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बौखलाए पाकिस्तानी कप्तान सलमान आगा ने मंच पर की शर्मनाक हरकत, फैंस ने शोर मचाकर किया विरोध, WATCH VIDEO

IND vs PAK Asia Cup final: टीम इंडिया के हाथों हारने के बाद पुरस्कार समारोह में रनर अप का पुरस्कार देने के लिए पाकिस्तानी कैप्टन सलमान आगा को बुलाया गया तो उन्होंने कैमरे के सामने बेहद शर्मनाक हरकत कर डाली।

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पाकिस्तान क्रिकेट टीम के कप्तान सलमान आगा (फोटो -AP)

नई दिल्ली: रविवार को दुबई में खेले गए एशिया कप के फाइनल में टीम इंडिया ने पाकिस्तान को धूल चटा दी और खिताबी जीत हासिल कर ली। टीम इंडिया के हाथों हारने के बाद पुरस्कार समारोह में रनर अप यानी उपविजेता का पुरस्कार देने के लिए पाकिस्तानी कप्तान सलमान अली आगा को बुलाया गया तो उन्होंने कैमरे के सामने बेहद शर्मनाक हरकत कर डाली। इस वजह से सलमान को जबरदस्त हूटिंग का सामना करना पड़ा और फैंस ने उनकी आलोचना की।

मंच पर रनर अप का पुरस्कार लेने के लिए जब मंच पर सलमान आगा गए। पाकिस्तान के कप्तान को $75,000 का उपविजेता होने का चेक मिला। लेकिन पाकिस्तानी अधिकारी को सौंपने की बजाय सलमान आगा ने लाइव प्रसारण के दौरान मंच से चेक को फेंक दिया।

पाकिस्तानी कप्तान के हरकत पर फैंस हैरान हो गए। एक फैंस ने कहा कि यह अभी पचाने के लिए एक कठिन बात है। लेकिन मुझे लगता है कि हम बल्ले से अच्छा अंत नहीं कर सके और गेंदबाजी में मुझे लगता है कि हम उत्कृष्ट थे। हमने सब कुछ दिया। लेकिन हां, अगर हम अच्छा अंत कर पाते, तो यह एक अलग कहानी हो सकती थी।

भारत ने मोहसिन नकवी से ट्रॉफी लेने से इनकार किया

एशिया कप चैम्पियन भारतीय टीम ने एशियाई क्रिकेट परिषद (एसीसी) के अध्यक्ष और पाकिस्तान के मंत्री मोहसिन नकवी से विजेता की ट्रॉफी लेने से इनकार कर दिया । भारत ने पाकिस्तान को पांच विकेट से हराकर नौवीं बार एशिया कप जीता । नकवी पुरस्कार वितरण समारोह शुरू होने से पहले एक तरफ खड़े थे और भारतीय खिलाड़ी 15 गज के भीतर खड़े थे । उन्होंने अपनी जगहों से हटने से इनकार कर दिया और समारोह में विलंब होता जा रहा है । नकवी के मंच पर आने के बाद दर्शकों से भारतीय प्रशंसकों ने ‘भारत माता की जय’ के नारे लगाने शुरू कर दिये ।

लगे इंडिया-इंडिया के नारे

नकवी जैसे ही मंच पर आये, उन्हें बताया गया कि भारतीय टीम उनसे ट्रॉफी नहीं लेगी और वह जबर्दस्ती करेंगे तो आधिकारिक विरोध दर्ज किया जायेगा । नकवी इंतजार करते रहे और अचानक आयोजकों में से कोई ट्रॉफी ड्रेसिंग रूम के भीतर ले गया । एक अन्य नाटकीय घटनाक्रम में पाकिस्तानी टीम मैच खत्म होने के एक घंटे बाद तक ड्रेसिंग रूम से बाहर नहीं आई । सिर्फ पीसीबी अध्यक्ष नकवी अकेले खड़े होकर शर्मिंदगी झेलते रहे । करीब 55 मिनट बाद जब पाकिस्तानी टीम बाहर आई तो दर्शकों ने ‘इंडिया इंडिया’ के नारे लगाये ।

Sanjeev Dubey
संजीव कुमार दुबेauthor

पत्रकारिता में मेरे सफर की शुरुआत 20 साल पहले हुई। 2002 अक्टूबर में टीवी की रुपहले दुनिया में दाखिल हुआ। शुरुआत टीवी की दुनिया के उस पहलू से हुई जहां हर खबर को उसके मुताबिक आकार दिया जाता है यानी उसे कसा जाता है। सहारा टीवी में मेरे कामकाज की शुरुआत पैकेजिंग से हुई जहां खबरों को अलग-अलग प्रारूपों में गढ़ने का काम होता है। फिर पीसीआर में आउटपुट एडिटर की भूमिका निभाने का मौका मिला जहां तुरंत निर्णय कर खबरों को ब्रेक करने की चुनौती रहती है। न्यूजरूम की गहमागमी के बीच रनडाउन तैयार करने की जिम्मेदारी भी बखूबी निभाई। यहां ब्रेकिंग, हार्ड कोर की खबरों और फीचर्ड प्रोग्रामिंग ने मेरे अनुभव का दायरा तो बढ़ाया ही उसमें गहराई एवं पैनापन भी दिया। 2011 में टेलिविजन न्यूज की दुनिया को अलविदा कहना पड़ा। अक्टूबर 2011 में Zee News की हिंदी वेबसाइट को अपनी अगवुाई में लॉन्च करने का मौका मिला। डिजिटल की दुनिया और टीवी की दुनिया में खबरें परोसने और खबरों को दिखाने का अंदाज बिल्कुल अलग था। मैं उस दौर में दस्तक दे चुका था जब टीवी भी स्मार्टफोन पर देखा जाने लगा था। डिजिटल पर भी ब्रेकिंग थी। अगर टीवी में प्रोग्रामिंग थी तो यहां भी बतौर फीचर, सॉफ्ट स्टोरीज का विशाल संसार था। एक नया मीडियम जो स्मार्टफोन पर बखूबी देखा और समझा जा सकता था। डिजिटल की इस दुनिया में टीवी और अखबार दोनों समाहित थे। यहां काम करते हुए डिजिटल न्यूज मीडिया की बारीकियां तो सीखी हीं। साथ ही जब जी न्यूज से विदाई ली तो उस समय 33 मिलियन यूजर्स के बीच 84 मिलियन पीवीज देखने की अपार खुशियां हासिल हुईं। जी न्यूज में एक लंबी पारी खेलने के बाद जुलाई 2017 में टाइम्स नाउ नेटवर्क से जुड़ने का अवसर मिला। 2017 में ही टाइम्स नाउ की हिंदी वेबसाइट की शुरुआत हुई। यह पहला मौका था जब टाइम्स नाउ की अगुवाई में कोई हिंदी न्यूज वेबसाइट लॉन्च हुई। यहां एक नई और युवा टीम बनी। यह टीम आक्रामक अंदाज में काम करते हुए कम समय में अपनी पहचान बनाई। डिजिटल की दुनिया के बदलते संसार में अब चुनौती पीवीज की नहीं बल्कि यूजर्स की थी, जिन्हें लाना इतना आसान नहीं थी। लेकिन टीम के जज्बे, हौसले ने असाधारण चुनौतियों को भी अपनी मेहनत एवं लगन से उसे सामान्य बनाया। डिजिटल न्यूज की दुनिया में हर पल चुनौतियों के बीच नया कुछ सीखने-समझने और कुछ कर गुजरने की प्रेरणा मिलती है। यह सिलसिला आज भी अनवरत जारी है-

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