राष्ट्रीय खेल दिवस के मौके पर जानीमानी वेदांता लिमिटेड ने ऐलान किया है कि उन्होंने वित्त वर्ष 2025 में तकरीबन 3 लाख लोगों को परिवर्तनकारी खेल पहलो के माध्यम से सशक्त बनाया है। कंपनी ने इस साल की थीम "लेवलिंग द प्लेइंग फील्ड: स्पोर्ट फॉर सोशल इन्क्लुन" के तहत फुटबॉल, तीरंदाज़ी, हॉकी, मैराथॉन, स्क्वैश, कराटे, पैडल और पैरा-स्पोर्ट्स जैसे कई खेलों में युवाओं को अवसर दिए। यह पहल भारत में कॉर्पोरेट क्षेत्र का सबसे बड़ा खेल आंदोलन बन गया है।
वेदांता ने खेलों को सामाजिक बदलाव का जरिया भी बनाया है। उन्होंने स्थानीय स्तर पर खेल सुविधाएं विकसित करने के साथ-साथ, अच्छे प्रशिक्षकों और सामुदायिक कार्यक्रमों के जरिए नई प्रतिभाओं को मौका दिया है, जिससे युवाओं का विकास और आत्मविश्वास बढ़ रहा है। गोवा और राजस्थान में बनी उनकी फुटबॉल एकेडमी पड़े पैमाने पर युवाओं को प्रशिक्षण दे रही हैं। सबसे अहम यह है कि राजस्थान के उदयपुर में लड़कियों के लिए खुली भारत की पहली रेजिडेंस फुटबॉल एकेडमी की शुरुआत भी वेदांता ग्रुप ने की है, जहां लड़कियां मुफ्त और बेहतर सुविधाओं के साथ फुटबॉल खेल सकती हैं।
फुटबॉल से इतर वेदांता तीरंदाजी और एथलेटिक्स में भी युवा खिलाड़ियों का सपोर्ट कर रही है। उड़ीसा और झारखंड के आदिवासी क्षेत्रों में स्थित वेदांता के खेल प्रशिक्षण केंद्र के खिलाड़ी खूब मेडल जीत रहे हैं और देश के लिए उम्मीद की किरण बन रहे हैं। पैरा-एथलीट साक्षी काले ने भी वेदांता के सहयोग से ही देश-विदेश में भारत का नाम रोशन किया है।
इसके साथ ही, वेदांता ने मुंबई के झुग्गी बस्ती वाले इलाकों में स्क्वैश प्रशिक्षण दिया, साथ ही मैराथॉन और हॉकी जैसे खेलों में भी युवाओं को आगे लाने का काम किया है। उड़ीसा की हॉकी टीम कलिंगा लांसर्स ने हाल ही में लीग में शानदार प्रदर्शन किया। यह सारी पहलें ये दिखाती हैं कि कैसे खेल एक साथ समाज को मजबूत बनाने और हर व्यक्ति को आगे बढ़ाने का जरिया बन सकते हैं। यह कहानी है खेल के ज़रिए बदलाव, उम्मीद और भारत के सपनों की नई उड़ान की। जिसे वेदांता लिख रहा है।
