India's First Military Grade Spy Satellite: भारत का पहला जासूसी सैटेलाइट तैयार हो गया है। इसे भारतीय कंपनी द्वारा ही बनाया गया है और जल्द स्पेसएक्स रॉकेट से लॉन्च किया जाएगा। इस सैटेलाइट की मदद से सशस्त्र बलों को जमीन से ही निगरानी करने में मदद मिलेगी। अब तक निगरानी के लिए सटीक कॉर्डिनेट्स और टाइमिंग को विदेशी विक्रेताओं के साथ शेयर करना पड़ता था। चलिए जानते हैं कि यह सैटेलाइट कब लॉन्च होगा और इसकी क्या खासियत है।
किसने बनाया और कब होगा लॉन्च?
ईटी की रिपोर्ट के अनुसार, भारत का पहला सैन्य ग्रेड जासूसी सैटेलाइट (उपग्रह) टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स (टीएएसएल) द्वारा बनाया गया है। इसे लैटिन अमेरिकी कंपनी सैटेलॉजिक (Satellogic) के साथ साझेदारी में बनाया गया है। इसे स्पेसएक्स रॉकेट से लॉन्च किया जाएगा और लॉन्चिंग के लिए भेज दिया गया है। इसका ग्राउंड स्टेशन बेंगलुरु में बनाया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स (टीएएसएल) द्वारा निर्मित सैटेलाइट का निर्माण पिछले सप्ताह पूरा हो गया था और अप्रैल तक लॉन्च किया जा सकता है।
क्या है खासियत?
भारत के पहले सैन्य ग्रेड जासूसी सैटेलाइट का इस्तेमाल सशस्त्र बलों द्वारा किया जाएगा। इसकी मदद से 0.5 मीटर स्थानिक रिजॉल्यूशन के साथ इमेजरी मिल सकेगी, जो सशस्त्र बलों को निगरानी करने के लिए ज्यादा कंट्रोल देगा। कंट्रोल सेंटर से सैटेलाइट को कंट्रोल किया जा सकेगा। यानी इससे इंफ्रास्ट्रक्चर की निगरानी करना और सैन्य लक्ष्यों को हासिल करने में मदद मिलेगी।
क्यों जरूरी है यह सैटेलाइट?
बता दें कि इसरो के पास पहले से सब-मीटर रिजॉल्यूशन सैटेलाइट हैं, लेकिन सीमा के साथ-साथ दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए और उनकी खुफिया जानकारी हासिल करने के लिए आवश्यक व्यापक स्तर की कवरेज और सटीक जानकारी की जरूरत होती है। इसके लिए अभी हम अमेरिकी कंपनियों पर निर्भर हैं, लेकिन इस सैटेलाइट से हम इस मामले में आत्मनिर्भर हो जाएंगे।
कस्टमाइजेशन
इसके अलावा यह सैटेलाइट पड़ोसी देशों को भी निर्यात किया जा सकता है। अपनी प्राथमिक रक्षा भूमिका के साथ, उपग्रह इमेजरी को मित्र देशों को भी निर्यात किया जा सकता है। बेंगलुरु प्लांट में हर साल 25 ऐसे लो-अर्थ ऑर्बिट सैटेलाइट बनाए जा सकते हैं। इन्हें तकनीकी रूप से कम समय में और एक साथ अंतरिक्ष में स्थापित किया जा सकता है। सैटेलाइट बनाने के अलावा भविष्य के पेलोड को भी देश में विकसित किया जा सकता है और सेना की आवश्यकताओं के लिए हिसाब से कस्टमाइज किया जा सकता है।
