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Meta पर 25 अरब डॉलर का लगा जुर्माना, Facebook यूजर्स की प्राइवेसी से जुड़ा है मामला

Meta ने अदालत के फैसले पर असहमति जताई है। कंपनी के मुख्य कानूनी अधिकारी सी.जे. महोनी ने कहा कि इस तरह के फैसले और कानूनी कार्रवाई से न्यू मैक्सिको में कारोबार करना बेहद मुश्किल हो सकता है।

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मेटा पर लगा करोड़ों डॉलर का जुर्माना।

सोशल मीडिया कंपनी Meta को Facebook यूजर्स की डेटा प्राइवेसी से जुड़े मामले में बड़ा झटका लगा है। अमेरिका के न्यू मैक्सिको राज्य की एक अदालत ने बुधवार को कंपनी पर 25 अरब डॉलर का जुर्माना लगाया। यह मामला यूजर्स की निजी जानकारी की सुरक्षा और उसके इस्तेमाल से जुड़ा है। सितंबर में जूरी ने माना था कि Meta ने यूजर्स को उनकी डेटा प्राइवेसी के बारे में गुमराह किया था।

न्यू मैक्सिको के जज फ्रांसिस मैथ्यू ने बुधवार को Meta पर लगाए जाने वाले जुर्माने की रकम तय की। इस मामले में न्यू मैक्सिको उन राज्यों में शामिल रहा, जिसने Meta के खिलाफ अपने दावों को अदालत में पेश किया। बाकी 48 राज्यों ने कंपनी के साथ समझौता कर लिया था।

जज के मुताबिक, न्यू मैक्सिको के कानून के तहत हर उल्लंघन पर अधिकतम 5,000 डॉलर का जुर्माना लगाया जा सकता था। राज्य ने 43,899,720 उल्लंघनों के आधार पर 219.5 अरब डॉलर से ज्यादा के जुर्माने का दावा किया था। हालांकि, जज ने इस रकम को घटाकर 25 अरब डॉलर कर दिया।

Meta ने फैसले पर क्या कहा?

Meta ने अदालत के फैसले पर असहमति जताई है। कंपनी के मुख्य कानूनी अधिकारी सी.जे. महोनी ने कहा कि इस तरह के फैसले और कानूनी कार्रवाई से न्यू मैक्सिको में कारोबार करना बेहद मुश्किल हो सकता है।

Meta का कहना है कि यह मुकदमा ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर लोगों की अभिव्यक्ति की आजादी को सीमित करने की कोशिश है। कंपनी ने यह भी कहा कि उसे भरोसा है कि अपील के दौरान वह इस फैसले को चुनौती देने में सफल होगी। कंपनी के मुताबिक, वह लोगों को जोड़ने, छोटे कारोबारों को बढ़ावा देने और एक सुरक्षित प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराने के लिए काम करती रहेगी।

Facebook की प्राइवेसी सर्विस में क्या कमी मिली?

सितंबर में न्यू मैक्सिको की जूरी ने माना था कि Meta ने राज्य के अनुचित व्यापार व्यवहार से जुड़े कानून का जानबूझकर 4.3 करोड़ से ज्यादा बार उल्लंघन किया। अदालत के अनुसार, Facebook की प्राइवेसी सेटिंग्स यूजर्स को अपने निजी डेटा पर सही तरीके से नियंत्रण रखने का पर्याप्त मौका नहीं देती थीं। इसके अलावा, थर्ड-पार्टी ऐप डेवलपर्स भी Facebook के सिस्टम के जरिए यूजर्स की निजी जानकारी तक पहुंच सकते थे।

अदालत ने यह भी कहा कि Meta के CEO मार्क जुकरबर्ग जानते थे कि यूजर्स अपनी प्राइवेसी सेटिंग्स और निजी जानकारी के इस्तेमाल को पूरी तरह नहीं समझते हैं। इसके बावजूद कंपनी ने इस स्थिति को सुधारने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए।

अदालत में पेश की गई जानकारी के मुताबिक, जुकरबर्ग ने पहले लिखा था कि यूजर्स शायद अपनी मौजूदा प्राइवेसी सेटिंग्स या इस बात को नहीं समझते कि उनकी पोस्ट कौन देख सकता है। उन्होंने यह भी कहा था कि यूजर्स को अपनी प्राइवेसी सेटिंग्स बदलने का विकल्प दिया जाना चाहिए, लेकिन कंपनी को इसके लिए उन्हें प्रोत्साहित नहीं करना चाहिए।

क्या है Cambridge Analytica विवाद?

यह मामला करीब एक दशक पहले सामने आए Cambridge Analytica विवाद से भी जुड़ा है। उस समय रिपोर्ट्स में खुलासा हुआ था कि डेटा कंपनी Cambridge Analytica ने Facebook के 5 करोड़ से ज्यादा यूजर्स की जानकारी जुटाई थी।

इस डेटा का इस्तेमाल 2016 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के दौरान राजनीतिक विज्ञापनों को तैयार करने के लिए किया गया था। इस घटना के बाद Facebook की डेटा सुरक्षा और यूजर्स की निजी जानकारी के इस्तेमाल को लेकर दुनियाभर में सवाल उठे थे।

विवाद के बाद Facebook ने यूजर्स को डेटा के इस्तेमाल के बारे में ज्यादा जानकारी देने और पारदर्शिता बढ़ाने का वादा किया था। हालांकि, अदालत के अनुसार, Meta यूजर्स को उनकी जानकारी के गलत इस्तेमाल के बारे में लगातार और सही तरीके से सूचित करने में नाकाम रही।

Gaurav Tiwari
गौरव तिवारीauthor

गौरव तिवारी टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में टेक और ऑटो बीट को कवर करते हैं। मीडिया इंडस्ट्री में 9 वर्षों के अनुभव के साथ, गौरव तकनीकी दुनिया की तेजी से बदलती जानकारियो को सरल और समझने योग्य भाषा में पेश करने के लिए जाने जाते हैं। वह गैजेट रिव्यू, टेलिकॉम अपडेट्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर क्राइम, टिप्स एंड ट्रिक्स, ई-कॉमर्स और ऑटोमोबाइल सेक्टर की महत्वपूर्ण खबरों पर लगातार काम करते हैं। गौरव अब तक 10,000 से अधिक आर्टिकल्स लिख चुके हैं। उनकी स्टोरीज न सिर्फ टेक-सेवी पाठकों के लिए उपयोगी होती हैं, बल्कि आम यूजर्स को भी नई तकनीक समझने और अपनाने में मदद करती हैं।

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