू करने की सुविधा देता है। पैसा वास्तव में वापस मिलेगा या नहीं, यह मामले की स्थिति और संबंधित कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करता है।

Gaurav Tiwari
गौरव तिवारीauthor

गौरव तिवारी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में टेक और ऑटो बीट को कवर करते हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 9 वर्षों के अनुभव के साथ, गौरव तकनीकी दुनिया की तेजी से बदलती जानकारियो को सरल और समझने योग्य भाषा में पेश करने के लिए जाने जाते हैं। वह गैजेट रिव्यू, टेलिकॉम अपडेट्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर क्राइम, टिप्स एंड ट्रिक्स, ई-कॉमर्स और ऑटोमोबाइल सेक्टर की महत्वपूर्ण खबरों पर लगातार काम करते हैं। गौरव अब तक 10,000 से अधिक आर्टिकल्स लिख चुके हैं। उनकी स्टोरीज न सिर्फ टेक-सेवी पाठकों के लिए उपयोगी होती हैं, बल्कि आम यूजर्स को भी नई तकनीक समझने और अपनाने में मदद करती हैं।

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