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Paris Paralympics 2024: जूडो में ऐतिहासिक जीत, तीरंदाजी में निराशा, जानिए कैसा रहा भारत का प्रदर्शन

Paris Paralympics 2024: पेरिस पैरालंपिक में भारत का शानदार प्रदर्शन जारी है। खेलों के महाकुंभ में दृष्टिबाधित कपिल परमार ने जूडो में पहला मेडल दिलाया। इस मेडल के साथ ही भारत ने कुल 25 पदक जीतने का लक्ष्य पूरा किया। इसके अलावा तीरंदाजी में भारत को निराशा हाथ लगी।

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मैच के दौरान कपिल परमार। (फोटो- Kiren Rijiju X)

Photo : Twitter

Paris Paralympics 2024: दृष्टिबाधित कपिल परमार ने जे1 60 किग्रा पुरुष पैरा जूडो स्पर्धा में भारत को जूडो में पहला पैरालंपिक पदक दिलाया। जिससे देश के प्रेरणादायी पैरा खिलाड़ियों ने 25 पदक जीतने का अपना लक्ष्य हासिल किया और इसमें इजाफा करने की राह पर बने हुए हैं। पदार्पण कर रहे परमार ने ब्राजील के एलिल्टोन डि ओलिवेरा के खिलाफ शुरू से ही दबदबा बनाकर रिकॉर्ड 10-0 की जीत से कांस्य पदक जीता। इससे परमार ने खुद के और देश के लिए ऐतिहासिक पोडियम स्थान हासिल किया। भारत के पदकों की संख्या 25 तक पहुंच गयी है जिसमें पांच स्वर्ण, नौ रजत और 11 कांस्य पदक शामिल हैं। पदक तालिका में भारत 15वें स्थान पर है।

भारतीय पैरालंपिक समिति ने इन खेलों से पहले कम से कम 25 पदक जीतने की उम्मीद जताई थी और यह लक्ष्य पूरा हो चुका है। इससे यहां पैरा खिलाड़ियों का प्रदर्शन उम्मीदों से अधिक रहेगा। हालांकि दोहरी संख्या में स्वर्ण पदक जीतने की उम्मीद पूरी नहीं हो सकी। परमार के पदक की उम्मीद नहीं थी। परमार (24 वर्ष) इससे पहले सेमीफाइनल ए में ईरान के एस बनिताबा खोर्रम अबादी से 0-10 से पराजित हो गये। पैरा जूडो में जे1 वर्ग में वो खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं जो दृष्टिबाधित होते हैं या फिर उनकी कम दृष्टि होती है।

परमार ने 2022 एशियाई खेलों में इसी वर्ग में रजत पदक जीता था। उन्होंने क्वार्टरफाइनल में वेनेजुएला के मार्को डेनिस ब्लांको को 10-0 से शिकस्त दी थी। परमार को दोनों मुकाबलों में एक एक पीला कार्ड मिला। वहीं महिलाओं के 48 किग्रा जे2 वर्ग के क्वार्टरफाइनल में भारत की कोकिला को कजाखस्तान की अकमारल नौटबेक से 0-10 से हार का सामना करना पड़ा। फिर रेपेशेज ए के जे2 फाइनल में कोकिला को यूक्रेन की यूलिया इवानित्स्का से 0-10 से हार मिली। इसमें उन्हें तीन जबकि उनकी प्रतिद्वंद्वी को दो पीले कार्ड मिले।

परमार के साथ हुई थी दुर्घटनाजूडो में पीले कार्ड मामूली उल्लघंन के लिए दिये जाते हैं। जे2 वर्ग में आंशिक दृष्टि वाले खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं। परमार मध्य प्रदेश के शिवोर नाम के एक छोटे से गांव से हैं। बचपन में परमार के साथ एक दुर्घटना हुई थी। जब वह अपने गांव के खेतों में खेल रहे थे और गलती से पानी के पंप को छू लिया जिससे उन्हें बिजली का जोरदार झटका लगा। बेहोश परमार को अस्पताल ले जाया गया और वह छह महीने तक कोमा में रहे। वह चार भाइयों और एक बहन में सबसे छोटे हैं। परमार के पिता टैक्सी चालक हैं जबकि उनकी बहन एक प्राथमिक विद्यालय चलाती है।

इस असफलता के बावजूद परमार ने जूडो के प्रति अपने जुनून को कभी नहीं छोड़ा। उन्होंने अपने मेंटोर और कोच भगवान दास और मनोज की बदौलत जूडो में अपने जुनून को आगे बढ़ाना जारी रखा। परमार जरूरतों को पूरा करने के लिए अपने भाई ललित के साथ मिलकर एक चाय की दुकान चलाते। ललित उनकी प्रेरणा का स्रोत हैं और आज भी उनकी वित्तीय सहायता का मुख्य स्रोत हैं।

सिमरन चौथे स्थान पर रहीं

भारतीय धाविका सिमरन धीमी शुरूआत के कारण महिला टी12 वर्ग की 100 मीटर रेस के फाइनल में 12.31 सेकेंड के समय से चौथे स्थान पर रहीं। उन्होंने सेमीफाइनल में 12.33 सेकेंड के समय से फाइनल में जगह बनाई थी। नई दिल्ली की 24 वर्षीय मौजूदा विश्व चैम्पियन सिमरन दूसरे सेमीफाइनल में जर्मनी की कैटरीन म्यूलर रोटगार्ड के बाद दूसरे स्थान पर रहीं। सिमरन सेमीफाइनल में कुल मिलाकर तीसरे स्थान पर रही। सिमरन ने बुधवार को अपनी हीट में 12.17 सेकंड से सत्र का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया था। क्यूबा की ओमारा डूरंड ने 11.81 सेकेंड के सत्र के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन से स्वर्ण पदक जीता।

तीरंदाजी में निराशा

इतिहास रचने वाले भारतीय तीरंदाज हरविंदर सिंह का दोहरा पदक जीतने का सपना टूट गया क्योंकि वह अपनी जोड़ीदार पूजा जटियां के साथ स्लोवेनियाई जोड़ी से कांस्य पदक के शूट-ऑफ में हार गए। यह भारतीय जोड़ी सेमीफाइनल में कड़ी टक्कर देने के बावजूद इटली के शीर्ष वरीयता प्राप्त एलिसाबेटा मिज्नो और स्टेफानो ट्रैविसानी के खिलाफ 2-6 से हार गई थी। कांस्य पदक के मुकाबले में हरियाणा के पांचवीं वरीयता प्राप्त हरविंदर और पूजा 2-0 से आगे थे लेकिन दो बार अपनी बढ़त गंवाकर जीवा लावरिंच और डेजान फैबचिच से 4-5 (19-17) से हार गये। पहला सेट 33-30 से जीतने के बाद स्लोवेनियाई जोड़ी ने दूसरे सेट में 34-29 से जीत दर्ज कर स्कोर बराबर कर लिया। हरविंदर और पूजा ने तीसरे सेट में 38-33 से जीत के साथ वापसी की और फिर 4-2 से बढ़त बना ली। लेकिन वे अपने हक में समाप्त करने में असफल रहे। स्लोवेनियाई जोड़ी ने चौथा सेट 34-29 से जीता जिससे शूट-ऑफ खेला गया। शूट-ऑफ में फैबचिच ने 9 अंक हासिल करके शानदार शुरुआत की और इसके बाद जीवा ने परफेक्ट 10 अंक हासिल किए जबकि हरविंदर 8 और पूजा 9 अंक ही हासिल कर सके।

निशानेबाज फिर विफल

शेटराउ में भारतीय निशानेबाज मिश्रित 50 मीटर राइफल प्रोन स्पर्धा के फाइनल में जगह नहीं बना सके। महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल (एसएच 1) श्रेणी में कांस्य पदक जीतने वाली मोना अग्रवाल छह सीरिज के बाद 610 . 5 स्कोर करके 30वें स्थान पर रही। वहीं 10 मीटर एयर राइफल प्रोन क्वालीफिकेशन में 28वें स्थान पर रहे सिद्धार्थ बाबू 615 . 8 के स्कोर के साथ 22वें स्थान पर रहे। स्पेन के जुआन अंतोनियो रेनाल्डो 626 . 9 का स्कोर करके शीर्ष रहे। दो विश्व कप स्वर्ण जीत चुकी मोना ने 104.5, 100.8, 99.2, 101.9, 101.7, 102.4 स्कोर किया । वहीं सिद्धार्थ ने 101.0, 102.0, 103.1, 104.6, 101.7 और 103.4 का स्कोर बनाया।

(भाषा)

Shekhar Jha
शेखर झाauthor

शेखर झा टाइम्स नाउ हिंदी (Timesnowhindi.com) की स्पोर्ट्स टीम के सदस्य हैं। वे मूल रूप से बिहार के मिथिलांचल से हैं। मूल रूप से बिहार के मधुबनी के रहने वाले शेखर ने शौकिया तौर पर साल 2011 में पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा। ये शौक वक्त के साथ जूनुन में बदल गया। उनके पास खेल पत्रकारिता का 12 साल का अनुभव है। क्रिकेट के अलावा टेनिस, कबड्डी और बैडमिंटन में खास रुचि है। खिलाड़ियों की बायोग्राफी पढ़ना उन्हें पसंद हैं। शेखर ने सुरेश रैना, संजय बांगड़, दीप्ति शर्मा, राधा यादव जैसे नामचीन भारतीय क्रिकेटरों सहित बैडमिंटन के स्टार भारतीय खिलाड़ियों लक्ष्य सेन, सात्विकसाईराज रैंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी के एक्सक्लूसिव इंटरव्यू किए हैं। शेखर की प्रारंभिक शिक्षा बिहार में हुई। बिहार बोर्ड से 12वीं की परीक्षा पास करने के बाद वो आगे की पढ़ाई के लिए छत्तीसगढ़ पहुंचे जहां उनका पत्रकारिता से पहला परिचय हुआ। रायपुर के अग्रसेन कॉलेज में ग्रेजुएशन करते हुए पत्रकारिता का काम शुरू किया और इसके बाद रायपुर स्थित कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्धालय से पत्राकारिता में पोस्ट ग्रेजुएशन किया और बतौर प्रोफेशनल अपने करियर की शुरुआत की। शेखर ने पत्रकारिता करियर की शुरुआत साल 2011 में ईटीवी छत्तीसगढ़/मध्यप्रदेश के साथ की। इस संस्थान में 6 महीने काम करने के बाद उन्होंने स्थानीय अखबार नेशनल लुक के साथ प्रिंट मीडिया में कदम रखा। इसके बाद राजस्थान पत्रिका समूह के छत्तीसगढ़ संस्करण से जुड़े और वहां तीन साल तक बतौर सब-एडिटर/रिपोर्टर सेवाएं दीं। इसके बाद भारत के सबसे बड़े प्रिंट मीडिया समूह दैनिक भास्कर के डीबी स्टार में रिपोर्टर की भूमिका अदा की और कई बड़े खुलासे स्थानीय स्तर पर किए। इसके बाद अपमे गृह राज्य बिहार की राजधानी पटना में दैनिक जागरण समूह के आईनेक्स्ट वेंचर से जुड़े। 8 महीने के छोटे कार्यकाल के बाद दैनिक भास्कर के रायपुर संस्करण में बतौर रिपोर्टर वापसी हुई। रायपुर में दूसरी पारी के तीन साल के कार्यकाल के सफल निर्वहन के बाद मैनेजमेंट ने भास्कर के भोपाल स्थित नेशनल न्यूजरूम में ट्रांसफर कर दिया। जहां 17 महीने स्पोर्ट्स डेस्क पर बड़े इवेंट्स पर काम किया। इस दौरान इंडियन प्रीमियर लीग, टोक्यो ओलंपिक जैसे बड़े खेल आयोजन का व्यापक कवरेज किया। भास्कर के नेशनल न्यूज रूम में डिजिटल जर्नलिज्म का ककहरा सीखने के बाद फरवरी,2023 में टाइम्स ग्रुप के साथ जुड़ने का मौका मिला। तब से वह टाइम्स नाउ नवभारत की हिंदी वेबसाइट की स्पोर्ट्स डेस्क पर बतौर प्रिंसिपल कॉरस्पान्डन्ट कार्यरत हैं। इस दौरान शेखर ने इंडियन प्रीमियर लीग, आईसीसी वर्ल्ड कप 2023 को कवर किया।

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