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पाकिस्तान ने तिलक वर्मा को भटकाने के लिए कौन सा पैंतरा अपनाया था? खोला राज - बताया पाक टीम हमसे मुकाबले में कही नहीं

एशिया कप फाइनल में भारत की जीत के सूत्रधार रहे मध्यक्रम के बल्लेबाज तिलक वर्मा ने कहा कि पाकिस्तानी खिलाड़ियों की छींटाकशी और आक्रामकता का सर्वश्रेष्ठ जवाब खिताब जीतना ही था और उन्होंने शुरूआत में बने दबाव से सहज पार पा लिया था । तिलक के नाबाद 69 रन की मदद से भारत ने दुबई में रविवार को खेले गए फाइनल में पांच विकेट से जीत दर्ज की ।

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टीम इंडिया के बल्लेबाज तिलक वर्मा (PHOTO-AP)

india vs pakistan asia cup final: भारत ने एशिया कप फाइनल में अपना सर्वश्रेष्ठ क्रिकेट खेला और 147 रनों के लक्ष्य का पीछा करते हुए जब उन्होंने 20 रनों पर तीन विकेट खो दिए तो स्थिति यकीनन गंभीर थी। लेकिन बैट्समैन तिलक वर्मा ने अपनी सबसे महत्वपूर्ण पारियों में से एक खेली और भारत को पांच विकेट से जीत दिलाने में अहम भूमिका निभाई । तिलक एशिया कप में अपने फॉर्म के साथ संघर्ष कर रहे थे लेकिन उन्होंने टूर्नामेंट के सबसे बड़े मैच के लिए सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। भारत लौटने के बाद तिलक का हैदराबाद में भव्य स्वागत किया गया।

एक मीडिया साक्षात्कार के दौरान तिलक ने एशिया कप फाइनल के बारे में कहा कि पाकिस्तान के खिलाड़ियों ने उन्हें शब्दों से भटकाने की कोशिश की लेकिन वह शांत रहे और भारत के लिए जीतने पर ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने यह भी कहा कि कप्तान सूर्यकुमार यादव ने उन्हें बताया कि पाकिस्तान टीम भारतीय क्रिकेट टीम के मुकाबले कही भी नहीं है। पाकिस्तान ने मुझे भटकाने की कोशिश की, लेकिन यह खेल का हिस्सा है। मैं दबाव में शांत रहा।

टीम इंडिया खुलकर खेली

तिलक ने कहा कि आपरेशन सिंदूर के बाद वे हमारे खिलाफ काफी आक्रामक हो गए थे । हमने उन्हें खेल को जिस तरीके से खेला जाना चाहिये, वैसे ही खेलकर जवाब दिया । उन्होंने कहा कि हमने तीन विकेट जल्दी गंवा दिये थे और माहौल काफी गर्म हो गया था । मैं जल्दी बल्लेबाजी करने आ गया लेकिन मैने किसी को कुछ नहीं कहा और ना ही कोई खराब शॉट खेलकर टीम और देश को निराश किया ।

तिलक ने पारी को अपने कैरियर की सर्वश्रेष्ठ पारी बताया

भारत को आखिरी ओवर में दस रन चाहिये थे और तिलक ने कहा कि वह तब तक दबाव से ऊपर उठ चुके थे । तिलक ने कहा कि मुझ पर आखिरी ओवर में दबाव नहीं था । मुझे पता था कि मैं मैच जिता दूंगा । मैं अपने देश के बारे में ही सोच रहा था और गेंद दर गेंद रणनीति बना रहा था । मुझे गर्व है कि मैं यह कर सका । तिलक ने इस पारी को अपने कैरियर की सर्वश्रेष्ठ पारियों में से एक बताया ।

तिलक ने बताया अगला लक्ष्य

जीत के सूत्रधार तिलक की तुलना विराट कोहली से भी की गई लेकिन 22 वर्ष के इस बल्लेबाज ने कहा कि जब विराट भाई जैसे लीजैंड के साथ नाम लिया जाये तो यह गर्व की बात है लेकिन मेरा फोकस सिर्फ देश के लिये मैच जीतने पर है । मुझे खुशी है कि भारत को एशिया कप जिता सका । टी20 विश्व कप मेरा अगला लक्ष्य है और विश्व कप जीतने के बाद ही चैन से सो सकूंगा ।(भाषा इनपुट के साथ)

Sanjeev Dubey
संजीव कुमार दुबेauthor

पत्रकारिता में मेरे सफर की शुरुआत 20 साल पहले हुई। 2002 अक्टूबर में टीवी की रुपहले दुनिया में दाखिल हुआ। शुरुआत टीवी की दुनिया के उस पहलू से हुई जहां हर खबर को उसके मुताबिक आकार दिया जाता है यानी उसे कसा जाता है। सहारा टीवी में मेरे कामकाज की शुरुआत पैकेजिंग से हुई जहां खबरों को अलग-अलग प्रारूपों में गढ़ने का काम होता है। फिर पीसीआर में आउटपुट एडिटर की भूमिका निभाने का मौका मिला जहां तुरंत निर्णय कर खबरों को ब्रेक करने की चुनौती रहती है। न्यूजरूम की गहमागमी के बीच रनडाउन तैयार करने की जिम्मेदारी भी बखूबी निभाई। यहां ब्रेकिंग, हार्ड कोर की खबरों और फीचर्ड प्रोग्रामिंग ने मेरे अनुभव का दायरा तो बढ़ाया ही उसमें गहराई एवं पैनापन भी दिया। 2011 में टेलिविजन न्यूज की दुनिया को अलविदा कहना पड़ा। अक्टूबर 2011 में Zee News की हिंदी वेबसाइट को अपनी अगवुाई में लॉन्च करने का मौका मिला। डिजिटल की दुनिया और टीवी की दुनिया में खबरें परोसने और खबरों को दिखाने का अंदाज बिल्कुल अलग था। मैं उस दौर में दस्तक दे चुका था जब टीवी भी स्मार्टफोन पर देखा जाने लगा था। डिजिटल पर भी ब्रेकिंग थी। अगर टीवी में प्रोग्रामिंग थी तो यहां भी बतौर फीचर, सॉफ्ट स्टोरीज का विशाल संसार था। एक नया मीडियम जो स्मार्टफोन पर बखूबी देखा और समझा जा सकता था। डिजिटल की इस दुनिया में टीवी और अखबार दोनों समाहित थे। यहां काम करते हुए डिजिटल न्यूज मीडिया की बारीकियां तो सीखी हीं। साथ ही जब जी न्यूज से विदाई ली तो उस समय 33 मिलियन यूजर्स के बीच 84 मिलियन पीवीज देखने की अपार खुशियां हासिल हुईं। जी न्यूज में एक लंबी पारी खेलने के बाद जुलाई 2017 में टाइम्स नाउ नेटवर्क से जुड़ने का अवसर मिला। 2017 में ही टाइम्स नाउ की हिंदी वेबसाइट की शुरुआत हुई। यह पहला मौका था जब टाइम्स नाउ की अगुवाई में कोई हिंदी न्यूज वेबसाइट लॉन्च हुई। यहां एक नई और युवा टीम बनी। यह टीम आक्रामक अंदाज में काम करते हुए कम समय में अपनी पहचान बनाई। डिजिटल की दुनिया के बदलते संसार में अब चुनौती पीवीज की नहीं बल्कि यूजर्स की थी, जिन्हें लाना इतना आसान नहीं थी। लेकिन टीम के जज्बे, हौसले ने असाधारण चुनौतियों को भी अपनी मेहनत एवं लगन से उसे सामान्य बनाया। डिजिटल न्यूज की दुनिया में हर पल चुनौतियों के बीच नया कुछ सीखने-समझने और कुछ कर गुजरने की प्रेरणा मिलती है। यह सिलसिला आज भी अनवरत जारी है-

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