नागोया: सुनील कुमार एशियाई खेलों की ग्रीको रोमन स्पर्धा में दो पदक जीतने वाले पहले भारतीय पहलवान बन गए जिन्होंने पुरुषों के 87 किलो वर्ग में कुश्ती स्पर्धा के पहले दिन बुधवार को फिलीपीन के रॉबटर्स कालम जॉनस्टन को तकनीकी श्रेष्ठता के आधार पर हराकर कांस्य पदक जीता। सुनील ने अपने प्रतिद्वंद्वी का दाहिने हाथ बांधकर उन्हें पटखनी देते हुए 4-0 से बढ़त बना ली।
पिछली बार कांस्य जीतकर खत्म किया था 13 साल का सूखा
रक्षात्मक खेल रहे जॉनस्टन को ’पार टेरे’ पोजिशन से जमीन पर गिराते हुए सुनील ने स्कोरिंग मूव बनाते हुए पहले ही पीरियड में मुकाबला जीत लिया।
उन्होंने हांगझोउ में 2023 खेलों में भी कांस्य पदक जीतकर ग्रीको रोमन शैली में भारत का पदक का 13 साल का इंतजार खत्म किया था। इससे पहले रविंदर सिंह और सुनील कुमार ने 2010 में ग्वांग्झू खेलों में कांस्य पदक जीता था। हरियाणा के 27 वर्ष के सुनील सेमीफाइनल में जापान के ताइजो योशिडा से तकनीकी श्रेष्ठता के आधार पर हार गए थे।
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शानदार रहा है रेसलिंग करियर
हरियाणा के डबारपुर में 29 सितंबर 1999 को जन्मे सुनील कुमार का पहलवानी करियर शानदार रहा है। उन्होंने एशियाई खेलों में दो कांस्य पदक के अलावा एशियन चैंपियनशिप में एक गोल्ड, एक सिल्वर और चार कांस्य सहित कुल 6 पदक अपने नाम किए हैं। वहीं ग्रैंड प्रिक्स इवेंट में उनके नाम दो गोल्ड और एक सिल्वर मेडल है। साल 2022 और 2026 में उन्होंने गोल्ड मेडल रेसलिंग ग्रैंडप्रिक्स में अपने नाम किया था। साल 2023 में उन्हें भारत सरकार ने अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया था। अंडर-23 एशियन चैंपियनशिप में भी उन्होंने साल 2017 में गोल्ड मेडल अपने नाम किया था। सुनील एशियाई खेलों में भी प्रशंसकों की अपेक्षाओं पर खरा उतरने में सफल रहे।
